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धनबाद (Threesocieties.com Desk): झारखंड की कोयलांचल नगरी धनबाद एक बार फिर बढ़ती आपराधिक घटनाओं और वर्चस्व की लड़ाई को लेकर सुर्खियों में है। कोयला और लोहा कारोबार में दबदबा कायम करने की जंग अब खुलेआम गोलीबारी तक पहुंच चुकी है। बीते तीन दिनों के भीतर जिले में तीन अलग-अलग स्थानों पर हुई फायरिंग की घटनाओं ने न केवल स्थानीय लोगों में भय पैदा कर दिया है, बल्कि प्रशासन की कानून-व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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सबसे ज्यादा चर्चा बाघमारा क्षेत्र की हो रही है, जहां कोयला कारोबार को लेकर दो हिंसक घटनाएं सामने आईं। वहीं झरिया के जामाडोबा क्षेत्र में लोहा कारोबार से जुड़े विवाद में गोलीबारी की घटना ने पूरे इलाके में तनाव बढ़ा दिया। लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने कारोबारियों, स्थानीय निवासियों और प्रशासनिक अधिकारियों की चिंता बढ़ा दी है।

धनबाद के मेयर एवं पूर्व झरिया विधायक संजीव सिंह ने इन घटनाओं पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए बाघमारा को जिले का नया ‘हॉट स्पॉट’ बताया है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में लंबे समय से ऐसा माहौल तैयार किया जा रहा है, जिससे आपसी टकराव और संघर्ष की स्थिति बन रही है। उनके अनुसार, कुछ राजनीतिक और सामाजिक तत्व अपने समर्थकों के माध्यम से विवादों को बढ़ावा दे रहे हैं, जिसका परिणाम अब गोलीबारी और हिंसा के रूप में सामने आने लगा है।

मेयर संजीव सिंह ने यह भी कहा कि बढ़ती अराजकता केवल अपराध का मामला नहीं बल्कि सामाजिक और राजनीतिक अस्थिरता का संकेत भी है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि ऐसे तत्वों की पहचान कर उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए ताकि क्षेत्र में शांति और सामाजिक सौहार्द कायम रह सके।

उन्होंने हाल ही में चर्चित शुभम यादव हत्याकांड का उल्लेख करते हुए कहा कि इस घटना के बाद भी प्रशासन को चेतावनी दी गई थी कि यदि समय रहते संवेदनशील क्षेत्रों में सख्त कदम नहीं उठाए गए तो अपराधियों का मनोबल बढ़ेगा। अब लगातार सामने आ रही हिंसक घटनाएं उसी आशंका को मजबूत करती दिखाई दे रही हैं।

मेयर ने धनबाद के वरीय पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) से मांग की कि शुभम यादव हत्याकांड के आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए तथा बाघमारा और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष निगरानी अभियान चलाया जाए।

उधर, छाताबाद गोलीबारी मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए विक्रम और कन्हैया समेत कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है। अब तक इस मामले में पांच आरोपियों को जेल भेजा जा चुका है। हालांकि लगातार हो रही घटनाओं ने लोगों के मन में यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर धनबाद में बढ़ती हिंसा पर कब तक प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा।

औद्योगिक दृष्टि से महत्वपूर्ण धनबाद जिले में शांति और सुरक्षा बनाए रखना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। अब लोगों की नजर इस बात पर टिकी है कि पुलिस और प्रशासन अपराधियों पर कितनी तेजी और प्रभावी तरीके से कार्रवाई करते हैं।