CJI सूर्यकांत मामले में BCI का यू-टर्न, NALSAR छात्रों को राहत; पहले वकालत पर रोक, कुछ घंटों में फैसला पलटा
CJI सूर्यकांत के NALSAR दीक्षांत समारोह विवाद में BCI ने यू-टर्न लिया। 2026 बैच के छात्रों के वकील के रूप में एनरोलमेंट पर लगी रोक हटाई, 19 अगस्त को जांच रिपोर्ट पर फैसला होगा।
HighLights:
- BCI ने NALSAR के 2026 बैच के छात्रों के एनरोलमेंट पर लगी रोक हटा दी
- सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विकास सिंह ने भी शुरुआती फैसले का किया था विरोध
- BCI ने कहा कि NALSAR के ज्यादातर छात्र कथित अभियान में शामिल नहीं थे
- CJI सूर्यकांत की दीक्षांत समारोह में भागीदारी के विरोध से जुड़े मामले की जांच जारी रहेगी
हैदराबाद/नई दिल्ली (Threesocieties.com Desk): चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत की NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ, हैदराबाद के दीक्षांत समारोह में भागीदारी के विरोध से जुड़े विवाद में बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने बड़ा यू-टर्न लिया है। BCI ने पहले NALSAR के 2026 बैच के किसी भी लॉ ग्रेजुएट के अधिवक्ता के रूप में एनरोलमेंट पर अगले आदेश तक रोक लगा दी थी। हालांकि, आदेश जारी होने के कुछ ही घंटों बाद परिषद ने अपना फैसला बदलते हुए सभी छात्रों को अपनी पसंद की राज्य बार काउंसिल में नामांकन कराने की अनुमति दे दी।
पहले वकालत पर रोक, फिर कुछ घंटों में फैसला बदला
गुरुवार को BCI के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा की ओर से जारी शुरुआती निर्देश में सभी राज्य बार काउंसिलों से कहा गया था कि वे NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के 2026 बैच के किसी भी स्नातक को अगले आदेश तक अधिवक्ता के रूप में पंजीकृत न करें।इस फैसले के बाद कानूनी और सोशल मीडिया जगत में सवाल उठने लगे कि कथित तौर पर कुछ छात्रों के विरोध अभियान के लिए पूरे बैच को जिम्मेदार क्यों ठहराया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विकास सिंह ने भी BCI के शुरुआती फैसले का विरोध किया। इसके बाद BCI ने अपने आदेश पर पुनर्विचार किया और नया निर्देश जारी कर दिया।
BCI ने कहा- ज्यादातर छात्र बेकसूर
नए आदेश में BCI ने स्पष्ट किया कि उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर NALSAR के 2026 बैच के अधिकांश छात्र कथित अभियान में शामिल नहीं थे और उन्हें कुछ छात्रों या अन्य लोगों के कथित आचरण के लिए दंडित नहीं किया जाना चाहिए। परिषद ने कहा कि सभी छात्र अपनी पसंद की राज्य बार काउंसिल में अधिवक्ता के रूप में एनरोल होने के हकदार होंगे। इस फैसले से 2026 बैच के उन छात्रों को बड़ी राहत मिली है, जिनका भविष्य शुरुआती आदेश के कारण अनिश्चित नजर आ रहा था।
CJI सूर्यकांत के खिलाफ कथित अभियान की जांच जारी
हालांकि, छात्रों को एनरोलमेंट की अनुमति मिलने के बावजूद मूल विवाद की जांच खत्म नहीं हुई है। BCI ने NALSAR यूनिवर्सिटी से इस पूरे मामले में तथ्यात्मक और प्रमाणित रिपोर्ट मांगी है। परिषद यह पता लगाना चाहती है कि CJI सूर्यकांत की दीक्षांत समारोह में भागीदारी के विरोध में कथित अभियान किसने शुरू किया, किसने उसका मसौदा तैयार किया, उसे किसने प्रसारित किया और अभियान के लिए छात्रों या अन्य लोगों को किसने संगठित किया। BCI ने यूनिवर्सिटी से ऐसे लोगों की पहचान करने को भी कहा है, जिन्होंने कथित तौर पर बैठकें आयोजित कीं, मीडिया से संपर्क किया या सोशल मीडिया और अन्य संगठित समूहों के माध्यम से अभियान को आगे बढ़ाया।
छात्र संगठनों और बाहरी लोगों की भूमिका की भी होगी जांच
बार काउंसिल ने NALSAR से यह जानकारी भी मांगी है कि क्या किसी छात्र संगठन, स्टूडेंट बार काउंसिल, छात्र संघ या किसी अन्य मान्यता प्राप्त छात्र संगठन ने इस अभियान को शुरू करने, मंजूरी देने, समन्वय करने या फैलाने में भूमिका निभाई थी। इसके अलावा यदि किसी फैकल्टी सदस्य, रिसर्च स्कॉलर, पूर्व छात्र या बाहरी व्यक्ति ने अभियान शुरू करने, उसका मसौदा तैयार करने, सलाह देने, समन्वय करने या उसे आगे बढ़ाने में मदद की है तो उसकी भूमिका और भागीदारी की जानकारी भी मांगी गई है।
बैठकों और आधिकारिक रिकॉर्ड की भी मांगी गई जानकारी
BCI ने यूनिवर्सिटी से इस विवाद से जुड़ी बैठकों के प्रस्ताव, मिनट्स, एजेंडा और अन्य आधिकारिक रिकॉर्ड की प्रतियां उपलब्ध कराने को कहा है। यूनिवर्सिटी को यह भी बताना होगा कि किसी विरोध प्रदर्शन या संगठित गतिविधि के लिए अनुमति मांगी गई थी या नहीं और क्या छात्रों के आचरण या किसी आधिकारिक कार्यक्रम से संबंधित यूनिवर्सिटी के नियमों को लागू किया गया था।
19 अगस्त को अहम फैसला
BCI के मुताबिक NALSAR से मिली रिपोर्ट और उपलब्ध सामग्री पर 19 अगस्त को विचार किया जाएगा। इसके बाद इस मामले में आगे की कार्रवाई को लेकर अंतिम निर्णय लिया जा सकता है। इस तरह फिलहाल NALSAR के 2026 बैच के छात्रों को वकील के रूप में एनरोल होने की अनुमति मिल गई है, लेकिन CJI सूर्यकांत से जुड़े कथित विरोध अभियान की जांच जारी रहेगी।




