Highlights:
- IIT (ISM) धनबाद की रिसर्च स्कॉलर पलक जयसवाल का JST-Lotus Fellowship 2026 के Aspire कैटेगरी में चयन
- जापान की ओसाका यूनिवर्सिटी होगी प्रस्तावित शोध परियोजना की होस्ट इंस्टीट्यूट
- पलक को जापानी वैज्ञानिकों के साथ मिलकर रिसर्च करने का अवसर मिलेगा
- IIT (ISM) के प्रो. सुमंत कुमार पाढ़ी निभाएंगे इंडियन प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर की भूमिका
धनबाद (Threesocieties.com Desk): भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (इंडियन स्कूल ऑफ माइंस), धनबाद (IIT-ISM) की रिसर्च स्कॉलर पलक जयसवाल ने संस्थान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। संस्थान के केमिस्ट्री एंड केमिकल बायोलॉजी विभाग में डॉक्टोरल रिसर्च कर रहीं पलक का चयन प्रतिष्ठित JST-Lotus Fellowship 2026 के Aspire कैटेगरी के तहत किया गया है। इस फेलोशिप के माध्यम से उन्हें जापान में रिसर्च करने और वहां के वैज्ञानिकों के साथ मिलकर काम करने का अवसर मिलेगा।
पलक का यह चयन उनके शोध कार्य के साथ-साथ IIT (ISM) धनबाद में हो रहे अकादमिक और वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जापान में रिसर्च का अवसर मिलने से उन्हें अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक समुदाय के साथ जुड़ने, नई शोध पद्धतियों को समझने और अपने विषय में विशेषज्ञता बढ़ाने का मौका मिलेगा।
जापान की ओसाका यूनिवर्सिटी में करेंगी रिसर्च
JST-Lotus Fellowship 2026 के तहत जापान की ओसाका यूनिवर्सिटी को इस शोध परियोजना का होस्ट इंस्टीट्यूट बनाया गया है। यहां पलक को जापानी वैज्ञानिकों के साथ मिलकर काम करने का अवसर मिलेगा। इस तरह का अंतरराष्ट्रीय शोध सहयोग शोधार्थियों को अलग-अलग वैज्ञानिक दृष्टिकोणों, आधुनिक प्रयोगशाला तकनीकों और अनुसंधान की नई संभावनाओं से परिचित कराने में मदद करता है। ओसाका यूनिवर्सिटी में प्रस्तावित शोध सहयोग पलक के डॉक्टोरल रिसर्च को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण अवसर साबित हो सकता है। हालांकि, उनके जापान जाने की निर्धारित तारीख, रिसर्च की अवधि और परियोजना के विस्तृत विषय की जानकारी उपलब्ध विवरण में नहीं दी गई है।
भारत-जापान के वैज्ञानिक सहयोग को बढ़ावा देने की पहल
जापान साइंस एंड टेक्नोलॉजी एजेंसी (JST) से जुड़ी यह पहल भारत और जापान के बीच वैज्ञानिक सहयोग को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण है। इसके माध्यम से दोनों देशों के शोधार्थियों और वैज्ञानिकों के बीच अकादमिक आदान-प्रदान, संयुक्त अनुसंधान तथा वैज्ञानिक ज्ञान साझा करने की संभावनाएं बढ़ती हैं।अंतरराष्ट्रीय फेलोशिप शोधार्थियों को अपने संस्थान से बाहर निकलकर दूसरे देशों के वैज्ञानिक वातावरण में काम करने का अवसर देती हैं। इससे उन्हें नए शोध उपकरणों, प्रयोगात्मक प्रक्रियाओं और वैज्ञानिक समस्याओं को हल करने के विभिन्न तरीकों को समझने में मदद मिल सकती है। पलक जयसवाल का चयन भी इसी व्यापक संदर्भ में महत्वपूर्ण है। इससे IIT (ISM) धनबाद के शोधार्थियों के लिए अंतरराष्ट्रीय अकादमिक सहयोग और वैश्विक शोध नेटवर्क से जुड़ने के अवसरों को रेखांकित किया जा सकता है।
प्रो. सुमंत कुमार पाढ़ी निभाएंगे इंडियन प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर की भूमिका
इस शोध परियोजना में IIT (ISM) धनबाद के केमिस्ट्री एंड केमिकल बायोलॉजी विभाग के प्रोफेसर प्रो. सुमंत कुमार पाढ़ी इंडियन प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर (PI) की भूमिका निभाएंगे। वह संस्थान की सेंट्रल लाइब्रेरी के प्रोफेसर-इन-चार्ज भी हैं। प्रो. पाढ़ी का शोध कार्य कैटेलिसिस, स्मॉल मॉलिक्यूल एक्टिवेशन और सस्टेनेबल एनर्जी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर केंद्रित है। उनके शोध में कार्बन डाइऑक्साइड कन्वर्जन, ग्रीन हाइड्रोजन प्रोडक्शन और आर्टिफिशियल फोटोसिंथेसिस जैसे विषय शामिल हैं।
ये सभी क्षेत्र स्वच्छ ऊर्जा, पर्यावरणीय स्थिरता और भविष्य की ऊर्जा जरूरतों के लिहाज से महत्वपूर्ण वैज्ञानिक विषय हैं। कार्बन डाइऑक्साइड को उपयोगी उत्पादों में बदलने, हरित हाइड्रोजन के उत्पादन और प्रकाश की सहायता से कृत्रिम प्रकाश संश्लेषण जैसी प्रक्रियाओं पर शोध से टिकाऊ ऊर्जा तकनीकों के विकास की संभावनाएं तलाशने में मदद मिल सकती है।
पहले भी IIT (ISM) के रिसर्च स्कॉलर का हुआ था चयन
IIT (ISM) धनबाद के लिए अंतरराष्ट्रीय फेलोशिप के संदर्भ में यह पहली उपलब्धि नहीं है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दिसंबर 2025 में संस्थान ने प्रो. सुमंत कुमार पाढ़ी की रिसर्च टीम से जुड़े शोधार्थी टी. नटराजन के JSPS-Lotus Fellowship 2026 के लिए चयन की जानकारी भी साझा की थी।उस शोध सहयोग के तहत जापान की क्यूशू यूनिवर्सिटी के प्रो. हिरोनोबु ओजावा के साथ काम करने का प्रस्ताव था। पलक जयसवाल का JST-Lotus Fellowship 2026 के Aspire कैटेगरी में चयन संस्थान के शोधार्थियों के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग के एक और अवसर को सामने लाता है। दोनों मामलों में जापानी विश्वविद्यालयों और वैज्ञानिकों के साथ शोध सहयोग की संभावनाएं IIT (ISM) धनबाद के अकादमिक नेटवर्क को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तारित करने के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं।
IIT (ISM) धनबाद के शोधार्थियों के लिए क्यों अहम है यह उपलब्धि?
किसी अंतरराष्ट्रीय फेलोशिप के लिए चयन शोधार्थी को अपने शोध क्षेत्र में नई विशेषज्ञता विकसित करने का अवसर दे सकता है। दूसरे देश के विश्वविद्यालय में काम करने से शोधार्थियों को अलग-अलग वैज्ञानिक पद्धतियों, आधुनिक प्रयोगशाला सुविधाओं और अंतरराष्ट्रीय शोध सहयोग की प्रक्रिया को समझने का अनुभव मिलता है।पलक जयसवाल के लिए जापान में रिसर्च करने का अवसर उनके अकादमिक सफर में एक महत्वपूर्ण कदम है। वहीं, IIT (ISM) धनबाद के लिए यह उपलब्धि अपने डॉक्टोरल शोधार्थियों को अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक सहयोग से जोड़ने की दिशा में एक सकारात्मक संकेत है।
भारत और जापान के बीच वैज्ञानिक आदान-प्रदान से दोनों देशों के शोध संस्थानों को साझा विषयों पर काम करने और ज्ञान का विस्तार करने के अवसर मिलते हैं। ऐसे सहयोग भविष्य में संयुक्त शोध परियोजनाओं और अकादमिक साझेदारी के लिए भी उपयोगी साबित हो सकते हैं।