नई दिल्ली (Threesocieties.com Desk): हरिवंश नारायण सिंह की राज्यसभा में जबरदस्त वापसी हुई है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें फिर से उच्च सदन के लिए नामित कर दिया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी माने जाने वाले हरिवंश का पिछला कार्यकाल 9 अप्रैल को खत्म हुआ था, लेकिन अब वे 2032 तक सांसद बने रहेंगे।
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नौ अप्रैल को खत्म हुआ कार्यकाल, अगले दिन एक और मौकारंजन गोगोई की सीट पर मिली जगह
हरिवंश का नौ अप्रैल को ही कार्यकाल समाप्त हुआ था और अगले ही दिन उन्हें नया मौका मिल गया है। पूर्व चीफ जस्टिस रंजन गोगोई का कार्यकाल समाप्त होने के बाद एक मनोनीत सांसद की सीट खाली थी। उसी स्थान पर हरिवंश को मौका मिला है।गृह मंत्रालय के गजट में हरिवंश के मनोनयन का एलान किया गया है। गृह मंत्रालय के गजट के अनुसार एक सदस्य की सेवानिवृत्ति के बाद खाली हुई सीट पर राष्ट्रपति ने उन्हें मनोनीत किया है।
पीएम मोदी ने सदन में की थी हरिवंश की जमकर सराहना
उनके पिछले कार्यकाल के लिए पीएम मोदी ने सदन में उनकी जमकर सराहना की थी। उनका कहना था कि हरिवंश ने सदन चलाने में
अच्छी भूमिका अदा की। इसके अलावा अपने अनुभव से राज्यसभा को समृद्ध किया है। यही नहीं उन्होंने संकेत भी दे दिया था कि हरिवंश जी की राजनीतिक पारी अभी समाप्त नहीं हुई है। वह आगे भी जनहित में काम करते रहेंगे। माना जा रहा है कि पीएम मोदी की वह टिप्पणी एक संकेत थी कि कैसे हरिवंश फिर से लौट सकते हैं और वही हुआ।
बिहार से इस बार JDU ने हरिवंश को उम्मीदवार नहीं बनाया था, जिससे उनके राजनीतिक भविष्य पर सवाल उठ रहे थे। हालांकि, राष्ट्रपति के मनोनयन ने सभी अटकलों को खत्म कर दिया। हरिवंश पहले भी राज्यसभा के उपसभापति रह चुके हैं और संसद संचालन में उनकी भूमिका की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सराहना की है।
उपसभापति के रूप में मजबूत पहचान
हरिवंश का राजनीतिक सफर बेहद खास रहा है। वे 2014 में पहली बार राज्यसभा पहुंचे थे। 9 अगस्त 2018 को राज्यसभा के उपसभापति बने। 2020 में दोबारा इस पद पर चुने गए। संसद संचालन में उनकी दक्षता की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कई बार सराहना की है।
पत्रकारिता से राजनीति तक का सफर
प्रख्यात पत्रकार रहे हरिवंश नारायण सिंह जो हरिवंश नाम से चर्चित हैं। वे उत्तर प्रदेश के बलिया निवासी हैं। 30 जून 1956 के जन्में हरिवंश ने काशी हिंदू विश्वविद्यालय से स्नातक और पत्रकारिता की पढ़ाई की। लंबे समय तक पत्रकार, ‘प्रभात खबर’ के संपादक रहे हैं।पत्रकारिता से राजनीति तक का उनका सफर उन्हें एक अलग पहचान देता है।