मधुबनी की 108 मीटर मिथिला पेंटिंग ने रचा विश्व रिकॉर्ड, 160 कलाकारों ने चार दिन में रचा इतिहास

मधुबनी की मिथिला चित्रकला संस्थान में बनी 108 मीटर लंबी मिथिला पेंटिंग ने 15 अगस्त को वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया। 160 कलाकारों ने चार दिन में रामचरितमानस के 51 प्रसंगों पर आधारित इस ऐतिहासिक कलाकृति को तैयार किया।

मधुबनी की 108 मीटर मिथिला पेंटिंग ने रचा विश्व रिकॉर्ड, 160 कलाकारों ने चार दिन में रचा इतिहास
108 मीटर की मिथिला पेंटिंग ने रचा वर्ल्ड रिकॉर्ड, मधुबनी का डंका।

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     Highlights:

  • 108 मीटर लंबी और 1 मीटर चौड़ी मिथिला पेंटिंग, 15 अगस्त को वर्ल्ड रिकॉर्ड में शामिल
  • 160 छात्र-छात्राओं ने तैयार की ऐतिहासिक कलाकृति, महज चार दिनों में पूरी हुई पेंटिंग
  • भगवान श्रीराम के जीवन और रामचरितमानस के 51 प्रसंग चित्रित
  • कचनी और भरनी शैली में तैयार की गई पेंटिंग, प्रत्येक प्रसंग के नीचे संबंधित दोहे अंकित

मधुबनी (Threesocieties.com Desk):  मिथिला की पारंपरिक कला ने एक बार फिर दुनिया के मंच पर बिहार का मान बढ़ाया है। मधुबनी स्थित मिथिला चित्रकला संस्थान में तैयार 108 मीटर लंबी और एक मीटर चौड़ी भव्य मिथिला पेंटिंग को 15 अगस्त, स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर वर्ल्ड रिकॉर्ड में शामिल किया गया। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के साथ मिथिला चित्रकला और बिहार की कला-संस्कृति ने वैश्विक स्तर पर नई पहचान बनाई है।

वर्ल्ड रिकॉर्ड यूनियन की टीम ने पूरी पेंटिंग का बारीकी से निरीक्षण करने के बाद इसे रिकॉर्ड के लिए प्रमाणित किया। इसके बाद आयोजित समारोह में वर्ल्ड रिकॉर्ड यूनियन के प्रतिनिधि मिस्टर क्रिस्टोफर ने मिथिला चित्रकला संस्थान को प्रोविजनल सर्टिफिकेट सौंपा। इस मौके पर कलाकारों, कला प्रेमियों और संस्थान के अधिकारियों में खासा उत्साह देखने को मिला।

भगवान श्रीराम के जीवन के 51 प्रसंगों की अनूठी प्रस्तुति

108 मीटर लंबे कैनवास पर मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के जीवन और रामचरितमानस के 51 प्रमुख प्रसंगों को मिथिला चित्रकला की पारंपरिक शैली में उकेरा गया है। पेंटिंग की खासियत यह है कि प्रत्येक प्रसंग के नीचे रामचरितमानस से संबंधित दोहे भी अंकित किए गए हैं। राम जन्म, अवध में जन्मोत्सव, चारों भाइयों की शिक्षा-दीक्षा, विश्वामित्र के साथ गमन, ताड़का और सुबाहु वध, अहिल्या उद्धार, जनकपुर आगमन, सीता जन्म, धनुष यज्ञ और सीता-राम विवाह जैसे प्रसंगों को इसमें स्थान दिया गया है।

इसके अलावा वनवास, अशोक वाटिका, लंका दहन, संजीवनी बूटी लाना, रावण वध, सीता की अग्नि परीक्षा और अंत में भव्य राम दरबार जैसे प्रसंग भी पेंटिंग में जीवंत किए गए हैं।

160 छात्र-छात्राओं ने चार दिन में बनाया रिकॉर्ड

इस विश्व रिकॉर्ड के पीछे मिथिला चित्रकला संस्थान के करीब 160 छात्र-छात्राओं की मेहनत और समर्पण है। संस्थान के डिग्री और सर्टिफिकेट कोर्स के विद्यार्थियों ने दिन-रात लगातार करीब चार दिनों तक काम कर इस विशाल कलाकृति को तैयार किया। कैनवास के बॉर्डर के भीतर रामचरितमानस के अलग-अलग प्रसंगों को चित्रित करने के लिए मिथिला चित्रकला की कचनी और भरनी शैली का इस्तेमाल किया गया। प्रत्येक थीम को संवारने में कलाकारों की टीम जुटी रही। पेंटिंग के नीचे संबंधित कलाकारों के नाम भी अंकित किए गए हैं।

पद्मश्री कलाकारों के मार्गदर्शन में तैयार हुई पेंटिंग

इस ऐतिहासिक कलाकृति के निर्माण में पद्मश्री से सम्मानित मिथिला कलाकारों का भी महत्वपूर्ण मार्गदर्शन रहा। पद्मश्री दुलारी देवी, बउआ देवी और शिवन पासवान समेत संस्थान के कनीय आचार्यों और विशेषज्ञ कलाकारों ने विद्यार्थियों को दिशा दी।

कनीय आचार्य डॉ. रानी झा, सुरेंद्र प्रसाद यादव, अभिषेक कुमार, प्रतीक प्रभाकर और डॉ. संजय जायसवाल समेत अन्य विशेषज्ञों की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। संस्थान के निदेशक चंद्रशेखर प्रसाद सिंह के अनुसार, इस ऐतिहासिक कार्य में शामिल सभी कलाकारों को प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया जाएगा।

मिथिला चित्रकला संस्थान की गैलरी में होगा स्थायी प्रदर्शन

विश्व रिकॉर्ड में शामिल होने के बाद इस विशाल पेंटिंग को मिथिला चित्रकला संस्थान की मुख्य गैलरी में स्थायी रूप से प्रदर्शित किया गया है। इससे देश-विदेश से आने वाले कला प्रेमियों को मिथिला की समृद्ध कला परंपरा और भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़े प्रसंगों को एक साथ देखने का अवसर मिलेगा। मल्टीपर्पस हॉल में आयोजित सम्मान समारोह में वर्ल्ड रिकॉर्ड यूनियन के अधिकारी ने जिलाधिकारी आनंद शर्मा और संस्थान के निदेशक चंद्रशेखर प्रसाद सिंह को मेडल और प्रशस्ति पत्र प्रदान किया।

डीएम ने कलाकारों को दिया उपलब्धि का श्रेय

समारोह को संबोधित करते हुए डीएम आनंद शर्मा ने कहा कि रिकॉर्ड का प्रमाणपत्र और मेडल प्रशासनिक स्तर पर भले ही प्रदान किया गया हो, लेकिन इस उपलब्धि के वास्तविक हकदार वे कलाकार हैं, जिन्होंने दिन-रात मेहनत कर महज चार दिनों में इतनी विशाल कलाकृति को तैयार किया। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि केवल मिथिला चित्रकला संस्थान की नहीं, बल्कि पूरे मिथिलांचल और बिहार के लिए गौरव का विषय है। 108 मीटर की इस पेंटिंग ने मिथिला की पारंपरिक कला को वैश्विक पहचान दिलाने का काम किया है।

समारोह में शामिल हुईं पद्मश्री हस्तियां

सम्मान समारोह में उपनिदेशक नीतीश कुमार, पद्मश्री बउआ देवी, पद्मश्री दुलारी देवी, पद्मश्री शिवन पासवान और पद्मश्री शांति देवी सहित कई वरिष्ठ कलाकार और कला क्षेत्र से जुड़ी हस्तियां मौजूद रहीं। कनीय आचार्य डॉ. रानी झा, प्रतीक प्रभाकर, डॉ. संजय जायसवाल और लेखा पदाधिकारी सुरेंद्र कुमार यादव भी कार्यक्रम में शामिल हुए। वरिष्ठ साहित्यकार आनंद मोहन झा के मंच संचालन के बीच सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

मिथिला की कला को मिला वैश्विक मंच

मधुबनी की इस 108 मीटर लंबी पेंटिंग ने यह साबित कर दिया कि पारंपरिक कला आधुनिक दौर में भी दुनिया का ध्यान आकर्षित कर सकती है। 160 कलाकारों की सामूहिक मेहनत, पद्मश्री कलाकारों का मार्गदर्शन और रामचरितमानस के प्रसंगों की कलात्मक प्रस्तुति ने इस कलाकृति को खास बना दिया है।

स्वतंत्रता दिवस पर विश्व रिकॉर्ड में शामिल हुई यह पेंटिंग अब आने वाली पीढ़ियों के लिए मिथिला की कला, संस्कृति और सामूहिक रचनात्मकता की मिसाल बनेगी। बिहार के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसने स्थानीय कला को राष्ट्रीय सीमाओं से आगे वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में एक मजबूत कदम रखा है।