Highlights:

  • गालूडीह थाना परिसर में जमीन विवाद की शिकायत लेकर पहुंची महिला ने कथित तौर पर जहर पी लिया
  • बड़ाखुर्शी गांव की पद्मावती सिंह को हालत बिगड़ने पर एमजीएम अस्पताल पहुंचाया गया
  • महिला ने शंभु महतो, शिवशंकर महतो और जगदीश महतो समेत 12 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करायी है
  • महिला का आरोप है कि प्राथमिकी दर्ज होने के बावजूद आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई

जमशेदपुर (Threesocieties.com Desk): झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले में जमीन विवाद से जुड़ा एक मामला उस समय गंभीर हो गया, जब शिकायत पर कार्रवाई नहीं होने से नाराज एक महिला ने गालूडीह थाना परिसर में कथित तौर पर जहर पी लिया। बड़ाखुर्शी गांव की रहने वाली पद्मावती सिंह सोमवार को अपनी शिकायत पर कार्रवाई की मांग को लेकर थाने पहुंची थीं। थाना प्रभारी अंकु कुमार के समक्ष अपनी नाराजगी जताने के दौरान उन्होंने जहर पी लिया। महिला की हालत बिगड़ने पर पुलिसकर्मियों ने उन्हें तत्काल एमजीएम अस्पताल पहुंचाया।

घटना के बाद जमीन विवाद में पुलिस कार्रवाई, प्राथमिकी में लगाई गई धाराओं और विवाद के समाधान को लेकर सवाल उठने लगे हैं। महिला का आरोप है कि जमीन विवाद में मारपीट की शिकायत दर्ज कराने के बावजूद अब तक आरोपियों के खिलाफ अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है।

जमीन विवाद में कार्रवाई नहीं होने से नाराज थीं पद्मावती सिंह

मिली जानकारी के अनुसार, पद्मावती सिंह जमीन विवाद से संबंधित अपनी शिकायत को लेकर गालूडीह थाने पहुंची थीं। उन्होंने थाना प्रभारी के सामने मामले में कार्रवाई करने की मांग रखी। इसी दौरान उन्होंने अपनी कमर से जहर की शीशी निकाली और उसे पी लिया। जहर पीने के कुछ देर बाद महिला को उल्टियां होने लगीं। उनकी हालत बिगड़ती देख थाना परिसर में मौजूद पुलिसकर्मियों ने तत्काल उन्हें एमजीएम अस्पताल पहुंचाया, जहां उन्हें इलाज के लिए भर्ती कराया गया।

12 लोगों के खिलाफ दर्ज है प्राथमिकी

पद्मावती सिंह ने जमीन विवाद को लेकर शंभु महतो, शिवशंकर महतो, जगदीश महतो समेत कुल 12 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करायी है। महिला का आरोप है कि जमीन विवाद के दौरान आरोपियों ने उनके साथ मारपीट की और उन्हें जमीन पर घसीटा। इस घटना के दौरान मोबाइल फोन से वीडियो रिकॉर्ड किए जाने की बात भी सामने आयी है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और मामले में सभी पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है। महिला का कहना है कि प्राथमिकी दर्ज होने के बावजूद आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मामले में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के प्रावधानों के तहत धाराएं नहीं जोड़ी गयीं। इसी बात को लेकर वह नाराज थीं और पुलिस से उचित कार्रवाई की मांग कर रही थीं।

अंचलाधिकारी की कार्यशैली पर भी उठे सवाल

इस मामले को लेकर आजाद पार्टी के जिला युवा उपाध्यक्ष विकास हेंब्रम ने घाटशिला के अंचलाधिकारी की कार्यशैली पर सवाल उठाये हैं। उन्होंने जमीन विवाद की निष्पक्ष जांच कराने और मामले का जल्द समाधान करने की मांग की है। घटना के बाद जमीन विवाद के निपटारे की प्रक्रिया और संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर भी चर्चा शुरू हो गयी है। विवाद का निष्पक्ष समाधान निकालने के लिए प्रशासनिक स्तर पर प्रभावी कार्रवाई की मांग की जा रही है।

पांच एकड़ 74 डिसमिल जमीन को लेकर लंबे समय से विवाद

जानकारी के अनुसार, पायरागुड़ी गांव के बिरहीगोड़ा टोला के पास नेशनल हाइवे-33 के किनारे रैयत स्वर्गीय मनोरंजन भूमिज की पांच एकड़ 74 डिसमिल जमीन है। इसी जमीन को लेकर महतो और भूमिज समुदाय के बीच लंबे समय से विवाद चलने की बात सामने आयी है। बताया जाता है कि इस जमीन को लेकर पहले भी दोनों पक्षों के बीच कई बार तनाव और मारपीट की घटनाएं हो चुकी हैं। ऐसे में जमीन विवाद का स्थायी और निष्पक्ष समाधान निकालना प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण है।

पुलिस जांच और आगे की कार्रवाई पर नजर

गालूडीह थाना परिसर में हुई इस घटना के बाद अब जमीन विवाद से संबंधित प्राथमिकी, महिला की शिकायत और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर आगे की प्रक्रिया पर नजर है। महिला की ओर से लगाये गये आरोपों की जांच और मामले में कानूनी प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार, महिला को इलाज के लिए एमजीएम अस्पताल पहुंचाया गया है और जमीन विवाद से जुड़े मामले की जांच जारी है। महिला की वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति, प्राथमिकी में दर्ज धाराओं और पुलिस की आगे की कार्रवाई को लेकर आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है।