जमुई जमीन घोटाले में EOU का बड़ा एक्शन, जिला परिषद अध्यक्ष-दंपती पर FIR; 3 गिरफ्तार

जमुई जमीन घोटाले में EOU ने जिला परिषद अध्यक्ष दुलारी देवी और पति गुड्डु यादव समेत कई लोगों पर FIR दर्ज की। 10 एकड़ सरकारी जमीन की कथित फर्जी रजिस्ट्री मामले में 3 गिरफ्तार।

जमुई जमीन घोटाले में EOU का बड़ा एक्शन, जिला परिषद अध्यक्ष-दंपती पर FIR; 3 गिरफ्तार
जमुई जमीन घोटाले में EOU ने दर्ज की एफआइआर।

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  • जमुई के सिकंदरा में 10 एकड़ सरकारी कृषि भूमि की कथित फर्जी रजिस्ट्री का मामला सामने आया
  • जिला परिषद अध्यक्ष दुलारी देवी और उनके पति गुड्डु यादव समेत कई लोगों पर EOU ने प्राथमिकी दर्ज की
  • जांच में दुलारी देवी के नाम पर करीब 7 एकड़ जमीन की खरीद के तीन दस्तावेज मिलने की बात 
  • सिकंदरा के तत्कालीन राजस्वकर्मी छोटेलाल यादव समेत तीन आरोपित गिरफ्तार किए गए

पटना (Threesocieties.com Desk): बिहार के जमुई जिले के सिकंदरा में सरकारी जमीन की कथित फर्जी रजिस्ट्री और दाखिल-खारिज के मामले में आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने बड़ा एक्शन लिया है। EOU ने जिला परिषद अध्यक्ष दुलारी देवी, उनके पति गुड्डु यादव समेत कई लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। मामले में सिकंदरा के तत्कालीन राजस्वकर्मी छोटेलाल यादव समेत तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है।

EOU की जांच के अनुसार, सिकंदरा में कृषि फार्म की करीब 10 एकड़ सरकारी जमीन को कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए निजी लोगों के नाम कराने की कोशिश की गई। जांच में गुड्डु यादव और दुलारी देवी के स्वजनों तथा गिरोह के अन्य सदस्यों के नाम पर 14 निबंधित दस्तावेज मिलने की बात सामने आई है।

जांच एजेंसी के मुताबिक, इनमें तीन दस्तावेजों के जरिए अकेले दुलारी देवी के नाम पर करीब 7 एकड़ जमीन की खरीद की गई। आरोप है कि जमीन की खरीद सरकारी निर्धारित मूल्य से भी कम कीमत पर की गई।

तत्कालीन CO समेत अधिकारियों की भूमिका की जांच

EOU ने इस पूरे मामले में सिकंदरा अंचल कार्यालय के तत्कालीन राजस्व कर्मचारी छोटेलाल यादव, तत्कालीन अंचलाधिकारी विनोद कुमार चौधरी, तत्कालीन राजस्व पदाधिकारी निभा कुमारी और मुकेश कुमार वर्णवाल की भूमिका भी जांच के दायरे में रखी है।जांच के अनुसार, कथित मिलीभगत से 8 जनवरी 2019 को प्राप्त जमीन के खेसरा संख्या 154 और 156 का दाखिल-खारिज भी करा लिया गया था। हालांकि बाद में स्थानीय लोगों की आपत्ति के बाद अन्य निबंधित दस्तावेजों के आधार पर किए गए दाखिल-खारिज को अलग-अलग स्तरों पर अस्वीकृत कर दिया गया। EOU ने मंगलवार को आर्थिक अपराध इकाई थाने में इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की। इसके बाद आरोपितों के ठिकानों पर छापेमारी की गई।

तीन आरोपित गिरफ्तार

छापेमारी और जांच की कार्रवाई के दौरान सिकंदरा के तत्कालीन राजस्वकर्मी छोटेलाल यादव, सिकंदरा निवासी प्रदीप चौधरी और जवाहन प्रसाद यादव को गिरफ्तार किया गया है। EOU का कहना है कि जमीन की कथित फर्जी खरीद-बिक्री में शामिल अन्य अधिकारियों और लोगों की भूमिका का भी सत्यापन किया जा रहा है। जांच में जिनकी भूमिका सामने आएगी, उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

1924 और 1927 के कथित फर्जी कागजात का इस्तेमाल

EOU के मुताबिक, जिस जमीन को लेकर विवाद सामने आया है, उसे कृषि विभाग ने वर्ष 1959 में कृषि फार्म के लिए अधिग्रहित किया था। जांच एजेंसी का आरोप है कि जमीन पर कब्जा जमाने के लिए गिरोह के सदस्यों ने अंचल कार्यालय के अधिकारियों और कर्मचारियों की कथित मिलीभगत से वर्ष 1924 और 1927 के पुराने दस्तावेज तैयार किए। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर सरकारी जमीन को अपने और गिरोह से जुड़े लोगों के नाम पर खरीदने तथा दाखिल-खारिज कराने की कोशिश की गई।

मुंगेर के अवर निबंधक और सिकंदरा के अंचलाधिकारी की ओर से भी इस मामले में रिपोर्ट दी गई है। रिपोर्ट में 1924 और 1927 में तैयार बताए गए दस्तावेजों को फर्जी बताया गया है। इस मामले में 29 सितंबर को नया कांड दर्ज कर तत्कालीन अंचलाधिकारी, कर्मचारियों और राजस्व अधिकारियों की भूमिका की जांच शुरू की गई है।

कमजोर लोगों की जमीन को कथित तौर पर विवादित बनाकर बेचने का आरोप

EOU ने इससे पहले जुलाई में भी गुड्डु यादव से जुड़े कथित जमीन खरीद-बिक्री नेटवर्क के ठिकानों पर छापेमारी की थी। इस कार्रवाई में जमीन से जुड़े कथित फर्जीवाड़े का खुलासा होने के बाद 27 जुलाई को आर्थिक अपराध थाना कांड संख्या 14/26 दर्ज किया गया था।जांच एजेंसी के अनुसार, गिरोह के सदस्य कथित तौर पर कमजोर और असहाय लोगों की जमीन को पहले तीसरे व्यक्ति के माध्यम से विवादित बनाते थे। इसके बाद जमीन को कम कीमत पर खरीदकर ऊंचे दाम पर बेचने का आरोप है। EOU अब इस पूरे नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों, दस्तावेज तैयार करने वालों और संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका की जांच कर रही है।

आगे और कार्रवाई के संकेत

जांच एजेंसी के अनुसार, सरकारी कृषि भूमि की कथित फर्जी खरीद-बिक्री और दाखिल-खारिज में शामिल सभी लोगों की भूमिका का सत्यापन किया जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद अन्य आरोपितों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल मामले में जिला परिषद अध्यक्ष दुलारी देवी, उनके पति गुड्डु यादव और अन्य आरोपितों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की जांच जारी है। गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ के आधार पर जमीन के दस्तावेज, कथित नेटवर्क और अंचल कार्यालय से जुड़े रिकॉर्ड की भी पड़ताल की जा रही है।