IIT ISM Dhanbad की बड़ी उपलब्धि: वैज्ञानिकों को नई केमिकल तकनीक के लिए मिला पेटेंट
IIT (ISM) धनबाद के डॉ. सौमित्र मैती और पार्थ प्रतिम मंडल को नई रासायनिक विधि के लिए पेटेंट मिला। जानें दृश्य प्रकाश आधारित तकनीक और इसके संभावित उपयोग।
Highlights:
- IIT (ISM) धनबाद के शोधकर्ताओं ने नई रासायनिक विधि विकसित की
- भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय ने तकनीक को पेटेंट प्रदान किया
- डॉ. सौमित्र मैती और पार्थ प्रतिम मंडल इस शोध के आविष्कारक हैं
- पेटेंट संख्या 603073 है, जो 18 सितंबर 2026 को प्रदान किया गया
धनबाद (Threesocieties.com Desk): धनबाद स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (इंडियन स्कूल ऑफ माइंस), IIT (ISM) के शोधकर्ताओं ने रसायन विज्ञान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। संस्थान के वैज्ञानिकों ने महत्वपूर्ण रासायनिक यौगिक तैयार करने की एक नई विधि विकसित की है, जिसे भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय से पेटेंट मिल गया है। इस तकनीक में दृश्य प्रकाश (Visible Light) की मदद से रासायनिक प्रतिक्रिया कराई जाती है। शोधकर्ताओं की इस उपलब्धि से भविष्य में औषधीय रसायन विज्ञान, दवा अनुसंधान और उपयोगी रासायनिक अणुओं के निर्माण से जुड़े अध्ययनों को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

इस शोध में IIT (ISM) धनबाद के केमिस्ट्री एंड केमिकल बायोलॉजी विभाग के डॉ. सौमित्र मैती और प्रधानमंत्री रिसर्च फेलोशिप (PMRF) के रिसर्च स्कॉलर पार्थ प्रतिम मंडल शामिल हैं। दोनों शोधकर्ताओं को इस नई रासायनिक विधि के आविष्कारक के रूप में मान्यता मिली है।
IIT (ISM) Dhanbad को किस तकनीक के लिए मिला पेटेंट?
इस शोध को मिला पेटेंट एक विशेष रासायनिक अभिकर्मक (Chemical Reagent) और उसके इस्तेमाल से संबंधित है। पेटेंट का आधिकारिक शीर्षक है- “A Novel Bifunctional Formyl-Amination Equivalent Reagent, a Process for the Preparation Thereof, and the Application Thereof in the Synthesis of 1,2-Iminoacetals/Beta-Amino Aldehydes”।इस पेटेंट की संख्या 603073 है। इसके लिए 18 जून 2025 को आवेदन किया गया था, जबकि पेटेंट 18 सितंबर 2026 को प्रदान किया गया।
इस शोध का प्रमुख उद्देश्य बीटा-अमीनो एल्डिहाइड (Beta-Amino Aldehydes) नामक महत्वपूर्ण रासायनिक यौगिकों को तैयार करने की बेहतर विधि विकसित करना है। ये यौगिक कार्बनिक रसायन विज्ञान में दूसरे उपयोगी पदार्थों के निर्माण के लिए शुरुआती सामग्री के रूप में काम आते हैं। शोधकर्ताओं ने इसके लिए एक विशेष द्विकार्यात्मक रासायनिक अभिकर्मक विकसित किया है। यह अभिकर्मक रासायनिक प्रतिक्रिया के दौरान जरूरी घटकों को जोड़ने में मदद करता है। इससे लक्षित रासायनिक यौगिकों के संश्लेषण के लिए एक नया तरीका उपलब्ध होता है।
दृश्य प्रकाश की मदद से तैयार होंगे उपयोगी रासायनिक यौगिक
इस तकनीक की खास बात यह है कि इसमें दृश्य प्रकाश का इस्तेमाल करके रासायनिक प्रतिक्रिया कराई जाती है। शोधकर्ताओं ने ग्लाइऑक्सिलिक एसिड एसीटल से बने एक विशेष अभिकर्मक का उपयोग करते हुए ऐसी विधि विकसित की है, जो एल्कीन जैसे शुरुआती रासायनिक पदार्थों से उपयोगी यौगिक तैयार करने में मदद करती है। एल्कीन कार्बनिक यौगिकों का एक महत्वपूर्ण वर्ग है, जिनका इस्तेमाल कई तरह की रासायनिक प्रतिक्रियाओं में किया जाता है।
नई विधि में इन शुरुआती पदार्थों पर प्रकाश की सहायता से प्रतिक्रिया कराई जाती है, जिससे आवश्यक रासायनिक घटकों को एक साथ जोड़ने का रास्ता मिलता है। आसान शब्दों में समझें तो इस तकनीक में प्रकाश की मदद से रासायनिक प्रतिक्रिया को आगे बढ़ाया जाता है। इससे वैज्ञानिकों को ऐसे जटिल अणु तैयार करने के लिए एक वैकल्पिक तरीका मिलता है, जिन्हें आगे दूसरे रासायनिक पदार्थों के निर्माण में इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि, इस तकनीक के वास्तविक औद्योगिक उपयोग, लागत और बड़े पैमाने पर उत्पादन की संभावनाओं का आकलन करने के लिए आगे के अध्ययन आवश्यक होंगे।
क्या हैं बीटा-अमीनो एल्डिहाइड और क्यों हैं महत्वपूर्ण?
बीटा-अमीनो एल्डिहाइड ऐसे कार्बनिक रासायनिक यौगिक हैं, जिनमें अमीनो और एल्डिहाइड समूह मौजूद होते हैं। इनकी रासायनिक संरचना इन्हें आगे कई तरह के उपयोगी अणुओं के संश्लेषण के लिए महत्वपूर्ण बनाती है। इन यौगिकों की मदद से गामा-अमीनो अल्कोहल और बीटा-अमीनो एसिड जैसे दूसरे रासायनिक पदार्थ तैयार किए जा सकते हैं। इन यौगिकों का अध्ययन औषधीय रसायन विज्ञान, कार्बनिक संश्लेषण और अन्य वैज्ञानिक क्षेत्रों में किया जाता है।
दवा अनुसंधान में नए रासायनिक अणुओं का निर्माण एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। वैज्ञानिक ऐसे अणुओं की संरचना और गुणों का अध्ययन करते हैं, ताकि भविष्य में संभावित औषधीय उपयोगों की पहचान की जा सके। इस लिहाज से बीटा-अमीनो एल्डिहाइड जैसे यौगिकों को तैयार करने की बेहतर विधियां शोध के लिए उपयोगी साबित हो सकती हैं। हालांकि, किसी रासायनिक यौगिक का दवा अनुसंधान में उपयोगी होना अपने आप में यह प्रमाणित नहीं करता कि उससे कोई प्रभावी या सुरक्षित दवा तैयार हो जाएगी। इसके लिए अलग-अलग चरणों में विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन की आवश्यकता होती है।
रासायनिक संश्लेषण की चुनौती को दूर करने की दिशा में कदम
जटिल कार्बनिक अणुओं को तैयार करने में अक्सर अलग-अलग रासायनिक घटकों को नियंत्रित परिस्थितियों में जोड़ना पड़ता है। इसके लिए उपयुक्त अभिकर्मक, प्रतिक्रिया की अनुकूल परिस्थितियां और अपेक्षित उत्पाद प्राप्त करने की प्रभावी विधि महत्वपूर्ण होती है।शोधकर्ताओं की नई तकनीक इसी दिशा में एक प्रयास है। विकसित अभिकर्मक की मदद से ऐसे रासायनिक घटकों को जोड़ने का रास्ता मिलता है, जो बीटा-अमीनो एल्डिहाइड और संबंधित यौगिकों के निर्माण में उपयोगी हैं।
दृश्य प्रकाश आधारित रासायनिक प्रक्रियाएं आधुनिक कार्बनिक रसायन विज्ञान में शोध का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं। ऐसी विधियों में प्रकाश की ऊर्जा का उपयोग रासायनिक प्रतिक्रिया को सक्रिय करने या आगे बढ़ाने के लिए किया जाता है। इस तरह की तकनीकों पर शोध का उद्देश्य नई प्रतिक्रियाओं और अणुओं के निर्माण के लिए प्रभावी विकल्प तलाशना है। हालांकि, किसी विशेष विधि की उपयोगिता उसकी प्रतिक्रिया क्षमता, उत्पाद की मात्रा, चयनात्मकता, लागत और अन्य व्यावहारिक मानकों पर निर्भर करती है।
डॉ. सौमित्र मैती का शोध किन क्षेत्रों पर केंद्रित है?
इस पेटेंट से जुड़े प्रमुख शोधकर्ताओं में शामिल डॉ. सौमित्र मैती का शोध कार्य रेडिकल केमिस्ट्री, होमोजीनियस कैटेलिसिस, फोटोकैटेलिसिस और प्राकृतिक उत्पादों के संपूर्ण संश्लेषण जैसे क्षेत्रों पर केंद्रित है। उन्होंने इंडियन एसोसिएशन फॉर द कल्टिवेशन ऑफ साइंस और जादवपुर विश्वविद्यालय से जुड़े शोध के माध्यम से पीएचडी पूरी की। उनका डॉक्टरेट शोध टेरपेनॉइड्स के संश्लेषण से संबंधित था। रसायन विज्ञान के क्षेत्र में उनके योगदान को मान्यता देते हुए उन्हें केमिकल रिसर्च सोसाइटी ऑफ इंडिया के ब्रॉन्ज मेडल 2027 के लिए भी चुना गया है।
रेडिकल केमिस्ट्री में अत्यधिक प्रतिक्रियाशील रासायनिक कणों से जुड़ी प्रक्रियाओं का अध्ययन किया जाता है। वहीं, फोटोकैटेलिसिस में प्रकाश की मदद से रासायनिक प्रतिक्रियाओं को संचालित करने या उनकी गति बढ़ाने की तकनीकों का अध्ययन किया जाता है। ये दोनों क्षेत्र आधुनिक रासायनिक संश्लेषण में महत्वपूर्ण हैं।
IIT (ISM) Dhanbad के शोध और नवाचार को मिलेगी नई पहचान
IIT (ISM) धनबाद को मिला यह पेटेंट संस्थान में रसायन विज्ञान के क्षेत्र में हो रहे शोध और नवाचार की महत्वपूर्ण उपलब्धि है। किसी शोध को पेटेंट मिलना यह दर्शाता है कि संबंधित आविष्कार को कानूनी संरक्षण प्रदान किया गया है। इससे शोध के संभावित व्यावहारिक अनुप्रयोगों और आगे के विकास की दिशा में काम करने का अवसर मिल सकता है। इस शोध की खासियत एक ऐसे रासायनिक अभिकर्मक और प्रक्रिया का विकास है, जिसका इस्तेमाल महत्वपूर्ण कार्बनिक यौगिकों के संश्लेषण में किया जा सकता है। इससे भविष्य में जटिल रासायनिक अणुओं के निर्माण से जुड़े अध्ययनों को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
दवा अनुसंधान और रासायनिक उद्योग में किसी नई तकनीक की वास्तविक उपयोगिता स्थापित करने के लिए आगे परीक्षण, अनुकूलन और अनुप्रयोग संबंधी शोध की जरूरत होती है। ऐसे में इस पेटेंट को एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक उपलब्धि के रूप में देखा जा सकता है, जो भविष्य में नए शोध और संभावित अनुप्रयोगों के लिए आधार तैयार करता है।




