बिहार-झारखंड का 25 साल पुराना सोन जल विवाद खत्म, शाह की मौजूदगी में समझौता; झारखंड को मिलेगा 2 MAF पानी
बिहार-झारखंड के बीच सोन नदी जल बंटवारे का 25 साल पुराना विवाद खत्म हो गया। दिल्ली में अमित शाह की मौजूदगी में MoU हुआ। बिहार को 5.75 MAF और झारखंड को 2 MAF पानी मिलेगा। पलामू-गढ़वा समेत कई जिलों को सिंचाई और पेयजल का लाभ मिलेगा।
HighLights:
- बिहार को 5.75 MAF और झारखंड को 2.00 MAF पानी
- अमित शाह की मौजूदगी में दोनों राज्यों ने MoU पर किए हस्ताक्षर
- पलामू-गढ़वा समेत झारखंड के कई इलाकों को सिंचाई और पेयजल का लाभ
- बिहार के भोजपुर, बक्सर, रोहतास, कैमूर, औरंगाबाद, अरवल, गया और पटना को फायदा
नई दिल्ली (Threesocieties.com Desk): बिहार और झारखंड के बीच सोन नदी के जल बंटवारे को लेकर वर्षों से चला आ रहा विवाद अब समाप्त हो गया है। सोमवार, 31 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में दोनों राज्यों के बीच सोन नदी के पानी के बंटवारे को लेकर समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इस ऐतिहासिक मौके पर केंद्रीय गृह मंत्री एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल, बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन समेत दोनों राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
समझौते के मुताबिक सोन नदी के पानी में बिहार को 5.75 मिलियन एकड़ फीट (MAF) और झारखंड को 2.00 MAF पानी मिलेगा। इसके साथ ही दोनों राज्यों के बीच पानी के हिस्से को लेकर लंबे समय से चला आ रहा गतिरोध औपचारिक रूप से खत्म हो गया।
25 साल से क्यों उलझा था सोन नदी का पानी?
सोन नदी जल विवाद की जड़ वर्ष 1973 के बाणसागर समझौते से जुड़ी है। उस समय सोन नदी के कुल 14.25 MAF पानी में मध्य प्रदेश को 5.25 MAF, उत्तर प्रदेश को 1.25 MAF और तत्कालीन अविभाजित बिहार को 7.75 MAF पानी आवंटित किया गया था। वर्ष 2000 में बिहार से अलग होकर झारखंड नया राज्य बना। इसके बाद अविभाजित बिहार के हिस्से में आए 7.75 MAF पानी में झारखंड की हिस्सेदारी को लेकर दोनों राज्यों के बीच विवाद शुरू हुआ। करीब ढाई दशक तक इस मुद्दे पर स्पष्ट सहमति नहीं बन सकी। अब नए समझौते के तहत इसी 7.75 MAF हिस्से में से बिहार को 5.75 MAF और झारखंड को 2.00 MAF पानी मिलेगा। इससे वर्षों से चली आ रही अनिश्चितता खत्म हो गई है।
रांची की बैठक में बनी थी सहमति, दिल्ली में लगी अंतिम मुहर
इस विवाद के समाधान की दिशा में 10 जुलाई 2025 को रांची में हुई पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की 27वीं बैठक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में बिहार और झारखंड के बीच सोन नदी के पानी के बंटवारे पर बातचीत आगे बढ़ी थी। इसके बाद दोनों राज्यों के बीच तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर कई दौर की चर्चा हुई। आखिरकार सोमवार को दिल्ली में MoU पर हस्ताक्षर के साथ इस लंबे विवाद का औपचारिक समाधान हो गया।
झारखंड को 2 MAF पानी मिलने से क्या फायदा?
झारखंड के लिए यह समझौता इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पहली बार सोन नदी के पानी में उसके हिस्से को औपचारिक रूप से निश्चित किया गया है। सोन नदी झारखंड के पलामू और गढ़वा क्षेत्र से होकर बिहार की ओर जाती है। समझौते के बाद झारखंड के हिस्से के पानी का उपयोग सिंचाई, पेयजल और अन्य विकास कार्यों में किया जा सकेगा। खासकर पलामू और गढ़वा जैसे सूखा प्रभावित क्षेत्रों के किसानों के लिए यह फैसला अहम माना जा रहा है। इससे सिंचाई का दायरा बढ़ने और खेती पर मानसून की निर्भरता कम होने की उम्मीद है। गढ़वा के साथ-साथ आसपास के इलाकों में भी पेयजल उपलब्धता बेहतर होने की उम्मीद है। इससे ग्रामीण आबादी और कृषि क्षेत्र दोनों को फायदा मिल सकता है।
बिहार के इन जिलों को भी मिलेगा बड़ा फायदा
समझौते का लाभ सिर्फ झारखंड तक सीमित नहीं रहेगा। बिहार के दक्षिणी और पठारी क्षेत्रों में भी सोन नदी के पानी की उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद है। बिहार के भोजपुर, बक्सर, रोहतास, कैमूर, औरंगाबाद, अरवल, गया और पटना समेत बड़े क्षेत्र को सिंचाई और पेयजल के लिहाज से फायदा मिलने की संभावना है। सोन नदी की जल उपलब्धता बेहतर होने से कृषि गतिविधियों को बढ़ावा मिलने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
इंद्रपुरी जलाशय परियोजना का रास्ता साफ
सोन नदी जल बंटवारे के विवाद का समाधान होने के बाद लंबे समय से प्रस्तावित इंद्रपुरी जलाशय परियोजना को भी आगे बढ़ाने का रास्ता साफ होने की उम्मीद है।इस परियोजना को लेकर बिहार और झारखंड के बीच पानी के बंटवारे का मुद्दा महत्वपूर्ण बाधा माना जाता रहा है। अब दोनों राज्यों के बीच जल हिस्सेदारी पर सहमति बनने के बाद परियोजना से जुड़े आगे के काम में तेजी आने की संभावना है। इसका असर दक्षिण बिहार के कई जिलों की सिंचाई व्यवस्था पर पड़ सकता है।
सोन-फल्गु लिंक परियोजना को भी मिलेगी गति
सोन नदी के जल बंटवारे पर समझौते के बाद सोन नदी को फल्गु नदी से जोड़ने वाली प्रस्तावित परियोजनाओं को भी गति मिलने की उम्मीद है। इससे गया सहित दक्षिण बिहार के कई इलाकों में जल उपलब्धता बढ़ सकती है। फल्गु नदी में पर्याप्त पानी रहने से धार्मिक और पर्यटन गतिविधियों को भी लाभ मिल सकता है। विशेष रूप से गया में पितृपक्ष के दौरान देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए तर्पण और पिंडदान की सुविधा बेहतर हो सकती है।
झारखंड ने पहले मांगा था 2.35 MAF पानी
सोन नदी के पानी को लेकर बातचीत के दौरान झारखंड ने अपनी हिस्सेदारी के तौर पर 2.35 MAF पानी की मांग रखी थी। हालांकि, विस्तृत बातचीत के बाद दोनों राज्यों के बीच 2.00 MAF पानी पर सहमति बनी। दूसरी ओर, बिहार अपने पुराने हिस्से में से 5.75 MAF पानी हासिल करेगा। इस तरह अविभाजित बिहार के 7.75 MAF हिस्से का अब दोनों राज्यों के बीच स्पष्ट बंटवारा हो गया है।
झारखंड कैबिनेट ने जुलाई में दी थी मंजूरी
इस समझौते की दिशा में झारखंड सरकार पहले ही कदम बढ़ा चुकी थी। राज्य कैबिनेट ने 2 जुलाई 2026 को सोन नदी के जल बंटवारे से जुड़े एकरारनामे के मसौदे को मंजूरी दी थी। इसके बाद केंद्र और दोनों राज्यों के बीच औपचारिक प्रक्रिया पूरी की गई। अब दिल्ली में MoU पर हस्ताक्षर के साथ समझौते को अंतिम रूप मिल गया है।
सम्राट चौधरी बोले- यह सिर्फ पानी का समझौता नहीं
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने समझौते को ऐतिहासिक बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि सक्रिय प्रयास, निरंतर संवाद और प्रभावी मध्यस्थता से इतने लंबे समय से लंबित जटिल विषय का समाधान संभव हुआ। उन्होंने इसे सिर्फ पानी के बंटवारे का समझौता नहीं, बल्कि बिहार और झारखंड के बीच सहयोग, विश्वास और साझा विकास का नया अध्याय बताया।
अमित शाह ने बताया 'टीम भारत' का उदाहरण
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बिहार-झारखंड सोन नदी जल समझौते को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'टीम भारत' की परिकल्पना और सहकारी संघवाद का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि यदि सभी राज्य टीम भारत की भावना से आगे बढ़ें तो ऐसी कोई समस्या नहीं है जिसका समाधान न निकाला जा सके। केंद्र के अनुसार इस समझौते से बिहार और झारखंड के बड़े ग्रामीण क्षेत्रों में लाखों किसानों को सिंचाई का पानी और लोगों को पेयजल उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
10 जिलों से आगे भी दिखेगा असर
सोन नदी जल समझौते का सीधा लाभ बिहार और झारखंड के कई जिलों को मिलने की उम्मीद है। झारखंड में पलामू और गढ़वा प्रमुख लाभार्थी क्षेत्रों में हैं, जबकि बिहार में भोजपुर, बक्सर, रोहतास, कैमूर, औरंगाबाद, अरवल, गया और पटना जैसे जिले इससे प्रभावित होंगे। यानी यह समझौता सिर्फ दो राज्यों के बीच पानी बांटने का फैसला नहीं है, बल्कि कृषि, पेयजल, ग्रामीण विकास, औद्योगिक गतिविधियों और क्षेत्रीय जल सुरक्षा से जुड़ा बड़ा कदम है।
25 साल पुराने विवाद का 'वाटर सॉल्यूशन'
बिहार और झारखंड के गठन के बाद जिस सोन नदी के पानी को लेकर दोनों राज्यों के बीच वर्षों तक खींचतान चलती रही, अब उसका हिस्सा तय हो गया है। बिहार को 5.75 MAF और झारखंड को 2 MAF पानी मिलने से विवाद की सबसे बड़ी वजह खत्म हो गई है। अब चुनौती इस पानी के प्रभावी उपयोग, सिंचाई परियोजनाओं के विस्तार और प्रस्तावित जलाशय एवं लिंक परियोजनाओं को जमीन पर उतारने की होगी। यदि इन परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से लागू किया जाता है, तो झारखंड के पलामू-गढ़वा से लेकर दक्षिण बिहार के कई जिलों की जल और कृषि व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।




