JPSC-JSSC परीक्षा घोटाले पर हेमंत सरकार का बड़ा एक्शन, CID के छापे के बाद चेयरमैन खियांग्ते ने दिया इस्तीफा
JPSC और JSSC परीक्षा विवाद में हेमंत सोरेन सरकार का बड़ा एक्शन। मुख्यमंत्री के निर्देश पर CID ने JPSC और TDPL पर छापेमारी की। कई अधिकारी हिरासत में, डिजिटल सबूत जब्त, TDPL कार्यालय सील और कार्रवाई के बीच JPSC चेयरमैन एल. खियांग्ते ने इस्तीफा दिया।
HighLights:
- JPSC कार्यालय और TDPL के कई ठिकानों पर छापेमारी, महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य जब्त
- छह से अधिक अधिकारी-कर्मचारी हिरासत में, असिस्टेंट एग्जामिनेशन कंट्रोलर श्वेता गुप्ता से पूछताछ
- TDPL कार्यालय सील, हार्ड डिस्क, पेन ड्राइव, डायरी और गोपनीय दस्तावेज बरामद
- कथित पेपर लीक, OMR शीट में हेरफेर, डिजिटल छेड़छाड़ और मनी लॉन्ड्रिंग की जांच
- कार्रवाई के बीच JPSC चेयरमैन एल. खियांग्ते ने पद से इस्तीफा दिया
रांची (Threesocieties.com Desk): झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, पेपर लीक और रिजल्ट में गड़बड़ी के आरोपों पर हेमंत सोरेन सरकार ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। मुख्यमंत्री को लगातार मिल रही शिकायतों के बाद उनके निर्देश पर अपराध अनुसंधान विभाग (CID) और रांची पुलिस की संयुक्त टीम ने मंगलवार को JPSC कार्यालय और परीक्षा संचालन करने वाली एजेंसी मेसर्स TSR Data Processing Pvt. Ltd. (TDPL) के कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की।
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कार्रवाई के दौरान छह से अधिक अधिकारियों और कर्मचारियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। वहीं कई अहम दस्तावेज, हार्ड डिस्क, पेन ड्राइव, डायरी और डिजिटल रिकॉर्ड जब्त किए गए हैं। इस पूरे घटनाक्रम के बीच देर रात JPSC के चेयरमैन एल. खियांग्ते ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया, जिससे राज्य के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर हुई कार्रवाई
सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पिछले कई महीनों से JPSC और JSSC परीक्षाओं में अनियमितताओं, कथित पेपर लीक, रिजल्ट में हेरफेर और चयन प्रक्रिया में गड़बड़ी की लगातार शिकायतें मिल रही थीं। शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए सरकार ने CID को पूरे मामले की जांच, प्राथमिकी दर्ज करने और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने का निर्देश दिया।इसके बाद मंगलवार को CID की टीम ने JPSC मुख्यालय, संबंधित अधिकारियों के कार्यालयों और परीक्षा एजेंसी TDPL के परिसरों पर एक साथ छापेमारी की।
TDPL कार्यालय सील, कई डिजिटल सबूत जब्त
जांच एजेंसी ने परीक्षा संचालन करने वाली एजेंसी TDPL के कार्यालय को सील कर दिया। छापेमारी के दौरान जांच टीम ने कई महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और दस्तावेज जब्त किए हैं। बरामद सामग्री में शामिल हैं—
हार्ड डिस्क
पेन ड्राइव
डायरी
कंप्यूटर रिकॉर्ड
गोपनीय दस्तावेज
डिजिटल डेटा
इन सभी को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा जा रहा है।
श्वेता गुप्ता समेत कई लोगों से पूछताछ
CID ने JPSC की असिस्टेंट एग्जामिनेशन कंट्रोलर श्वेता गुप्ता समेत कई लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की है। जानकारी के अनुसार श्वेता गुप्ता का मई 2026 में खाद्य आपूर्ति विभाग में तबादला हो चुका था, लेकिन बाद में उन्होंने फिर से JPSC में कार्यभार संभाल लिया। आरोप है कि परीक्षा से जुड़े अधिकांश संवेदनशील कार्य उनके पास केंद्रित थे। हालांकि CID ने अभी तक उनके खिलाफ किसी विशेष आरोप की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
चेयरमैन एल. खियांग्ते ने दिया इस्तीफा
CID की कार्रवाई और बढ़ते प्रशासनिक दबाव के बीच मंगलवार रात JPSC के चेयरमैन एल. खियांग्ते ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्हें 27 फरवरी 2025 को आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। उनके इस्तीफे को पूरे मामले में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।
मनोज कुमार तिवारी पर गंभीर आरोप
मुख्यमंत्री को मिली शिकायतों में आरोप लगाया गया है कि परीक्षा एजेंसी TDPL का मार्केटिंग मैनेजर मनोज कुमार तिवारी उर्फ अभय कुमार तिवारी कथित रूप से जालसाजी के जरिए JPSC और JSSC की कई परीक्षाओं में सफल होता रहा। शिकायत में यह भी कहा गया है कि वह लगातार टॉप-10 रैंक में शामिल होता था। मामले में कंपनी के अन्य अधिकारियों पर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
इन धाराओं में जांच की दिशा
शिकायतों में निम्न आरोपों की जांच की जा रही है—
आपराधिक साजिश
पेपर लीक
OMR शीट में हेरफेर
डिजिटल रिकॉर्ड से छेड़छाड़
अवैध वसूली
फर्जीवाड़ा
मनी लॉन्ड्रिंग
जांच एजेंसियां सभी डिजिटल साक्ष्यों का फोरेंसिक विश्लेषण करा रही हैं।
सामाजिक कार्यकर्ता की शिकायत भी बनी आधार
रांची के नगड़ी निवासी सामाजिक कार्यकर्ता शिवशंकर शर्मा ने भी इस मामले में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में TDPL कंपनी, इसके मार्केटिंग मैनेजर मनोज कुमार तिवारी, निदेशक सत्यपाल सिंह, रामबीर सिंह सहित अन्य अज्ञात प्रोग्रामर और लोकसेवकों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
सरकार का सख्त संदेश
सरकार का कहना है कि छात्रों के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
सूत्रों का मानना है कि जब्त डिजिटल साक्ष्यों की जांच और हिरासत में लिए गए लोगों से पूछताछ के बाद आने वाले दिनों में कई और बड़े खुलासे हो सकते हैं। मामले में जल्द ही एफआईआर दर्ज होने और कई गिरफ्तारियों की संभावना भी जताई जा रही है।
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