पटना में बाढ़ का रौद्र रूप: गंगा-सोन-पुनपुन-दरधा का कहर, शहर में घुसा पानी; दीघा से मोकामा तक हाहाकार
गंगा, सोन, पुनपुन और दरधा नदियों के उफान से पटना में बाढ़ का संकट गहराया। दीघा में घर डूबे, मनेर से मोकामा तक गांव पानी से घिरे, सड़क संपर्क टूटा। गंगा रिकॉर्ड के करीब पहुंची। जानें पटना बाढ़ की पूरी स्थिति।
HighLights:
- दीघा के बिंद टोली में कई घर डूबे, करीब 1500 परिवार सड़क पर
- धनरूआ में तटबंध टूटने से 30 घरों में घुसा पानी
- गौरीचक के करीब तीन दर्जन गांव पानी से घिरे
- मोकामा में करीब 200 विस्थापित राहत शिविरों में
पटना (Threesocieties.com Desk): बिहार की राजधानी पटना में बाढ़ का संकट अब बेहद गंभीर होता जा रहा है। गंगा, सोन, पुनपुन और दरधा नदियों के लगातार बढ़ते जलस्तर ने ग्रामीण और दियारा क्षेत्रों के बाद अब शहरी इलाकों में भी दस्तक दे दी है। दीघा के बिंद टोली में कई घर बाढ़ के पानी में डूब गए हैं, जबकि करीब 1500 परिवार जेपी गंगा पथ पर प्लास्टिक के टेंट में रहने को मजबूर हैं। दूसरी ओर मनेर से मोकामा तक कई गांव पानी से घिर गए हैं और संपर्क सड़कें जलमग्न होने से लोगों की आवाजाही और जरूरी सामान की आपूर्ति प्रभावित हो गई है।

बाढ़ के बिगड़ते हालात के बीच पटना में गंगा का जलस्तर पुराने रिकॉर्ड के बेहद करीब पहुंच गया है। दीघा घाट पर गंगा का जलस्तर 1975 के सर्वाधिक जलस्तर के रिकॉर्ड से महज 88 सेंटीमीटर नीचे पहुंच गया है। गांधी घाट पर भी पानी वर्ष 2016 के रिकॉर्ड से सिर्फ 21 सेंटीमीटर नीचे है। जलस्तर लगातार बढ़ने से प्रशासन की चिंता बढ़ गई है।
दीघा से मोकामा तक बाढ़ का कहर
पटना जिले में बाढ़ का असर अब केवल नदी किनारे के दियारा इलाकों तक सीमित नहीं है। दीघा, दानापुर, मनेर, बख्तियारपुर, पटना सिटी और मोकामा तक कई इलाके इसकी चपेट में आ गए हैं। दीघा क्षेत्र के बिंद टोली में बाढ़ का पानी घरों में घुस चुका है। कई परिवारों को अपना घर छोड़कर जेपी गंगा पथ पर शरण लेनी पड़ी है। करीब 1500 परिवार प्लास्टिक टेंट लगाकर रह रहे हैं। यहां पीने के साफ पानी की समस्या भी सामने आ रही है। दानापुर दियारा की सभी छह पंचायतों में बाढ़ का पानी पहुंच चुका है। सैकड़ों परिवार अपने मवेशियों के साथ बलदेव इंटर स्कूल में बनाए गए राहत शिविर में पहुंचे हैं। कुछ परिवार अब भी घर और सामान की सुरक्षा के लिए गांव में रुके हुए हैं।

मोकामा में जंजीरा दियारा डूबा, 200 लोग विस्थापित
गंगा के बढ़ते जलस्तर ने मोकामा के दियारा क्षेत्रों में भारी तबाही मचाई है। जंजीरा दियारा पूरी तरह बाढ़ की चपेट में आ चुका है। कई लोग स्कूल की छत और अन्य ऊंचे स्थानों पर शरण लेने को मजबूर हैं। कसहा दियारा के पांच गांवों में भी गंगा का पानी घुस गया है। नई कसहा और शिवनगर समेत कई इलाकों के लोगों ने सुरक्षित स्थानों पर शरण ली है। प्रशासन के अनुसार करीब 200 विस्थापित लोग राहत शिविरों में रह रहे हैं। प्रभावित लोगों के बीच प्लास्टिक शीट, चूड़ा और गुड़ जैसी राहत सामग्री वितरित की गई है। नई कसहा से पुराना कसहा, सीतापुर और विजयगढ़ जाने वाली ग्रामीण सड़कें पानी में डूब गई हैं। इससे गांवों का सड़क संपर्क प्रभावित हुआ है।
बख्तियारपुर में कच्चे मकान गिरने लगे
बख्तियारपुर के दियारा क्षेत्रों में भी बाढ़ का असर गंभीर है। कई निचले घरों में पानी घुस चुका है। कच्चे और झोपड़ीनुमा मकानों के गिरने का सिलसिला शुरू हो गया है। चिरैया निवासी चनर राय का घर बाढ़ के पानी के कारण गिर गया। घर गिरने के बाद परिवार के सामने रहने की समस्या खड़ी हो गई है। प्रशासन के सामने ऐसे परिवारों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने और राहत उपलब्ध कराने की चुनौती है।
धनरूआ में तटबंध टूटा, 30 घरों में घुसा पानी
दक्षिणी पटना में दरधा नदी के उफान ने धनरूआ प्रखंड में संकट बढ़ा दिया है। बीर के महुआतड़ के पास तटबंध करीब 20 से 25 फीट तक टूट गया। इसके बाद पानी तेजी से आसपास के इलाकों में फैल गया और करीब 30 घरों में बाढ़ का पानी घुस गया। पानी घरों में पहुंचने के बाद ग्रामीण रात से ही तटबंध पर शरण लिए हुए हैं। पानी बीर अस्पताल के गेट तक पहुंच गया है। देवधा, लक्ष्मीचक, मुस्तफापुर और सदीसोपुर समेत कई गांवों के खेतों में लगी फसलें भी डूब गई हैं।
पुनपुन के तेज बहाव में 10 वर्षीय बच्ची की मौत
बाढ़ के बीच पुनपुन के छोटकी सैदपुर में दर्दनाक हादसा हुआ। शौच के लिए गई 10 वर्षीय रीना कुमारी तेज पानी के बहाव में बह गई। ग्रामीणों ने करीब तीन घंटे की तलाश के बाद उसका शव बरामद किया। फुलवारी प्रखंड में पुनपुन बांध के आसपास चिहुंट, सकरैचा, मेहमानपुर, बकपुर और तारापुर समेत कई गांवों में भी ग्रामीण रातभर नदी और बांध की स्थिति पर नजर रख रहे हैं।
गौरीचक के करीब तीन दर्जन गांव पानी से घिरे
पुनपुन और दरधा नदियों के उफान से गौरीचक बाजार समेत करीब तीन दर्जन गांव पानी से घिर गए हैं। संपर्क सड़कें टूटने के कारण लोगों की आवाजाही प्रभावित हो रही है। बाढ़ के कारण भोजन, पशु चारा और रोजमर्रा की जरूरतों की आपूर्ति पर भी असर पड़ने लगा है। कई परिवारों के सामने घर छोड़कर सुरक्षित स्थान पर जाने की मजबूरी बन गई है।
दीघा में गंगा रिकॉर्ड के बेहद करीब
पटना में गंगा का बढ़ता जलस्तर सबसे बड़ी चिंता बना हुआ है। दीघा घाट पर वर्ष 1975 में गंगा का सर्वाधिक जलस्तर 52.52 मीटर दर्ज किया गया था। गुरुवार शाम छह बजे यहां जलस्तर 51.64 मीटर पहुंच गया। यानी यह पुराने रिकॉर्ड से महज 88 सेंटीमीटर नीचे है। गांधी घाट पर वर्ष 2016 में सर्वाधिक जलस्तर 50.52 मीटर दर्ज किया गया था। गुरुवार शाम छह बजे यहां जलस्तर 50.31 मीटर पहुंच गया। इस तरह गांधी घाट में पानी पुराने रिकॉर्ड से केवल 21 सेंटीमीटर नीचे है।लगातार बढ़ते जलस्तर के कारण शुक्रवार तक स्थिति और गंभीर होने की आशंका जताई जा रही है।
गंगा, सोन, पुनपुन और दरधा ने बढ़ाई चिंता
पटना की बाढ़ की स्थिति किसी एक नदी से प्रभावित नहीं है। गंगा उत्तर से, सोन पश्चिम और दक्षिण दिशा से तथा पुनपुन दक्षिण से पटना के निचले इलाकों को प्रभावित करती है। पुनपुन की प्रमुख सहायक नदी दरधा के बढ़ते जलस्तर ने भी खतरा बढ़ा दिया है। इसके अलावा उत्तर में गंडक का बढ़ा जलस्तर गंगा पर दबाव बढ़ा रहा है। ऐसे में कई नदी तंत्रों का एक साथ उफान पर होना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
ड्रेनेज सिस्टम पर बढ़ा दबाव
अधिकारियों के सामने सबसे बड़ी चिंता यह भी है कि यदि गंगा का जलस्तर शहर के ड्रेनेज पाइप के स्तर से ऊपर पहुंचता है तो जल निकासी व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो सकती है। ऐसी स्थिति में बारिश और सीवरेज का पानी बाहर निकलने में परेशानी होगी और निचले शहरी इलाकों में जलजमाव तेजी से बढ़ सकता है।बाढ़ के खतरे को देखते हुए जिले में 31 स्थानों को अति संवेदनशील और 181 स्थानों को संवेदनशील घोषित किया गया है। इन इलाकों में जलस्तर और तटबंधों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
मनेर से मोकामा तक खतरे की लंबी पट्टी
गंगा का प्रभाव मनेर से शुरू होकर दानापुर, दीघा, पटना शहर, पटना सिटी, फतुहा, खुसरूपुर, बख्तियारपुर और मोकामा तक देखा जा रहा है। मनेर में सोन नदी गंगा में मिलती है। ऐसे में जब दोनों नदियों का जलस्तर बढ़ा हुआ हो तो मनेर और आसपास के क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा और बढ़ जाता है। पहले दियारा और खेत डूबते हैं, इसके बाद संपर्क रास्तों और निचले गांवों में पानी पहुंचने लगता है।
2019 जैसी स्थिति से बचने की चुनौती
पटना में इस समय सबसे बड़ी चुनौती 2019 जैसी स्थिति को दोबारा बनने से रोकना है। उस समय राजधानी के कई इलाकों में बाढ़ का पानी भर गया था और लोगों को नावों के जरिए आवागमन करना पड़ा था। इस बार गंगा के साथ सोन, पुनपुन, दरधा और गंडक के बढ़े जलस्तर ने दबाव और बढ़ा दिया है। ऐसे में तटबंधों की निगरानी, जल निकासी व्यवस्था और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना बेहद जरूरी हो गया है।
मुख्यमंत्री ने किया प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण
बाढ़ की गंभीर स्थिति के बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गुरुवार को अधिकारियों के साथ प्रभावित क्षेत्रों का स्थल निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को पूरी तरह अलर्ट रहने और आम लोगों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमों को अलर्ट मोड पर रखने तथा प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव दलों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने अधिकारियों को स्थानीय लोगों के साथ लगातार समन्वय बनाए रखने और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
शुक्रवार को हवाई सर्वेक्षण और उच्चस्तरीय समीक्षा
मुख्यमंत्री के शुक्रवार को बेंगलुरु से लौटने के बाद प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण करने की योजना है। इसके बाद राहत एवं बचाव कार्यों को लेकर उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक होगी। बैठक में नदियों के जलस्तर, तटबंधों की मजबूती, संभावित जलभराव वाले इलाकों, राहत शिविरों और बचाव कार्यों की तैयारियों की समीक्षा की जाएगी।
राहत शिविरों में जरूरी सामान की व्यवस्था
संभावित बाढ़ प्रभावित इलाकों में सुरक्षित आश्रय स्थलों को चिह्नित कर वहां जरूरी तैयारियां पूरी रखने का निर्देश दिया गया है। प्रशासन को पेयजल, भोजन, चिकित्सा सुविधा, पशु चारा और अन्य जरूरी सामान की अग्रिम व्यवस्था करने को कहा गया है। बाढ़ की स्थिति और बिगड़ने पर प्रभावित परिवारों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीमों को तैयार रखा जा रहा है।
पटना में इस समय सबसे बड़ी चिंता
गंगा खतरे के निशान से ऊपर
दीघा घाट पर पुराना रिकॉर्ड टूटने का खतरा
गांधी घाट पर भी रिकॉर्ड के बेहद करीब जलस्तर
दीघा के बिंद टोली में घर डूबे
करीब 1500 परिवार जेपी गंगा पथ पर शरण लेने को मजबूर
मोकामा का जंजीरा दियारा बाढ़ की चपेट में
करीब 200 विस्थापित राहत शिविरों में
बख्तियारपुर के दियारा क्षेत्रों में घरों में पानी
धनरूआ में तटबंध टूटने से करीब 30 घरों में पानी
गौरीचक के करीब तीन दर्जन गांव पानी से घिरे
पुनपुन के तेज बहाव में 10 वर्षीय बच्ची की मौत
कई संपर्क सड़कें जलमग्न, आवागमन प्रभावित
एसडीआरएफ और एनडीआरएफ अलर्ट
प्रशासन को राहत-बचाव के लिए तैयार रहने का निर्देश




