Highlights:
- CAT का अहम फैसला: केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण के फैसले के बाद सेल के दो अधिकारियों की सेवा बहाल की गई
- दो अधिकारियों को राहत: राजीव भाटिया और एनपी निमेश को दोबारा सेवा में लिया गया
- 21 अन्य अधिकारियों की उम्मीद बढ़ी: अनिवार्य सेवानिवृत्ति के खिलाफ राहत की आस लगाए अधिकारियों को इस फैसले से उम्मीद मिली है
- अनिल कुमार कनौजिया का मामला लंबित: उनकी नियुक्ति से संबंधित मामला कैट की चेन्नई बेंच में विचाराधीन बताया गया है
बोकारो (Threesocieties.com Desk): स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) में अनिवार्य सेवानिवृत्ति के जरिए सेवा से हटाए गए अधिकारियों के मामले में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT) के फैसले के बाद सेल प्रबंधन ने दो अधिकारियों, राजीव भाटिया और एनपी निमेश, को दोबारा सेवा में बहाल कर दिया है। इस कार्रवाई से कंपनी के उन 21 अन्य अधिकारियों की उम्मीदें भी बढ़ गई हैं, जिन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति देकर सेवा से बाहर कर दिया गया था।
यह मामला सेल के उन अधिकारियों से जुड़ा है, जिनके खिलाफ कंपनी मुख्यालय ने खराब प्रदर्शन और कदाचार का हवाला देते हुए कार्रवाई की थी। संबंधित अधिकारियों ने इस फैसले को चुनौती देते हुए न्यायिक रास्ता अपनाया था। अब दो अधिकारियों की बहाली को इस पूरे मामले में महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है।
CAT के फैसले के बाद दो अधिकारियों की सेवा बहाल
सेल की केंद्रीय विपणन संगठन (CMO) इकाई में कार्यरत रहे तत्कालीन महाप्रबंधक राजीव भाटिया और अधिकारी एनपी निमेश को अनिवार्य सेवानिवृत्ति के बाद सेवा से बाहर कर दिया गया था। दोनों अधिकारियों ने अपनी सेवा से संबंधित मामले में केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण का दरवाजा खटखटाया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, कैट में सुनवाई के बाद दोनों अधिकारियों के पक्ष में फैसला आया। इसके बाद सेल प्रबंधन ने उनकी सेवा बहाल कर दी। इस फैसले से कंपनी के अन्य प्रभावित अधिकारियों को भी अपने मामलों में राहत मिलने की उम्मीद जगी है। हालांकि, दोनों अधिकारियों की बहाली से अन्य सभी अधिकारियों की बहाली स्वतः सुनिश्चित नहीं होती। प्रत्येक मामले में संबंधित आदेश और न्यायिक प्रक्रिया की स्थिति महत्वपूर्ण होगी।
क्या है पूरा मामला?
सेल मुख्यालय ने फरवरी 2025 और अगस्त 2026 में कंपनी की विभिन्न इकाइयों में कार्यरत कुल 23 अधिकारियों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने की कार्रवाई की थी। इनमें केंद्रीय विपणन संगठन (CMO) समेत कंपनी की विभिन्न इकाइयों के अधिकारी शामिल बताए गए हैं। कंपनी प्रबंधन ने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के पीछे खराब प्रदर्शन और कदाचार को आधार बताया था। इसके बाद प्रभावित अधिकारियों के बीच इस फैसले को लेकर असंतोष बढ़ा और कुछ अधिकारियों ने न्यायिक मंचों पर इसे चुनौती दी। इसी क्रम में राजीव भाटिया और एनपी निमेश ने भी कैट का रुख किया। सुनवाई के बाद उन्हें राहत मिली और उनकी सेवा बहाल कर दी गई।
21 अन्य अधिकारियों की बहाली की उम्मीद क्यों बढ़ी?
सेल में अनिवार्य सेवानिवृत्ति की कार्रवाई से प्रभावित 23 अधिकारियों में से दो की बहाली के बाद बाकी अधिकारियों की निगाहें भी आगे की कानूनी प्रक्रिया पर टिक गई हैं। संबंधित अधिकारियों को उम्मीद है कि उनके मामलों में भी न्यायिक हस्तक्षेप से राहत मिल सकती है। इन अधिकारियों में सेल चासनाला कोलियरी, झारखंड ग्रुप ऑफ माइंस, राउरकेला, दुर्गापुर, बर्नपुर और भिलाई इस्पात संयंत्र सहित विभिन्न इकाइयों से जुड़े अधिकारी शामिल बताए गए हैं। दो अधिकारियों की बहाली से प्रभावित कर्मचारियों को कानूनी लड़ाई जारी रखने का भरोसा मिल सकता है। हालांकि, बाकी 21 अधिकारियों के संबंध में अंतिम निर्णय उनके व्यक्तिगत मामलों, उपलब्ध तथ्यों और संबंधित न्यायिक आदेशों पर निर्भर करेगा।
अनिल कुमार कनौजिया का मामला चेन्नई बेंच में
इस मामले से जुड़े एक अन्य अधिकारी अनिल कुमार कनौजिया की सेवा बहाली का मुद्दा केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण की चेन्नई बेंच में विचाराधीन बताया गया है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, उनका मामला केस नंबर 797/2025 के तहत चल रहा है। बताया गया है कि न्यायाधिकरण ने सेल मुख्यालय से यह स्पष्ट करने को कहा है कि अन्य अधिकारियों के बर्खास्तगी संबंधी आदेश वापस लिए जाने के बाद अनिल कुमार कनौजिया को राहत क्यों नहीं दी गई। इस मामले में आगे की सुनवाई और सेल मुख्यालय के जवाब पर नजर रहेगी। चेन्नई बेंच में मामले का अंतिम परिणाम आने के बाद ही उनकी सेवा से जुड़े विवाद की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
अधिकारियों के समर्थन में SEFI ने भी उठाई आवाज
सेल अधिकारियों की अनिवार्य सेवानिवृत्ति का मामला केवल व्यक्तिगत सेवा विवाद तक सीमित नहीं रहा। प्रभावित अधिकारियों को न्याय दिलाने के लिए स्टील एग्जीक्यूटिव फेडरेशन ऑफ इंडिया (SEFI) ने भी पहल की थी। प्राप्त जानकारी के अनुसार, संगठन ने अधिकारियों के न्यायिक खर्चों में सहयोग करने के साथ-साथ प्रधानमंत्री कार्यालय तक अपनी बात पहुंचाई थी। संगठन का प्रयास प्रभावित अधिकारियों के मामले को उचित मंच पर उठाना और उन्हें न्याय दिलाने में मदद करना था। अब दो अधिकारियों की बहाली के बाद प्रभावित अधिकारियों और उनके समर्थकों की निगाहें बाकी मामलों पर टिकी हैं।