पटना पर बाढ़ का बड़ा खतरा! 4 नदियों का घेरा, गांधीघाट पर गंगा HFL पार
पटना में बाढ़ का खतरा गहराता जा रहा है। गांधीघाट पर गंगा का जलस्तर 4 घंटे में 10 सेमी बढ़कर HFL पार कर गया। रविवार सुबह तक और बढ़ने का अनुमान है। सभी डीएम-एसपी अलर्ट पर हैं।
HighLights:
- पटना को गंगा, सोन, पुनपुन और दरधा नदियों के बढ़ते जलस्तर से खतरा
- गंगा का जलस्तर HFL से करीब 1 सेमी ऊपर पहुंच गया
- सभी जिलों के डीएम और एसपी को 24 घंटे अलर्ट रहने का निर्देश
- तटबंधों और दियारा इलाकों में विशेष निगरानी बढ़ाने को कहा गया
पटना (Threesocieties.com Desk): बिहार में बाढ़ की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है। राजधानी पटना पर भी बाढ़ का खतरा अब गहराने लगा है। जल संसाधन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, पटना के गांधीघाट पर गंगा नदी के जलस्तर में महज चार घंटे के भीतर 10 सेंटीमीटर की अप्रत्याशित बढ़ोतरी दर्ज की गई है। जलस्तर के लगातार बढ़ने से प्रशासन की चिंता बढ़ गई है।
जल संसाधन विभाग के मुताबिक शनिवार सुबह 10 बजे गांधीघाट पर गंगा का जलस्तर 50.53 मीटर दर्ज किया गया, जो निर्धारित उच्चतम बाढ़ स्तर (HFL) 50.52 मीटर से करीब एक सेंटीमीटर ऊपर है। नए पूर्वानुमान के अनुसार रविवार सुबह 8 बजे तक जलस्तर 50.62 मीटर तक पहुंच सकता है। गंगा के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए राजधानी पटना के दियारा और नदी किनारे के इलाकों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है। प्रशासन को आशंका है कि यदि जलस्तर में इसी तरह वृद्धि जारी रही तो निचले इलाकों पर दबाव और बढ़ सकता है।
चार नदियों के घेरे में पटना
पटना की भौगोलिक स्थिति बाढ़ के लिहाज से बेहद संवेदनशील है। जिले को मुख्य रूप से गंगा, सोन, पुनपुन और दरधा नदियों के जलस्तर में वृद्धि का सामना करना पड़ता है। उत्तर दिशा में गंगा, पश्चिम-दक्षिण क्षेत्र में सोन और दक्षिण से उत्तर-पूर्व की ओर बहने वाली पुनपुन नदी पटना के कई इलाकों को प्रभावित करती है। पुनपुन की प्रमुख सहायक नदी दरधा के उफान से भी दक्षिणी पटना के कई इलाके प्रभावित हो सकते हैं। वहीं, गंडक नदी का बढ़ता जलस्तर गंगा पर दबाव बढ़ा रहा है। ऐसे में गंगा का पानी तेजी से फैलने पर दियारा और निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा और गंभीर हो सकता है।
2019 जैसी स्थिति की आशंका ने बढ़ाई चिंता
पटना में वर्ष 2019 में आई भीषण बाढ़ की याद अभी भी ताजा है। उस समय राजधानी के बड़े हिस्से में जलजमाव और बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई थी। मौजूदा हालात ने प्रशासन के सामने उसी तरह की स्थिति दोबारा पैदा नहीं होने देने की चुनौती खड़ी कर दी है। विशेषज्ञों के मुताबिक यदि गंगा का जलस्तर लंबे समय तक ऊंचा बना रहता है तो शहर के ड्रेनेज सिस्टम पर भी इसका असर पड़ सकता है। नदी का जलस्तर नालों के आउटफॉल से ऊपर जाने पर बारिश और सीवरेज का पानी बाहर निकलने में परेशानी हो सकती है। इससे पटना के निचले हिस्सों में जलजमाव तेजी से बढ़ सकता है।
गांधीघाट पर लगातार बढ़ रहा पानी
जल संसाधन विभाग के आंकड़ों के अनुसार पटना के गांधीघाट के अलावा गंगा के अन्य घाटों पर भी जलस्तर बढ़ने का ट्रेंड देखा जा रहा है। शनिवार को अलग-अलग स्थानों पर गंगा का जलस्तर इस प्रकार दर्ज किया गया:
दीघा : 51.77 मीटर
गांधीघाट : 50.53 मीटर
हथीदह : 43.37 मीटर
मुंगेर : 39.58 मीटर
भागलपुर : 34.16 मीटर
कहलगांव : 32.31 मीटर
गांधीघाट पर जलस्तर का HFL पार करना प्रशासन के लिए विशेष चिंता का विषय है। अगले कुछ घंटों में पानी बढ़ने की स्थिति में नदी के प्रवाह क्षेत्र और दियारा इलाकों में दबाव और बढ़ सकता है।
गंगा के साथ सोन का भी दबाव
पटना जिले में गंगा के साथ सोन नदी भी बाढ़ के खतरे को बढ़ाती है। सोन का गंगा में मनेर के पास संगम होता है। ऐसे में दोनों नदियों का जलस्तर एक साथ बढ़ने पर मनेर और आसपास के इलाकों में दोहरी चुनौती पैदा हो सकती है। नदी का पानी बढ़ने पर सबसे पहले दियारा क्षेत्र के खेत, कच्चे मकान और संपर्क रास्ते प्रभावित होते हैं। इसके बाद निचले गांवों, सड़कों और तटबंधों पर दबाव बढ़ता है।
पुनपुन और दरधा ने भी बढ़ाई चिंता
दक्षिणी पटना में पुनपुन और दरधा नदी के जलस्तर पर भी प्रशासन की नजर है। पुनपुन में उफान आने पर पालीगंज, नौबतपुर, पुनपुन, संपतचक और फतुहा के निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है। दरधा पुनपुन की प्रमुख सहायक नदी है। धनरुआ और मसौढ़ी के आसपास इसके बढ़ते पानी का असर गांवों, खेतों, सड़कों और तटबंधों पर पड़ सकता है। दरधा का बढ़ता जलस्तर स्थानीय स्तर पर परेशानी बढ़ाने के साथ पुनपुन के बाढ़ दबाव को भी बढ़ा सकता है।
तटबंधों और ड्रेनेज सिस्टम पर दोहरा दबाव
बाढ़ की स्थिति में पटना के सामने सिर्फ नदी के पानी का खतरा नहीं है। लंबे समय तक नदियों का जलस्तर ऊंचा रहने से तटबंधों के साथ-साथ शहर के ड्रेनेज सिस्टम पर भी दबाव बढ़ता है। बाढ़ की स्थिति को मोटे तौर पर चार चरणों में समझा जा सकता है—
- पहला चरण: नदी किनारे के खेत, कच्चे मकान और संपर्क रास्ते पानी में डूबने लगते हैं।
- दूसरा चरण: घाट, नदी किनारे की सड़कें और निचले इलाकों में बने घर प्रभावित होने लगते हैं।
- तीसरा चरण: लंबे समय तक जलस्तर ऊंचा रहने से तटबंधों पर दबाव बढ़ता है और रिसाव या कटाव का खतरा पैदा होता है।
- चौथा चरण: नदी का जलस्तर नालों के आउटफॉल से ऊपर पहुंचने पर बारिश और सीवरेज का पानी बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है। इससे शहर के निचले इलाकों में तेजी से जलजमाव हो सकता है।
31 इलाके अति संवेदनशील, 181 संवेदनशील
बाढ़ के संभावित खतरे को देखते हुए प्रशासन ने जिले में 31 स्थानों को अति संवेदनशील और 181 स्थानों को संवेदनशील माना है। इन इलाकों में प्रशासन को विशेष निगरानी और तैयारी रखने की जरूरत है। नदी के प्रवाह क्षेत्र और दियारा इलाकों में रहने वाले लोगों को भी सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
सभी डीएम-एसपी 24 घंटे अलर्ट
बिहार में बाढ़ के बढ़ते खतरे को देखते हुए जल संसाधन विभाग ने राज्य के सभी जिलों के जिलाधिकारियों (डीएम) और पुलिस अधीक्षकों (एसपी) को चेतावनी संदेश भेजा है। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि नदी के प्रवाह क्षेत्र, विशेषकर दियारा इलाकों में बढ़ते दबाव को देखते हुए आवश्यक सतर्कता बरती जाए। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए जिला स्तर पर गठित बाढ़ आपदा दल को पूरी तरह तैयार रखने और लगातार गश्ती सुनिश्चित करने को कहा गया है।तटबंध के नदी वाले हिस्से में रहने वाले परिवारों को भी संभावित खतरे की जानकारी देने और जरूरत पड़ने पर तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
रविवार सुबह तक और बढ़ सकता है गंगा का जलस्तर
गांधीघाट पर महज चार घंटे में 10 सेंटीमीटर पानी बढ़ने के बाद प्रशासन की चिंता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि विभाग ने रविवार सुबह तक जलस्तर में और वृद्धि का अनुमान जताया है। यदि गंगा का जलस्तर इसी रफ्तार से बढ़ता है और सोन, पुनपुन, दरधा तथा गंडक का दबाव भी बना रहता है, तो पटना के निचले और दियारा इलाकों में स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है। फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता तटबंधों की निगरानी, निचले इलाकों में सतर्कता, जलनिकासी व्यवस्था और संभावित बाढ़ प्रभावित परिवारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
Anjala Kumar 



