शिबू के संघर्ष से हेमंत की सत्ता तक, परिवार की ढाल रहीं रूपी सोरेन; अब यादें
रूपी सोरेन के निधन से सोरेन परिवार में शोक है। शिबू सोरेन के राजनीतिक संघर्ष से हेमंत सोरेन की सत्ता तक रूपी सोरेन ने परिवार को संभाला।
HighLights:
- मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मां रूपी सोरेन का निधन, सोरेन परिवार में शोक
- 1 जनवरी 1962 को हुई थी शिबू सोरेन और रूपी सोरेन की शादी
- शिबू सोरेन के राजनीतिक संघर्ष के दौर में रूपी सोरेन ने परिवार संभाला
- रूपी सोरेन चार बच्चों की मां थीं, उनके तीन बेटे और एक बेटी हैं
रांची (Threesocieties.com Desk): मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मां और झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री दिशोम गुरु शिबू सोरेन की पत्नी रूपी सोरेन के निधन से सोरेन परिवार में शोक है। रूपी सोरेन सार्वजनिक राजनीतिक मंचों पर भले ही बहुत अधिक नजर नहीं आईं, लेकिन शिबू सोरेन के लंबे राजनीतिक संघर्ष और परिवार के सफर में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही। उन्होंने परिवार और बच्चों की जिम्मेदारियां संभालते हुए उस दौर को करीब से देखा, जब शिबू सोरेन झारखंड आंदोलन और सक्रिय राजनीति में अपनी पहचान बना रहे थे।
रूपी सोरेन के निधन के साथ सोरेन परिवार के उस लंबे दौर की यादें भी सामने आ रही हैं, जिसमें संघर्ष, राजनीतिक उतार-चढ़ाव और निजी दुख-सुख एक-दूसरे के साथ चलते रहे।
1 जनवरी 1962 को हुई थी शिबू सोरेन और रूपी सोरेन की शादी

राज्यसभा के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार शिबू सोरेन और रूपी सोरेन की शादी 1 जनवरी 1962 को हुई थी। इसके बाद दोनों ने छह दशक से अधिक का वैवाहिक सफर साथ तय किया।शिबू सोरेन जब झारखंड आंदोलन और सक्रिय राजनीति में अपनी भूमिका मजबूत कर रहे थे, उस समय परिवार की जिम्मेदारियां रूपी सोरेन के हिस्से में थीं। राजनीतिक जीवन में शिबू सोरेन की व्यस्तता और संघर्ष के बीच उन्होंने परिवार और बच्चों को संभाला। समय के साथ सोरेन परिवार झारखंड की राजनीति में एक प्रमुख राजनीतिक परिवार के रूप में स्थापित हुआ। इस पूरे सफर में रूपी सोरेन परिवार के भीतर एक महत्वपूर्ण आधार बनी रहीं।
चार बच्चों की मां थीं रूपी सोरेन

रूपी सोरेन और शिबू सोरेन के चार बच्चे हैं। इनमें तीन बेटे और एक बेटी शामिल हैं। उनके बड़े बेटे दुर्गा सोरेन झारखंड मुक्ति मोर्चा के प्रमुख नेताओं में रहे और जामा से विधायक भी रहे। वर्ष 2009 में दुर्गा सोरेन के निधन ने परिवार को गहरा झटका दिया था। उनके बाद शिबू सोरेन के दूसरे बेटे हेमंत सोरेन ने झारखंड की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई और राज्य के मुख्यमंत्री बने। छोटे बेटे बसंत सोरेन भी राजनीति में सक्रिय रहे और दुमका से विधायक रहे हैं। बेटी अंजनी सोरेन भी झामुमो से जुड़ी रही हैं। इस तरह रूपी सोरेन के परिवार के कई सदस्य समय के साथ झारखंड की राजनीति में सक्रिय होते गए।

शिबू सोरेन के संघर्ष के दौर में संभाला परिवार
शिबू सोरेन का राजनीतिक सफर झारखंड आंदोलन से होते हुए राज्य और राष्ट्रीय राजनीति तक पहुंचा। आंदोलन के शुरुआती दौर में उन्हें लंबे समय तक घर से बाहर रहना पड़ता था। ऐसे समय में परिवार और बच्चों की जिम्मेदारी रूपी सोरेन ने संभाली। उनका सार्वजनिक राजनीतिक जीवन सीमित रहा, लेकिन परिवार के भीतर उनकी भूमिका लगातार बनी रही। शिबू सोरेन की राजनीतिक यात्रा के साथ परिवार भी आगे बढ़ता गया। बाद के वर्षों में यही परिवार झारखंड की राजनीति में प्रभावशाली नामों में शामिल हुआ।

हेमंत सोरेन के जीवन में मां का रिश्ता
हेमंत सोरेन का जन्म 10 अगस्त 1975 को रामगढ़ जिले के नेमरा गांव में हुआ था। उनके पिता शिबू सोरेन और मां रूपी सोरेन थीं। हेमंत सोरेन के राजनीतिक जीवन के विस्तार के साथ उनकी पहचान झारखंड के प्रमुख नेताओं में बनी। मुख्यमंत्री के रूप में उनके राजनीतिक सफर के पीछे परिवार की लंबी पृष्ठभूमि भी रही है। रूपी सोरेन का निधन ऐसे समय में हुआ है, जब सोरेन परिवार पहले ही कई निजी और सार्वजनिक उतार-चढ़ाव देख चुका है। उनके जाने से परिवार ने एक ऐसी सदस्य को खो दिया, जिसने राजनीतिक परिवार के बनने और आगे बढ़ने की पूरी यात्रा को करीब से देखा था।
अस्वस्थता के बावजूद पति का पद्म भूषण सम्मान लेने पहुंची थीं दिल्ली

रूपी सोरेन के जीवन से जुड़ा एक भावुक प्रसंग हाल के दिनों में फिर चर्चा में आया। शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्म भूषण सम्मान दिए जाने के अवसर पर रूपी सोरेन ने राष्ट्रपति भवन में पहुंचकर अपने पति का सम्मान ग्रहण किया था। उस समय उनकी तबीयत ठीक नहीं थी। इसके बावजूद वह दिल्ली पहुंचीं और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के हाथों शिबू सोरेन का पद्म भूषण सम्मान ग्रहण किया। इस अवसर पर विधायक कल्पना सोरेन भी उनके साथ थीं। शिबू सोरेन के लंबे सार्वजनिक जीवन से जुड़े इस महत्वपूर्ण सम्मान को ग्रहण करते हुए रूपी सोरेन की तस्वीरें सामने आई थीं। अब उनके निधन के बाद वही तस्वीर और वह क्षण एक बार फिर याद किया जा रहा है।
शिबू सोरेन को लोक कल्याण और आदिवासी समाज के लिए मिला पद्म भूषण
शिबू सोरेन को लोक कल्याण और आदिवासी समाज के सशक्तीकरण में उनके योगदान के लिए मरणोपरांत पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। उनके सार्वजनिक जीवन का बड़ा हिस्सा आदिवासी समाज के मुद्दों, झारखंड आंदोलन और ग्रामीण समुदायों के बीच काम करने से जुड़ा रहा। वह लोगों को नशे से दूर रहने, शिक्षा अपनाने, खेती और पशुपालन से जुड़ने का संदेश देते रहे। गांवों में आयोजित सभाओं में वह लोगों को अपनी जमीन, मेहनत और स्थानीय संसाधनों से जुड़े रहने की बात कहते थे। शिक्षा को लेकर भी उनका जोर रहा। उनका मानना था कि शिक्षा के माध्यम से समाज शोषण से बाहर निकल सकता है।
शिबू सोरेन की अंतिम विदाई में उमड़ा था जनसैलाब
शिबू सोरेन के निधन के बाद उनकी अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए थे। झारखंड के विभिन्न हिस्सों के साथ पड़ोसी राज्यों से भी लोग नेमरा पहुंचे थे। राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र की कई हस्तियों के साथ आम लोगों ने भी उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि दी थी। उस समय परिवार ने अपने सबसे बड़े राजनीतिक और पारिवारिक स्तंभों में से एक को खोया था। इसके बाद जब रूपी सोरेन दिल्ली पहुंचीं और शिबू सोरेन का पद्म भूषण सम्मान ग्रहण किया, तो यह उनके परिवार के लिए निजी भावनाओं और सार्वजनिक सम्मान से जुड़ा महत्वपूर्ण क्षण बन गया।
अब तस्वीरों और यादों में रह गया वह दौर
रूपी सोरेन के निधन के बाद शिबू सोरेन के साथ बिताए उनके लंबे वैवाहिक जीवन और परिवार की जिम्मेदारियों से जुड़े पुराने प्रसंग फिर सामने आ रहे हैं। शिबू सोरेन के संघर्ष के दौर में परिवार संभालने से लेकर हेमंत सोरेन के राजनीतिक सफर को देखने तक, रूपी सोरेन ने सोरेन परिवार की कई पीढ़ियों और उसके बदलते दौर को करीब से देखा।

पद्म भूषण ग्रहण करते हुए उनकी तस्वीर अब उनके जीवन के एक खास अध्याय की याद दिलाती है। पति शिबू सोरेन के संघर्ष, बेटे हेमंत सोरेन के राजनीतिक सफर और परिवार के कई उतार-चढ़ावों के बीच रूपी सोरेन की अपनी सार्वजनिक मौजूदगी भले ही सीमित रही, लेकिन परिवार की कहानी में उनका स्थान हमेशा दर्ज रहेगा।उनके निधन के साथ सोरेन परिवार के उस दौर की एक और कड़ी समाप्त हो गई है, जिसकी स्मृतियां अब तस्वीरों, रिश्तों और पुरानी यादों में शेष रहेंगी।




