Jharkhand: बड़गाईं जमीन केस में CM हेमंत सोरेन पर आरोप तय, 30 नवंबर से ED पेश करेगी गवाह
बड़गाईं की 8.86 एकड़ जमीन से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में हेमंत सोरेन पर आरोप तय। 30 नवंबर से ED गवाह पेश करेगी। जानें पूरा मामला।
HighLights:
- बड़गाईं की 8.86 एकड़ जमीन से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में हेमंत सोरेन पर आरोप तय
- रांची की विशेष PMLA अदालत में बुधवार को आरोप गठन की प्रक्रिया पूरी हुई
- हेमंत सोरेन ने आरोपों को निराधार बताया और खुद को निर्दोष कहा
- मामले में कुल 17 आरोपित हैं, 30 नवंबर 2026 से अभियोजन पक्ष गवाह पेश करेगा
रांची (Threesocieties.com Desk): बड़गाईं अंचल की 8.86 एकड़ जमीन से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ रांची की विशेष PMLA अदालत ने बुधवार को आरोप तय कर दिए। इसके साथ ही मामले में उनके खिलाफ ट्रायल का रास्ता आगे बढ़ गया है। अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 30 नवंबर 2026 की तारीख तय की है। इसी दिन से अभियोजन पक्ष की ओर से गवाह पेश किए जाएंगे।
ईडी के मुताबिक मामला बड़गाईं अंचल के शांतिनगर स्थित करीब 8.86 एकड़ जमीन से जुड़ा है। जांच के दौरान इस जमीन के स्वामित्व और कब्जे को लेकर कई दस्तावेज और बयान सामने आने का दावा ईडी ने किया है। झारखंड हाईकोर्ट के समक्ष दर्ज रिकॉर्ड में ईडी की ओर से आरोप लगाया गया है कि यह जमीन 2010-11 से हेमंत सोरेन के कब्जे और नियंत्रण में थी।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेश हुए हेमंत सोरेन
बुधवार को ईडी के विशेष न्यायाधीश योगेश कुमार की अदालत में हेमंत सोरेन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए। अदालत ने अभियोजन की ओर से लगाए गए आरोपों को पढ़कर सुनाया और उनका पक्ष पूछा। हेमंत सोरेन ने आरोपों से इनकार करते हुए खुद को निर्दोष बताया। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप निराधार हैं। अब मामले में अभियोजन पक्ष अपने गवाह और साक्ष्य अदालत के सामने पेश करेगा।
8.86 एकड़ जमीन को लेकर क्या है ईडी का आरोप?
ईडी की जांच के अनुसार बड़गाईं के शांतिनगर क्षेत्र में करीब 8.86 एकड़ जमीन से संबंधित दस्तावेज जांच के दौरान सामने आए। हाईकोर्ट में दर्ज ईडी के पक्ष के मुताबिक इस जमीन से जुड़े राजस्व रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों की जांच की गई थी। ईडी ने अदालत में यह भी दावा किया है कि जमीन के संबंध में सर्वे के दौरान वहां मौजूद लोगों ने इसे हेमंत सोरेन से जोड़कर जानकारी दी थी।
जांच एजेंसी के मुताबिक जमीन के चारों ओर बाउंड्री और वहां मौजूद गतिविधियों से भी कब्जे का संकेत मिला। हालांकि, ये अभियोजन के आरोप और जांच में सामने आए दावे हैं। इन आरोपों का अंतिम न्यायिक निर्धारण ट्रायल के दौरान साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर होगा।
बैंक्वेट हॉल की योजना का भी किया गया उल्लेख
अभियोजन की ओर से अदालत में लगाए गए आरोपों में जमीन पर बैंक्वेट हॉल बनाने की योजना का भी उल्लेख है। ईडी के अनुसार इस संबंध में साइट प्लान तैयार कराया गया था और जमीन पर बिजली कनेक्शन से जुड़े दस्तावेज भी जांच में सामने आए। ईडी ने अपनी जांच में जमीन से जुड़े दस्तावेजों और राजस्व रिकॉर्ड को महत्वपूर्ण साक्ष्य बताया है। पूर्व की अदालती कार्यवाही में भी 8.86 एकड़ जमीन से जुड़े दस्तावेजों और अधिकारियों के बयानों का उल्लेख हुआ है।
जमीन वापसी के लिए SAR कोर्ट में भी पहुंचा मामला
मामला सामने आने के बाद जमीन को लेकर राजकुमार पाहन के माध्यम से SAR कोर्ट में भी कार्रवाई शुरू हुई। अभियोजन का आरोप है कि यह प्रक्रिया हेमंत सोरेन के खिलाफ ईडी की जांच के दौरान आगे बढ़ी और जमीन से जुड़े रिकॉर्ड में बदलाव की कोशिश की गई।ईडी ने हाईकोर्ट में अपनी दलीलों के दौरान इस पूरी प्रक्रिया को जांच का हिस्सा बताया है। दूसरी ओर, हेमंत सोरेन ने उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों को निराधार बताया है।
17 आरोपितों में हेमंत सोरेन भी शामिल
इस मामले में कुल 17 आरोपित हैं। हेमंत सोरेन के खिलाफ आरोप तय होने से पहले अन्य आरोपितों के खिलाफ आरोप गठन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी। मामले में जिन अन्य आरोपितों के नाम सामने आए हैं, उनमें भानु प्रताप प्रसाद, तापस घोष, शेखर कुशवाहा, विनोद कुमार सिंह, सद्दाम हुसैन, अंतु तिर्की, राजकुमार पाहन, अफसर अली, इरशाद अख्तर, कुमार राजश्री, मनोज कुमार यादव, प्रियरंजन सहाय, बिपिन सिंह, संजीत कुमार और इरशाद शामिल हैं।
30 नवंबर से शुरू होगी गवाहों की गवाही
आरोप गठन के बाद अब मामले की अगली महत्वपूर्ण तारीख 30 नवंबर 2026 है। अदालत ने अभियोजन को उस दिन से गवाह पेश करने का निर्देश दिया है। इस चरण में ईडी अपने उन साक्ष्यों और गवाहों को अदालत के सामने रखेगी, जिनके आधार पर अभियोजन हेमंत सोरेन और अन्य आरोपितों के खिलाफ लगाए गए आरोपों को साबित करने का प्रयास करेगा। ट्रायल के दौरान बचाव पक्ष को भी अभियोजन के गवाहों से जिरह करने और अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा।
हाईकोर्ट में भी चल रही है कानूनी लड़ाई
इधर, हेमंत सोरेन ने आरोप गठन और ट्रायल की कार्यवाही के खिलाफ हाईकोर्ट का भी रुख किया है। हालिया कार्यवाही में हाईकोर्ट ने ईडी से जवाब मांगा है। इससे पहले भी सोरेन की ओर से विशेष PMLA अदालत की कार्यवाही पर रोक और राहत की मांग की गई थी।18 सितंबर 2026 के झारखंड हाईकोर्ट के आदेश में दर्ज है कि हेमंत सोरेन की ओर से ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक की मांग की गई थी और ईडी को जवाब दाखिल करने का समय दिया गया था। एक अन्य हाईकोर्ट कार्यवाही में ईडी को काउंटर एफिडेविट दाखिल करने के लिए समय दिया गया और मामले को आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया।
ईडी ने कहा- जांच में सामने आए हैं नए तथ्य
हाईकोर्ट में ईडी की ओर से यह भी कहा गया है कि जांच जारी है और नए तथ्य सामने आने पर अदालत की अनुमति से पूरक चार्जशीट दाखिल की जा सकती है। वहीं, हेमंत सोरेन की ओर से ट्रायल और आरोप गठन पर रोक की मांग की गई है। उनकी ओर से PMLA की धारा 44(1)(d) का भी हवाला दिया गया है। अब मामले में निचली अदालत में 30 नवंबर से गवाहों की गवाही शुरू होने की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।




