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धनबाद (Threesocieties.com Desk): भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL) के दो दिवसीय दौरे के दूसरे दिन गुरुवार को कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) के मुख्य सतर्कता अधिकारी (CVO) ब्रजेश कुमार त्रिपाठी ने सिजुआ और कतरास क्षेत्रीय कार्यालयों का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने बीसीसीएल में लागू आधुनिक तकनीक आधारित निगरानी और संचालन प्रणालियों का निरीक्षण किया तथा उनकी सराहना की।

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इस अवसर पर उनके साथ निदेशक (तकनीकी-परियोजना एवं योजना) राजीव कुमार सिन्हा, बीसीसीएल की मुख्य सतर्कता अधिकारी दीप्ति पटेल, सीआईएल के महाप्रबंधक (सतर्कता) एन.आर. श्रीवास्तव तथा बीसीसीएल के महाप्रबंधक (सतर्कता) एन.के. ठाकुर भी मौजूद रहे। सिजुआ क्षेत्र के महाप्रबंधक निर्झर चक्रवर्ती तथा कतरास क्षेत्र के महाप्रबंधक बी.के. झा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी भी इस दौरान उपस्थित थे।

ICCC में आधुनिक निगरानी तंत्र का लिया जायजा

दौरे के दौरान अधिकारियों ने सिजुआ और कतरास क्षेत्रों के इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) का निरीक्षण किया, जहां विभिन्न परिचालन और निगरानी तंत्रों की समीक्षा की गई। ब्रजेश कुमार त्रिपाठी ने बीसीसीएल में लागू RFID आधारित सिस्टम, ANPR (ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन) मॉनिटरिंग, ई-हाइंड्रेंस मॉनिटरिंग सिस्टम तथा SAP से जुड़े बायोमेट्रिक उपस्थिति तंत्र की विशेष रूप से प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि इन तकनीकी पहलों ने संगठन में पारदर्शिता, जवाबदेही, परिचालन दक्षता और सुशासन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

प्रबंधन प्रशिक्षुओं को दिया ईमानदारी और पेशेवर कार्यशैली का संदेश

इसके बाद प्रज्वला हॉल, मैनेजमेंट ट्रेनी हॉस्टल में एक संवादात्मक सत्र आयोजित किया गया, जिसमें सिजुआ और कतरास क्षेत्रों की उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं पर विस्तृत प्रस्तुतियां दी गईं। अपने संबोधन में मुख्य सतर्कता अधिकारी ने प्रबंधन प्रशिक्षुओं को सतर्कता, ईमानदारी और पारदर्शिता को अपने कार्य का आधार बनाने की सलाह दी। उन्होंने युवा अधिकारियों को समर्पण, जवाबदेही और पेशेवर दक्षता के साथ अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने के लिए प्रेरित किया।

हरित भविष्य के लिए पौधारोपण अभियान

दौरे के समापन पर सभी गणमान्य अधिकारियों ने पौधारोपण कार्यक्रम में भाग लिया और पर्यावरण संरक्षण तथा हरित पहल के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।बीसीसीएल द्वारा तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था और पर्यावरणीय जिम्मेदारियों के प्रति उठाए जा रहे कदम न केवल संगठन की कार्यक्षमता को बढ़ा रहे हैं, बल्कि कोयला उद्योग में पारदर्शिता और टिकाऊ विकास का नया मॉडल भी प्रस्तुत कर रहे हैं।