बिहार में कोरोना का कहर तेज,12672 नये संक्रमित मिले, आइएएस अफसर रविशंकर चौधरी की मौत

बिहार में कोरोना वायरस संक्रमण का कहर जारी है। स्टेट में संक्रमण की स्पीड से हाहाकार मच हुआ है। स्टेट में पिछले 24 घंटे में राज्य में 12,672 नये कोरोना संक्रमित मिले हैं।

बिहार में कोरोना का कहर तेज,12672 नये संक्रमित मिले, आइएएस अफसर रविशंकर चौधरी की मौत

पटना।बिहार में कोरोना वायरस संक्रमण का कहर जारी है। स्टेट में संक्रमण की स्पीड से हाहाकार मच हुआ है। स्टेट में पिछले 24 घंटे में राज्य में 12,672 नये कोरोना संक्रमित मिले हैं। स्टेट में अब एक्टिव केस बढ़कर 69868 हो गई है। कोरोना संक्रमण  से स्वास्थ्य विभाग के अपर सचिव आइएएस अफसर रविशंकर चौधरी समेत 54 लोगों की मौतो हो गयी है। 

राजधानी पटना में सर्वाधिक 2801 नये कोरोना संक्रमितों की पहचान हुई।गया में 816, औरंगाबाद में 748, सीवान में 243, मुजफ्फरपुर में 704, सारण में 617 और बेगूसराय में 607 नये कोरोना संक्रमित मिले हैं। स्टेट में पिछले 24 घंटे में 1 लाख 8 हजार 147 सैंपल की कोरोना जांच की गई है।

हेल्थ डिपार्टमेंट के अपर सचिव की कोरोना से मौत, NMCH में बेल फुल
500 बेड के कोविड अस्पसताल एनएमसीएच में नये पेसेंट के लिए नो इंट्री का बोर्ड लग गया है। अब नये पेसेंट  को इंट्री किसी के डिस्चाटर्ज होने या मरने पर मिलेगी। वहीं अस्पयताल में एक मरीज की मौत के बाद आक्रोशित परिजनों ने गुरुवार को तोड़फोड़ की थी। जूनियर डॉक्टर्स स्ट्राइक पड़ चले गये हैं। डॉक्टर्स का कहना है कि अब पर्याप्त संख्या में पुलिस बल की तैनाती के बाद ही वे काम पर लौटेंगे। हॉस्पीटल सुपरिटेंड ने प्रशासन से अस्प ताल में तीन शिफ्ट में 20-20 पुलिसकर्मियों की तैनात की मांग की है। हेल्थ डिपार्टमेंट के अपर सचिव रविशंकर चौधरी की शुक्रवार को कोरोना से मौत हो गई है। वह कई दिनों से एम्स में एडमिट थे।
एक्टिव केस की संख्या 70 हजार पार

बिहार में एमएलए, एमएलसी, आइपीएस और आइएएस अफसर भी कोरोना संक्रमण का शिकार बन चुके हैं। स्वस्थ होने वाले पेसेंट की रेट लगातार घट रही है। संक्रमित लोगों की संखअया लगातार बढ़ रही है। बिहार में कोरोना से 70 हजार से अधिक एक्टिव केस हो गये हैं।
कोविड हॉस्पीटल एनएमसीएच में भर्ती एडमिट पेसेंट लिए पर्याप्त संख्या में ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध कराने एवं सुरक्षा सुनिश्चित करने को लेकर अस्पताल प्रशासन चिंतित है। सुपरिटेंडेंट डॉ. विनोद कुमार सिंह ने मामले में  स्वास्थ्य मंत्री, विभाग के प्रधान सचिव, मानवाधिकार आयोग के सचिव, डीजीपी, एसएसपी, डीएम सबसे फोन पर गुहार लगा चुके हैं। सबने समस्या के समाधान का आश्वासन दिया लेकिन शुक्रवार की शाम तक कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है। एनएमसीएच में एडमिट 24 पेसेंट की शुक्रवार को मौत हो गई। परिजन अपने नाते-रिश्तेदार का बॉडी लेने के लिए घंटों इंतजार करते रहे हैं। नोडल अफसर डॉ. मुकुल कुमार सिंह ने बताया कि मरने वालों में 17 पटना और सात अन्य जिलों के थे। 
कोरोना के नये स्ट्रेनन खतरनाक,पटना AIIMS की ICU से लौट रहे मात्र 20% पेसेंट
बिहार में कोरोनावायरस संक्रमण को लेकर यह खतरनाक खुलासा हुआ है। पटना के AIIMS की ICU में एडमिट होने वाले कोरोना संक्रमितों में मात्र 20 परसेंट ही स्वस्थ होकर घर लौट पा रहे हैं। यह आंकड़ा 2021 में मिले कोरोनावायरस के नए स्ट्रेन को लेकर हुए अध्ययन में सामने आया है कि मात्र 20 परसेंट ही स्वस्थ हो रहे हैं, उन्हें भी अन्य परेशानियों की वजह से कुछ दिन और इलाज की जरूरत पड़ रही है।
कोरोना के नये स्ट्रेन से मल्टी ऑर्गेन डिसआर्डर
पटना एम्स पल्मोनरी मेडिसिन के एचओडी डॉ. दीपेंद्र कुमार राय ने बताया कि जो मरीज आइसीयू में एडमिट हो रहे हैं, उन्हें किडनी, लंग्स और लिवर की परेशानियों से जूझना पड़ रहा है। 70 परसेंट पेसेंट में किडनी, सौ परसेंट पेसेंट में लंग्स और 60 परसेंट पेसेंट में लिवर की परेशानी हो रही है। मेडिसीन के एचओडी डॉ. रवि ने बताया कि नया स्ट्रेन मल्टी ऑर्गन डिसऑर्डर का कारण बन रहा है। इसके कारण पेसेंट की मौत हो जा रही है।
कम स्वस्थ हो रहे आइसीयू में एडमिट पेसेंट
एनेस्थीसिया एचओडी व एम्स के डीन डॉ. उमेश भदानी ने बताया कि पिछले साल भी आइसीयू में एडमिट होने वाले पेसेंट की हालत ज्यादा गंभीर होती थी। लेकिन इस बार स्वस्थ होने वालों की संख्या कम है। बेड की कमी के कारण बाहर में ही पेसेंट कई दिनों तक रह जाते हैं और जब तक एडमिट होते हैं, स्थिति संभलने लायक नहीं रह जाती है। इसी वजह से अधिक लोगों की मौतें हो रही हैं।
100 परसेंट ऑक्सीजन पर भी अच्छी स्थिति नहीं

स्पेशलिस्ट बताते है कि पिछले वर्ष पेसेंट छह-सात दिनों में ऑक्सीजन देने के बाद बेहतर रिस्पॉन्स करते थे। वे स्वेस्थ होकर घर लौट जा रहे थे। इस बार आइसीयू में जो पेसेंट जा रहे है, उन्हें दवाएं व प्लाज्मा देने के बाद भी स्वस्थ नहीं किया जा पा रहा है। सौ परसेंट ऑक्सीजन व दवाएं भी बेहतर रिजल्ट नहीं दे पा रही हैं। डॉ. दीपेंद्र राय का कहना है कि बड़ी परेशानी यह भी है कि इलाजरत 20 परसेंट पेसेंट मानसिक रूप से टूट जा रहे हैं। इस वजह से उनका ब्लड प्रेशर सामान्य नहीं रहा पा रहा है।