कर्नाटक: बेंगलुरु में जेल या VIP लाउंज? रेप दोषी प्रज्वल रेवन्ना के पास मिला 5G फोन, अफसरों पर गिरी गाज
बेंगलुरु की परप्पना अग्रहारा जेल में रेप दोषी पूर्व सांसद प्रज्वल रेवन्ना के पास 5G मोबाइल मिलने और फोन पर बात करते वीडियो से जेल सुरक्षा पर सवाल उठे। CCB जांच में जुटी, एक अधिकारी सस्पेंड और दूसरे को नोटिस।
HighLights:
- CCB की छापेमारी में 5G स्मार्टफोन, चार्जर, पेन ड्राइव और अन्य सामान बरामद
- रेवन्ना के जेल में मोबाइल पर बात करते हुए वीडियो ने बढ़ाए सुरक्षा पर सवाल
- एक जेल अधिकारी सस्पेंड, दूसरे को शो-कॉज नोटिस
- CCB ने मामला दर्ज कर जांच के लिए विशेष टीम बनाई
बेंगलुरु (Threesocieties.com Desk): दुष्कर्म मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे पूर्व सांसद प्रज्वल रेवन्ना के पास बेंगलुरु की परप्पना अग्रहारा सेंट्रल जेल में मोबाइल फोन मिलने के बाद जेल सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मामले में केंद्रीय अपराध शाखा (CCB) की छापेमारी के दौरान 5G स्मार्टफोन, चार्जर, पेन ड्राइव और अन्य सामान बरामद किया गया। इसके बाद क्राइम ब्रांच ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
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मामले को लेकर उस समय विवाद और बढ़ गया, जब एक वीडियो सामने आया जिसमें रेवन्ना जेल की अपनी कोठरी में मोबाइल फोन पर बातचीत करते नजर आ रहे हैं। वीडियो में वह आम कपड़ों में आराम से फोन का इस्तेमाल करते दिखाई दे रहे हैं। इस वीडियो ने जेल के हाई-सिक्योरिटी इंतजामों और कैदियों तक प्रतिबंधित सामान पहुंचने की व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
CCB की छापेमारी में मिला 5G स्मार्टफोन
जानकारी के मुताबिक, केंद्रीय अपराध शाखा ने करीब 100 कर्मचारियों के साथ परप्पना अग्रहारा सेंट्रल जेल के हाई-सिक्योरिटी हिस्से में अचानक छापेमारी की। दोपहर करीब 2 बजे शुरू हुई तलाशी रात 9 बजे तक चली। सिक्योरिटी सेक्शन-3 की पहली मंजिल स्थित एक साझा कोठरी से रेडमी का 5G स्मार्टफोन, चार्जर, पेन ड्राइव और स्क्रिबलिंग पैड बरामद किया गया। इसी कोठरी में प्रज्वल रेवन्ना और कैदी प्रताप राय के रहने की बात सामने आई है।
शिकायत के अनुसार, बरामद मोबाइल फोन में WhatsApp, Facebook, Instagram, Netflix और Amazon Prime Video जैसे ऐप मौजूद थे। बताया गया कि कई ऐप पासवर्ड से सुरक्षित थे और पूछताछ के दौरान पासवर्ड उपलब्ध नहीं कराया गया।
रेवन्ना ने भी फोन इस्तेमाल करने की बात कही
जांच के दौरान प्रताप राय ने कथित तौर पर अधिकारियों को बताया कि मोबाइल फोन, चार्जर और पेन ड्राइव उसी के थे। उसने कहा कि वह फोन का इस्तेमाल रिश्तेदारों और अपने वकील से संपर्क करने के लिए करता था। खबरों के मुताबिक, पूछताछ में रेवन्ना ने भी परिवार और वकील से संपर्क के लिए उसी मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने की बात कही। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि प्रतिबंधित मोबाइल फोन जेल के अंदर किस तरह पहुंचा और कितने समय से उसका इस्तेमाल किया जा रहा था।
वीडियो ने बढ़ाई जेल प्रशासन की मुश्किल
मोबाइल बरामद होने के बाद सामने आए वीडियो ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है। वीडियो में रेवन्ना को जेल की कोठरी के भीतर मोबाइल फोन पर बातचीत करते हुए देखा जा सकता है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि हाई-सिक्योरिटी जेल के अंदर मोबाइल फोन पहुंचा कैसे और अगर जेल में पहले से सुरक्षा जांच चल रही थी, तो अधिकारियों को इसकी भनक क्यों नहीं लगी। जांच एजेंसियां अब CCTV फुटेज खंगाल रही हैं। इसके साथ ही यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि फोन जेल में किस रास्ते से पहुंचा, किस-किस व्यक्ति ने उसे उपलब्ध कराया और इसके इस्तेमाल की जानकारी जेल कर्मचारियों को थी या नहीं।
6 अगस्त की तलाशी के बाद भी नहीं मिला था फोन
मामले ने इसलिए भी गंभीर रूप ले लिया है क्योंकि जेल प्रशासन की ओर से 6 अगस्त को रेवन्ना की बैरक की तलाशी लिए जाने की बात सामने आई है। उस तलाशी में कथित तौर पर कोई प्रतिबंधित सामान नहीं मिला था। इसके बाद CCB की अचानक छापेमारी में मोबाइल फोन और अन्य सामान मिलने से पहले की सुरक्षा जांच पर भी सवाल उठने लगे हैं। जांच अब इस बात पर भी केंद्रित है कि तलाशी के दौरान प्रतिबंधित सामान कैसे छूट गया।
एक जेल अधिकारी सस्पेंड, दूसरे को नोटिस
मोबाइल फोन बरामदगी के बाद जेल प्रशासन ने लापरवाही के आरोप में कार्रवाई की है। असिस्टेंट सुपरिटेंडेंट ईरन्ना रंगापुर को सस्पेंड कर दिया गया है। वहीं, जेल सुपरिटेंडेंट अंशुच कुमार को सुरक्षा में हुई चूक के मामले में शो-कॉज नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया है। इस कार्रवाई के बाद यह स्पष्ट है कि जेल प्रशासन मामले को गंभीरता से ले रहा है। हालांकि, जांच पूरी होने के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि मोबाइल फोन जेल के भीतर कैसे पहुंचा और इसमें किसी कर्मचारी या बाहरी व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं।
प्रज्वल और प्रताप से पूछताछ को कोर्ट की मंजूरी
डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (इलेक्ट्रॉनिक्स सिटी) एम. नारायण के अनुसार, मामले की जांच के लिए विशेष टीम गठित की गई है। अधिकारियों को प्रज्वल रेवन्ना और प्रताप राय से पूछताछ के लिए अदालत से अनुमति भी मिल गई है। जांच टीम मोबाइल फोन के इस्तेमाल, उसमें मौजूद डेटा और जेल के भीतर उसकी गतिविधियों से जुड़े तमाम पहलुओं की जांच कर रही है।
कौन हैं प्रज्वल रेवन्ना?
प्रज्वल रेवन्ना पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा के पोते और कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी के भतीजे हैं। वह जनता दल (सेक्युलर) के पूर्व सांसद रहे हैं। रेवन्ना को दुष्कर्म और धमकी देने के मामले में दोषी ठहराया गया था और उम्रकैद की सजा सुनाई गई। मामला सामने आने के बाद उनके खिलाफ कई गंभीर आरोप लगे थे।
हासन जिले के होलेनरसीपुरा स्थित रेवन्ना परिवार के फार्महाउस में काम करने वाली एक महिला ने आरोप लगाया था कि उसके साथ कई बार दुष्कर्म किया गया। आरोपों के अनुसार, इस दौरान वीडियो भी बनाए गए और उन्हें सार्वजनिक करने की धमकी दी गई। मामला सामने आने के बाद रेवन्ना विदेश चले गए थे। बाद में वह भारत लौटे, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया। 2024 के लोकसभा चुनाव में भी उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
जेल में VIP ट्रीटमेंट के आरोपों ने फिर उठाया सवाल
मोबाइल फोन के इस्तेमाल का वीडियो सामने आने के बाद अब जेल में VIP कैदियों को कथित तौर पर मिलने वाली सुविधाओं को लेकर बहस तेज हो गई है। सवाल यह है कि अगर हाई-सिक्योरिटी जेल में बंद एक दोषी कैदी तक 5G स्मार्टफोन पहुंच सकता है और वह कोठरी के भीतर आराम से उसका इस्तेमाल कर सकता है, तो जेल की सुरक्षा व्यवस्था कितनी प्रभावी है?
फिलहाल CCB की जांच में मोबाइल फोन के स्रोत, इस्तेमाल और संभावित मददगारों का पता लगाने पर फोकस है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि यह सुरक्षा में महज लापरवाही थी या इसके पीछे कोई संगठित व्यवस्था काम कर रही थी।




