मिसिर बेसरा से पूछताछ में खुला माओवादियों का राज! 175 केसों का आरोपी 40 साल बाद धनबाद जेल पहुंचा

Dhanbad News: माओवादी पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा से रिमांड में पूछताछ के दौरान पुलिस को कई अहम जानकारियां मिलने का दावा है। 175 मामलों के आरोपी बेसरा समेत तीन आरोपियों को 12 अगस्त को धनबाद जेल भेज दिया गया।

मिसिर बेसरा से पूछताछ में खुला माओवादियों का राज! 175 केसों का आरोपी 40 साल बाद धनबाद जेल पहुंचा
मिसिर बेसरा समेत तीनों नक्सली जेल भेजे गये।

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  • मिसिर बेसरा के खिलाफ झारखंड, बिहार, ओडिशा और छत्तीसगढ़ में 175 मामले दर्ज होने की पुलिस जानकारी
  • 44 दिन की रिमांड के लिए पुलिस ने मांगी थी हिरासत, लेकिन अवधि पूरी होने से पहले ही जेल भेजा गया
  • पुलिस पूछताछ में माओवादी संगठन, पुराने नक्सली हमलों और नेटवर्क से जुड़ी अहम जानकारियां सामने आयी
  • मिसिर बेसरा पर झारखंड में 1 करोड़ और ओडिशा में 1.20 करोड़ रुपये का घोषित था इनाम

धनबाद (Threesocieties.com Desk):  लंबे समय तक सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बने रहे माओवादी पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा उर्फ सागर उर्फ भास्कर उर्फ सुर्निमल से पुलिस रिमांड के दौरान पूछताछ में संगठन से जुड़े कई अहम तथ्यों के सामने आने का दावा किया गया है। पुलिस के अनुसार, करीब चार दशक से माओवादी गतिविधियों में सक्रिय रहे बेसरा ने पूछताछ के दौरान कई घटनाओं और संगठनात्मक गतिविधियों में अपनी संलिप्तता स्वीकार की है।

मिसिर बेसरा के खिलाफ झारखंड, बिहार, ओडिशा और छत्तीसगढ़ में कुल 175 मामले दर्ज होने की बात पुलिस ने कही है। वहीं, उसके सहयोगी मोछू उर्फ मेहनत उर्फ विभीषण उर्फ टुम्बा मुर्मू पर 137 और बीरेन हांसदा उर्फ गौरव हांसदा पर आठ मामले दर्ज बताए गए हैं।

रिमांड की अवधि पूरी होने से पहले बुधवार, 12 अगस्त 2026 को पुलिस ने मिसिर बेसरा समेत तीनों आरोपियों को अदालत में पेश किया। अदालत के आदेश के बाद तीनों को न्यायिक हिरासत में धनबाद जेल भेज दिया गया।

44 दिन की रिमांड पर लिया गया था

मिसिर बेसरा, मोछू उर्फ विभीषण और बीरेन हांसदा को 30 जुलाई को पुलिस ने अदालत से रिमांड पर लिया था। पुलिस की ओर से 44 दिन यानी 1,056 घंटे की पुलिस हिरासत की मांग की गई थी। रिमांड के दौरान आरोपियों से रांची में राज्य और केंद्र सरकार की विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों ने पूछताछ की।

पुलिस के अनुसार, पूछताछ का मुख्य उद्देश्य पुराने नक्सली मामलों, संगठन के नेटवर्क, हथियारों की उपलब्धता, सुरक्षा बलों पर हुए हमलों और माओवादी गतिविधियों से जुड़े अन्य पहलुओं की जानकारी जुटाना था। पुलिस सूत्रों का दावा है कि पूछताछ के दौरान आरोपियों से कई पुराने मामलों के संबंध में जानकारी मिली और कुछ घटनाओं में उनकी भूमिका के बारे में भी पूछताछ की गई।

बेहचिया में पांच नक्सलियों की गिरफ्तारी से खुला मामला

मिसिर बेसरा और उसके सहयोगियों की गिरफ्तारी 28 जुलाई को बरवाअड्डा थाना क्षेत्र के तिलैया पंचायत स्थित बेहचिया गांव के पास हुई कार्रवाई से जुड़ी है। पुलिस के अनुसार, खुफिया सूचना के आधार पर महिंद्रा मिनी वैन/स्कॉर्पियो संख्या जेएच-10-बीएच-1056 में सवार पांच संदिग्ध माओवादियों को पकड़ा गया था। उनके पास से तीन AK-47 राइफल, आठ मैगजीन और 288 गोलियां बरामद होने की बात कही गई। इसके बाद 29 जुलाई को बरवाअड्डा थाने में मिसिर बेसरा, रीजनल कमांडर मोछू, एरिया कमांडर गौरव उर्फ वीरेंद्र हांसदा उर्फ सौरभ, मंगल मुर्मू और दिनेश राय के खिलाफ यूएपीए, सीएलए, आर्म्स एक्ट और बीएनएस की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई।

कॉलेज के दिनों से शुरू हुआ माओवादी सफर

पुलिस रिकॉर्ड और पूछताछ से सामने आई जानकारी के मुताबिक, मिसिर बेसरा मूल रूप से पीरटांड़ क्षेत्र का रहने वाला है। उसने धनबाद के पीके राय मेमोरियल कॉलेज से पीजी की पढ़ाई पूरी की थी। कॉलेज के दिनों में ही वह क्रांतिकारी छात्र गतिविधियों से जुड़ा। बाद में महाजनी प्रथा और सामंती व्यवस्था के खिलाफ आंदोलन के दौरान उसका संपर्क माओवादी संगठन से हुआ। वर्ष 1994 के आसपास उसने संगठन के लिए काम करना शुरू किया और धीरे-धीरे संगठन में उसकी भूमिका बढ़ती गई। समय के साथ वह संगठन के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचा और पोलित ब्यूरो सदस्य बना। सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, झारखंड के अलावा बिहार, छत्तीसगढ़ और ओडिशा में माओवादी गतिविधियों में उसकी भूमिका रही।

2007 में गिरफ्तार, 2009 में जेल ब्रेक के दौरान छुड़ाया गया

मिसिर बेसरा को सितंबर 2007 में खूंटी से गिरफ्तार किया गया था। हालांकि, वर्ष 2009 में बिहार के लखीसराय में हुए जेल ब्रेक की घटना के दौरान माओवादियों ने उसे जेल से छुड़ा लिया। इसके बाद वह लंबे समय तक बूढ़ा पहाड़, कोल्हान और सारंडा जैसे माओवादी गतिविधियों से प्रभावित इलाकों में सक्रिय रहा। पुलिस के मुताबिक, संगठन में शीर्ष नेताओं के कमजोर पड़ने और कई बड़े नेताओं के मारे जाने या आत्मसमर्पण करने के बाद मिसिर बेसरा लंबे समय तक सक्रिय शीर्ष पोलित ब्यूरो सदस्यों में शामिल रहा।

चार राज्यों में 175 मामले, करोड़ों का इनाम

पुलिस के अनुसार, मिसिर बेसरा के खिलाफ चार राज्यों में 175 मामले दर्ज हैं। इनमें सुरक्षा बलों पर हमले, हथियार लूट, पुलिसकर्मियों की हत्या, आईईडी विस्फोट और अन्य गंभीर आपराधिक मामले शामिल हैं। उस पर झारखंड में एक करोड़ रुपये, जबकि ओडिशा में 1.20 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। इस तरह उसकी गिरफ्तारी सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी सफलता मानी गई।

हथियार लूट से लेकर आईईडी हमलों तक कई घटनाओं में नाम

मिसिर बेसरा से जुड़े माओवादी दस्ते पर वर्षों के दौरान कई गंभीर घटनाओं में शामिल होने के आरोप लगे। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, इन घटनाओं में पुलिस और सुरक्षा बलों पर हमले, हथियार लूट और आईईडी विस्फोट जैसी वारदातें शामिल हैं। पुलिस द्वारा बताई गई प्रमुख घटनाओं में  2001 में हजारीबाग के उरिया जंगल में सीआरपीएफ जवानों पर हमला, जिसमें 12 जवानों की मौत हुई; तोपचांची में पुलिस पर हमला, जिसमें 13 पुलिसकर्मियों और कमांडर के मारे जाने की बात कही गई; तथा अप्रैल 2003 में बोकारो के चंद्रपुरा रेल थाना पर हमला शामिल है। इसके अलावा गिरिडीह के होमगार्ड शस्त्रागार पर हमला कर बड़ी संख्या में हथियार लूटने, रांची के रनिया थाना, पश्चिमी सिंहभूम के जामदा ओपी और अन्य सुरक्षा प्रतिष्ठानों पर हमले के मामले भी उसके संगठन से जोड़े जाते रहे हैं।

2025 में भी सुरक्षा बलों को बनाया गया था निशाना

मिसिर बेसरा के दस्ते से जुड़े होने का आरोप वर्ष 2025 की कई माओवादी घटनाओं में भी सामने आया। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, मार्च 2025 में जराईकेला-दिलीपोस जंगल में आईटीबीपी कैंप पर हमला, छोटानागरा के मारांगपोंगा जंगल में सुरक्षा बलों पर हमला तथा इसके बाद सारंडा और छोटानागरा-जराईकेला इलाके में कई आईईडी विस्फोट की घटनाएं हुईं। 18 अप्रैल, 12 मई और 30 मई 2025 को आईईडी विस्फोट, 31 मई को चाईबासा इलाके में पुलिसकर्मियों को निशाना बनाने और अक्टूबर 2025 में जराईकेला थाना क्षेत्र में आईईडी विस्फोट जैसी घटनाओं का भी उल्लेख पुलिस रिकॉर्ड में किया गया है। इन सभी मामलों में मिसिर बेसरा की व्यक्तिगत भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष संबंधित जांच और न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।

मिसिर बेसरा एंड टीम की प्रमुख हिंसक नक्सली वारदातें

अड़की, रांची: हेमरम बाजार में पुलिस पर हमला कर चार राइफल व गोलियां लूटीं।
2001, हजारीबाग: उरिया जंगल में सीआरपीएफ जवानों पर हमला, 12 जवानों की हत्या।
2001, तोपचांची: ब्लॉक परिसर में पुलिस पर हमला, 13 पुलिसकर्मी व कमांडर मारे गए।
मोहनपुर: बीटल सोए में पुलिस पर हमला कर 26 राइफल लूटीं।
अप्रैल 2003, बोकारो: चंद्रपुरा रेल थाना पर हमला कर 23 राइफल व दो स्टेनगन लूटीं।
2004, पश्चिमी सिंहभूम: जामदा ओपी पर हमला कर हथियार लूटे।
जून 2004, पश्चिमी सिंहभूम: बलिवा में पुलिस पर हमला कर 11 एसएलआर व तीन इंसास राइफल लूटीं।
2004, रांची: रनिया थाना पर हमला कर तीन एसएलआर व एक कार्बाइन लूटी।
जून 2005, उत्तर बिहार: मधुबन में बैंक पर हमला कर लूट की वारदात।
2005, बोकारो: झुमरा स्थित सीआरपीएफ कैंप पर हमला।
2005, गिरिडीह: होमगार्ड शस्त्रागार पर हमला कर करीब 100 राइफल लूटीं।
2005, जहानाबाद: जेल ब्रेक की घटना को अंजाम दिया।
2005, लखीसराय: खैरा पिकेट पर हमला।
2005, डुमरा: सीआरपीएफ कैंप पर हमला।
2005, बोकारो: सीआईएसएफ कैंप पर हमला।
26 मई: जराईकेला-किंबुईर जंगल में पुलिस से मुठभेड़, कोबरा जवान विक्रम जाधव को गोली लगी।
25 मई: सरायकेला के सीमावर्ती भलीवां में सीआईएसएफ जवानों पर हमला, रेडियो सेट लूटे।
18 मार्च 2025: जराईकेला-दिलीपोस जंगल में आईटीबीपी कैंप पर हमला, सीआरपीएफ बटालियन कमांडेंट समेत कई जवान घायल।
22 मार्च 2025: छोटानागरा के मारांगपोंगा जंगल में सीआरपीएफ बटालियन पर हमला, जवान सुनील कुमार मंडल की मौत।
12 अप्रैल 2025: छोटानागरा-जराईकेला क्षेत्र में सुरक्षा बलों पर फायरिंग और आईईडी विस्फोट।
18 अप्रैल 2025: सारंडा में आईईडी विस्फोट।
12 मई 2025: छोटानागरा-जराईकेला थाना क्षेत्र में आईईडी विस्फोट।
30 मई 2025: जराईकेला के बनग्राम में आईईडी विस्फोट।
31 मई 2025: आईईडी विस्फोट कर चाईबासा में पुलिसकर्मियों को निशाना बनाया।
8 अगस्त 2025: आईटीबीपी और कोबरा बटालियन के जवानों पर हमला।
10 अक्टूबर 2025: जराईकेला थाना क्षेत्र में आईईडी विस्फोट कर सीआरपीएफ जवानों को निशाना बनाया।
छोटानागरा: आईईडी विस्फोट कर 245 मैगजीन लूटने की वारदात को अंजाम दिया।

देव के सरेंडर के बाद और महत्वपूर्ण हुआ बेसरा

माओवादी संगठन के शीर्ष नेतृत्व के लिए भी हाल के वर्षों में बड़ा बदलाव आया है। 22 फरवरी 2026 को पोलित ब्यूरो सदस्य और संगठन के प्रमुख देव के आत्मसमर्पण की बात सामने आई थी। इससे पहले नंबला केशव राजू उर्फ बसवराजू को 21 मई 2025 को सुरक्षा बलों ने मुठभेड़ में मार गिराया था।माओवादी संगठन के लंबे समय से सचिव रहे गणपति के बारे में भी पिछले कई वर्षों से कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी सुरक्षा एजेंसियों के लिए संगठन की संरचना और पुराने नेटवर्क को समझने के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

अब न्यायिक हिरासत में मिसिर बेसरा

पुलिस रिमांड के दौरान पूछताछ पूरी होने के बाद मिसिर बेसरा, मोछू उर्फ विभीषण और बीरेन हांसदा को 12 अगस्त को अदालत में पेश किया गया। अदालत के आदेश के बाद तीनों को धनबाद जेल भेज दिया गया है। अब आगे की जांच में पुलिस द्वारा रिमांड के दौरान जुटाई गई जानकारियों का सत्यापन किया जाएगा। पुराने मामलों में उनकी भूमिका, संगठन के संपर्कों और अन्य आरोपियों से जुड़े तथ्यों को जांच एजेंसियां संबंधित केस रिकॉर्ड के आधार पर आगे बढ़ा सकती हैं।

नोट: ऊपर दी गई आपराधिक मामलों, घटनाओं में संलिप्तता और स्वीकारोक्ति से संबंधित बातें पुलिस के बयान, प्राथमिकी और पूछताछ में सामने आई जानकारी पर आधारित हैं। किसी आरोपी की दोषसिद्धि अदालत के अंतिम फैसले के अधीन होती है।