राज्यसभा चुनाव: MP में कांग्रेस कैंडिडेट मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद, झारखंड में परिमल नथवाणी का पर्चा होल्ड

मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त कर दिया गया है। भाजपा ने उन पर तेलंगाना की एक अदालत में लंबित मामले की जानकारी छिपाने का आरोप लगाया था।झारखंड राज्यसभा चुनाव की नामांकन जांच में बड़ा मोड़ आया है। परिमल नथवाणी का नामांकन पत्र नाम की विसंगति के कारण होल्ड पर रख दिया गया है, जबकि झामुमो के बैद्यनाथ राम और कांग्रेस के प्रणव झा के नामांकन सही पाए गए हैं। जानिए पूरा मामला।

राज्यसभा चुनाव: MP में कांग्रेस कैंडिडेट मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद, झारखंड में परिमल नथवाणी का पर्चा होल्ड
मीनाक्षी नटराजन व परिमल नथवाणी।

भोपाल/ रांची (Threesocieties.com Desk): मध्य प्रदेश के राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस को  बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। राज्यसभा की तीसरी सीट के लिए कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र रिटर्निंग ऑफिसर ने निरस्त कर दिया है। वहीं, झारखंड राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन पत्रों की जांच (स्क्रूटनी) के दौरान उद्योगपति और राज्यसभा उम्मीदवार परिमल नथवाणी का नामांकन पत्र तकनीकी आपत्ति के कारण फिलहाल होल्ड पर रख दिया गया है। 

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मध्य प्रदेश में नामांकन पत्रों की जांच के दौरान भाजपा ने आरोप लगाया था कि मीनाक्षी नटराजन ने अपने शपथ पत्र में महत्वपूर्ण जानकारियां छुपाई हैं। पार्टी का दावा था कि तेलंगाना की एक अदालत में लंबित मामले का उल्लेख नामांकन दस्तावेजों में नहीं किया गया, जबकि चुनावी प्रक्रिया में ऐसी जानकारी देना आवश्यक होता है। भाजपा ने लगाए थे जानकारी छिपाने के आरोप भाजपा की ओर से दायर आपत्ति में कहा गया था कि कांग्रेस उम्मीदवार ने अपने खिलाफ न्यायिक प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी का खुलासा नहीं किया। 

मामले की गंभीरता को देखते हुए रिटर्निंग ऑफिसर ने भाजपा और कांग्रेस दोनों पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया। कानूनी और दस्तावेजी पहलुओं की जांच के बाद नामांकन पत्र को अमान्य घोषित कर दिया गया। भाजपा प्रत्याशियों का निर्विरोध निर्वाचन तय बदले घटनाक्रम के बाद भाजपा के तरुण चुग, रजनीश अग्रवाल और नटराजन के विरुद्ध खड़े हुए भाजपा प्रत्याशी महेश केवट का निर्विरोध निर्वाचन तय हो गया है। संख्याबल के आधार पर दो सीट भाजपा को मिलनी थी और तीसरी कांग्रेस को। लेकिन कांग्रेस प्रत्याशी के विरुद्ध भाजपा ने प्रत्याशी खड़ा कर मतदान की नौबत ला दी थी।

परिमल नथवाणी  नाम के फेर में अटका मामला

नामांकन पत्रों की जांच के दौरान निर्वाचन पदाधिकारी ने परिमल नथवाणी के दस्तावेजों में नाम को लेकर विसंगति पाई। जानकारी के अनुसार कुछ दस्तावेजों में उनका नाम "Parimal Nathwani" दर्ज है, जबकि अन्य दस्तावेजों में "Nathwani Parimal" लिखा हुआ है। नाम के क्रम (स्पेलिंग ऑर्डर) में इस अंतर को गंभीर तकनीकी मुद्दा मानते हुए स्क्रूटनी के दौरान आपत्ति दर्ज की गई। निर्वाची पदाधिकारी ने स्पष्ट किया कि चुनावी दस्तावेजों में उम्मीदवार की पहचान पूरी तरह स्पष्ट और एक समान होनी चाहिए।

विभिन्न दस्तावेजों में नाम के अलग-अलग स्वरूप दर्ज होने से सत्यापन प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इसी वजह से नथवाणी के नामांकन को तत्काल मंजूरी नहीं दी गई और फिलहाल उसे होल्ड पर रखा गया है। अब उम्मीदवार पक्ष को संबंधित दस्तावेजों के माध्यम से यह स्पष्ट करना होगा कि दोनों नाम एक ही व्यक्ति के हैं और उनमें कोई कानूनी या पहचान संबंधी विवाद नहीं है। संतोषजनक स्पष्टीकरण मिलने के बाद ही उनके नामांकन पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

बैद्यनाथ राम और प्रणव झा को मिली राहत

जहां एक ओर परिमल नथवाणी के नामांकन पर संशय बना हुआ है, वहीं झामुमो के उम्मीदवार बैद्यनाथ राम और कांग्रेस के प्रणव झा के लिए राहत भरी खबर आई है। स्क्रूटनी के दौरान दोनों उम्मीदवारों के नामांकन पत्रों और दस्तावेजों की जांच पूरी की गई और उन्हें वैध पाया गया। निर्वाची पदाधिकारी की मंजूरी मिलने के बाद दोनों उम्मीदवार अब चुनावी प्रक्रिया के अगले चरण में प्रवेश कर चुके हैं। इससे उनके समर्थकों और राजनीतिक दलों में उत्साह का माहौल है।

अंतिम दिन बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी

नामांकन पत्रों की जांच और अंतिम तिथि के बीच सामने आए इस घटनाक्रम ने झारखंड की राजनीतिक फिजा को गर्म कर दिया है। परिमल नथवाणी जैसे बड़े और प्रभावशाली चेहरे का नामांकन होल्ड पर जाने की खबर के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। सूत्रों के अनुसार नथवाणी का चुनावी और कानूनी दल इस तकनीकी आपत्ति को दूर करने के लिए दस्तावेजों की समीक्षा कर रहा है। विशेषज्ञों की राय लेकर निर्वाचन पदाधिकारी के समक्ष आवश्यक स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने की तैयारी भी की जा रही है।

सबकी निगाहें निर्वाचन अधिकारी के फैसले पर

अब राज्यसभा चुनाव में अगली बड़ी नजर निर्वाचन पदाधिकारी के अंतिम फैसले पर टिकी हुई है। यदि नाम संबंधी विसंगति संतोषजनक तरीके से दूर हो जाती है तो नथवाणी का नामांकन वैध घोषित किया जा सकता है। वहीं यदि दस्तावेजों में खामी बरकरार रहती है तो चुनावी समीकरणों पर इसका व्यापक असर पड़ सकता है। फिलहाल बैद्यनाथ राम और प्रणव झा के नामांकन सुरक्षित माने जा रहे हैं, जबकि परिमल नथवाणी के राजनीतिक भविष्य को लेकर सस्पेंस बना हुआ है।