9 दिन बाद ‘चमत्कार’! सुरंग से जिंदा निकले दो मजदूर, अंदर से आवाज सुनकर जागी नई उम्मीद

नेपाल में 26 अगस्त की विनाशकारी बाढ़ के 9 दिन बाद त्रिशूली-3A हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग से दो मजदूर जिंदा निकाले गए। अंदर से आवाज सुनने के बाद रेस्क्यू टीम ने दोनों को करीब 170 मीटर की गहराई से बाहर निकाला। जानिए पूरा मामला।

9 दिन बाद ‘चमत्कार’! सुरंग से जिंदा निकले दो मजदूर, अंदर से आवाज सुनकर जागी नई उम्मीद
नेपाल में तबाही के बीच चमत्कार, 9 दिन बाद सुरंग से जिंदा निकले दो मजदूर।

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  • नेपाल में 26 अगस्त की विनाशकारी बाढ़ के 9 दिन बाद दो मजदूरों को सुरंग से जिंदा निकाला गया
  • त्रिशूली-3A हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग में करीब 170 मीटर अंदर फंसे थे दोनों
  • रेस्क्यू टीम को सुरंग के अंदर से आवाजें सुनाई दीं, जिसके बाद ऑपरेशन में तेजी आई 
  • मजदूर संजय साह ने बताया कि उन्होंने नौ दिन तक ‘हरे कृष्ण’ का जाप करते हुए बचने की उम्मीद बनाए रखी

काठमांडू (Threesocieties.com Desk): नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ और मलबे की तबाही के बीच नौ दिन बाद एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने पूरे देश को राहत दी है। त्रिशूली-3A हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग में फंसे दो मजदूरों को जिंदा बाहर निकाल लिया गया है। दोनों मजदूर करीब नौ दिनों तक सुरंग के अंदर फंसे रहे। रेस्क्यू टीम को अंदर से आवाजें सुनाई देने के बाद उम्मीद जगी और आखिरकार दोनों तक पहुंचने में सफलता मिली। रेस्क्यू किए गए मजदूरों की पहचान संजय साह और कबीर महारजन के रूप में हुई है। संजय साह नेपाल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी में मैकेनिकल फोरमैन हैं, जबकि कबीर महारजन मैकेनिकल सुपरवाइजर के तौर पर काम करते हैं। दोनों को सुरंग के अंदर लगभग 170 मीटर की गहराई से बाहर निकाला गया।

‘अंदर से आवाज आई...’ और फिर शुरू हुई उम्मीद की तलाश

बचाव अभियान के दौरान उस वक्त रेस्क्यू टीम में नई ऊर्जा आ गई, जब सुरंग के अंदर से लोगों की आवाज सुनाई दी। इसके बाद बचावकर्मियों ने अंदर फंसे लोगों से संपर्क स्थापित किया और उन्हें भरोसा दिलाया कि उन्हें बाहर निकालने के लिए टीम लगातार काम कर रही है। रेडियो नेपाल के मुताबिक, दोनों तरफ से बातचीत भी स्थापित हुई थी और अंदर मौजूद लोगों ने रेस्क्यू टीम को जवाब दिया। इसके बाद सेना और सशस्त्र पुलिस बल की टीमें सुरंग के अंदर रास्ता बनाने में जुट गईं। मलबा और कीचड़ हटाने के बाद आखिरकार बचावकर्मी उन दोनों तक पहुंचने में कामयाब हुए। तस्वीरों और वीडियो में बचावकर्मियों को सुरंग से एक व्यक्ति को बाहर निकालते और फिर उसे स्ट्रेचर पर ले जाते देखा गया। बाहर मौजूद लोगों ने दोनों के सुरक्षित निकलने पर खुशी जताई।

संजय साह ने बताया- दूसरों को बचाने के लिए रुका था

बचाए गए मजदूर संजय साह की कहानी भी बेहद भावुक करने वाली है। काठमांडू पोस्ट के मुताबिक, बाढ़ आने के समय साह प्रोजेक्ट के कंट्रोल रूम में काम कर रहे थे। उन्होंने बताया कि वह खुद बाहर निकलने के बजाय पहले अन्य लोगों को सुरक्षित निकालने में मदद करने की कोशिश कर रहे थे। इसी दौरान वह खुद सुरंग के अंदर फंस गए। करीब नौ दिनों तक बाहर की दुनिया से संपर्क टूट जाने के बावजूद उन्होंने उम्मीद नहीं छोड़ी। रिपोर्टों के मुताबिक, साह ने सुरंग के अंदर ‘हरे कृष्ण’ महामंत्र का जाप करते हुए रेस्क्यू टीम के पहुंचने का इंतजार किया।

कबीर महारजन की हालत पर भी नजर

दूसरे बचाए गए मजदूर कबीर महारजन को भी अस्पताल ले जाया गया है। शुरुआती जानकारी के अनुसार दोनों को सुरंग से बाहर निकालने के बाद प्राथमिक चिकित्सा दी गई और आगे के इलाज के लिए काठमांडू ले जाया गया। Reuters के मुताबिक, संजय साह की चोटें गंभीर नहीं बताई गईं, जबकि महारजन अपने हाथ-पैर नहीं हिला पा रहे थे और उन्हें चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया।

क्या सुरंग में अभी और लोग जिंदा हैं?

दो मजदूरों के जिंदा मिलने के बाद सबसे बड़ी उम्मीद अब उन लोगों को लेकर है, जिनका अभी तक कोई पता नहीं चल पाया है। बचाव अभियान में लगे दल सुरंगों और मलबे के भीतर लगातार तलाश कर रहे हैं। इस घटना ने यह उम्मीद भी बढ़ाई है कि लंबे समय से लापता कुछ अन्य लोग भी भूमिगत हिस्सों में सुरक्षित हो सकते हैं। अधिकारियों और बचाव दलों की ओर से अन्य संभावित जीवित लोगों तक पहुंचने की कोशिश जारी है।

26 अगस्त को आई थी विनाशकारी बाढ़

नेपाल में 26 अगस्त को आई अचानक बाढ़ और मलबे ने भारी तबाही मचाई थी। त्रिशूली और आसपास के इलाकों में हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट, सड़कें, पुल और दूसरी आधारभूत संरचनाएं बुरी तरह प्रभावित हुईं। इस आपदा ने कई हाइड्रोपावर परियोजनाओं में काम कर रहे कर्मचारियों की जिंदगी खतरे में डाल दी।ताजा रिपोर्टों के अनुसार, नेपाल में इस आपदा से 1,290 से अधिक लोगों की मौत और 5,000 से ज्यादा लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई थी। बड़ी संख्या में सुरक्षा बल और बचावकर्मी राहत एवं खोज अभियान में जुटे हुए हैं। नेपाल-चीन सीमा के तिब्बती हिस्से में भी इस आपदा का व्यापक असर पड़ा है। चीन की ओर से भी मौत और लापता लोगों की जानकारी सामने आई है।

नौ दिन बाद दो जिंदगियां बचीं, अब बाकी की तलाश

नेपाल की इस भीषण त्रासदी के बीच संजय साह और कबीर महारजन का नौ दिन बाद जिंदा मिलना राहत और उम्मीद की बड़ी खबर है। सुरंग से आती आवाज ने जहां बचाव दल को नई ताकत दी, वहीं दोनों मजदूरों की सुरक्षित निकासी ने उन परिवारों को भी उम्मीद दी है, जिनके अपने अब तक लापता हैं। रेस्क्यू ऑपरेशन अभी खत्म नहीं हुआ है। बचाव दल सुरंग के अंदर और आसपास अन्य संभावित लोगों की तलाश जारी रखे हुए हैं।