पटना NEET छात्रा मौत केस: CBI की क्लोजर रिपोर्ट पर भड़का कोर्ट, लगाई फटकार
पटना NEET छात्रा मौत मामले में CBI की क्लोजर रिपोर्ट पर विशेष पॉक्सो अदालत ने जांच और CCTV फुटेज जुटाने के तरीके पर सवाल उठाए। परिवार ने रिपोर्ट पर आपत्ति जताई। अगली सुनवाई 6 नवंबर को होगी।
HighLights:
- विशेष पॉक्सो अदालत ने जांच के कई पहलुओं पर नाराजगी जताई
- फुटेज और अन्य साक्ष्य जुटाने के तरीके को लेकर जांच पर सवाल उठे
- CBI ने पर्याप्त ठोस सबूत नहीं मिलने का हवाला देकर क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की
- 6 नवंबर को अगली सुनवाई: अदालत में क्लोजर रिपोर्ट पर आगे विचार किया जाएगा।
पटना (Threesocieties.com Desk): पटना में NEET की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले में CBI की क्लोजर रिपोर्ट पर विशेष पॉक्सो अदालत ने सवाल उठाए हैं। जांच के दौरान CCTV फुटेज और तकनीकी सबूत जुटाने के तरीके को लेकर अदालत ने नाराजगी जताई। सुनवाई के दौरान जांच में कथित लापरवाही को लेकर CBI की वकील को भी फटकार लगाई गई। करीब आठ महीने की जांच के बाद केंद्रीय जांच एजेंसी ने पर्याप्त ठोस सबूत नहीं मिलने का हवाला देते हुए क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी। हालांकि, छात्रा के परिवार ने इस रिपोर्ट पर आपत्ति जताई है और न्याय की मांग की है। मामले की अगली सुनवाई 6 नवंबर को होगी।
पटना NEET छात्रा मौत मामले में विशेष पॉक्सो अदालत में मंगलवार को CBI की ओर से दाखिल क्लोजर रिपोर्ट पर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान जांच की प्रक्रिया और सबूत जुटाने के तरीके को लेकर सवाल उठे। खास तौर पर CCTV फुटेज और तकनीकी साक्ष्यों के संकलन से जुड़े पहलुओं पर अदालत ने नाराजगी जताई। मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI को सौंपी गई थी। एजेंसी ने करीब आठ महीने तक जांच करने के बाद अदालत में अपनी रिपोर्ट दाखिल की। CBI का निष्कर्ष था कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर किसी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए पर्याप्त ठोस सबूत नहीं मिले हैं। इसी आधार पर एजेंसी ने क्लोजर रिपोर्ट पेश की।
हालांकि, अदालत में रिपोर्ट पर सुनवाई के दौरान जांच के कुछ महत्वपूर्ण पहलुओं को लेकर सवाल खड़े हुए। CCTV फुटेज और तकनीकी साक्ष्यों को एकत्र करने के तरीके पर भी आपत्ति सामने आई। सुनवाई के दौरान CBI की वकील को फटकार लगाए जाने की बात भी सामने आई है। अदालत की नाराजगी के बाद इस मामले में जांच की गुणवत्ता और क्लोजर रिपोर्ट के निष्कर्षों पर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, अभी अदालत ने मामले में अंतिम फैसला नहीं सुनाया है। क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार करना है या आगे की जांच की जरूरत है, इस पर न्यायालय का निर्णय बाकी है।
शंभू गर्ल्स हॉस्टल में बेहोश मिली थी NEET की छात्रा
यह मामला पटना के चित्रगुप्त नगर स्थित शंभू गर्ल्स हॉस्टल में रहने वाली NEET की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध मौत से जुड़ा है। छात्रा मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी के लिए हॉस्टल में रह रही थी। जानकारी के मुताबिक, छात्रा 5 जनवरी 2026 को हॉस्टल पहुंची थी। अगले दिन, 6 जनवरी को वह अपने कमरे में बेहोश मिली। इसके बाद उसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया। चिकित्सकों ने उसका उपचार किया, लेकिन उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ। आखिरकार 11 जनवरी को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
छात्रा की मौत के बाद परिवार ने घटना की परिस्थितियों पर सवाल उठाए। परिजनों ने छात्रा के शरीर पर चोट के निशान होने की बात कही और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। परिवार की आशंकाओं के कारण यह मामला गंभीर हो गया और पुलिस की जांच के साथ-साथ बाद में केंद्रीय एजेंसी की जांच भी शुरू हुई। छात्रा की मौत की परिस्थितियों को लेकर उठे सवालों के बीच परिवार लगातार यह जानना चाहता रहा कि आखिर उसके साथ क्या हुआ था। अब CBI की क्लोजर रिपोर्ट पर अदालत में हो रही सुनवाई से मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की दिशा तय होने की उम्मीद है।
9 जनवरी को दर्ज हुई थी FIR
छात्रा की मौत के मामले में उसके पिता के बयान पर 9 जनवरी 2026 को पटना के चित्रगुप्त नगर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। परिवार की ओर से उठाए गए सवालों के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। प्रारंभिक जांच में घटना से जुड़े विभिन्न पहलुओं की पड़ताल की गई। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए बिहार पुलिस की विशेष जांच टीम यानी SIT को जांच की जिम्मेदारी दी गई। SIT ने घटना की परिस्थितियों, उपलब्ध साक्ष्यों और संबंधित लोगों से जुड़ी जानकारी की जांच की। हालांकि, परिवार की ओर से निष्पक्ष और व्यापक जांच की मांग जारी रही। इसके बाद राज्य सरकार ने मामले की जांच CBI को सौंप दी। केंद्रीय एजेंसी ने मामले को अपने हाथ में लेकर नए सिरे से विभिन्न पहलुओं की पड़ताल शुरू की।
SIT के बाद CBI ने संभाली जांच
बिहार पुलिस की SIT की जांच के बाद CBI को मामले की जिम्मेदारी सौंपी गई। केंद्रीय एजेंसी ने घटना से जुड़े साक्ष्य जुटाने, संबंधित लोगों से पूछताछ करने और मेडिकल तथा फॉरेंसिक रिपोर्टों की पड़ताल करने की प्रक्रिया अपनाई। जांच के दौरान घटना से जुड़े कई पहलुओं पर ध्यान दिया गया। मेडिकल रिपोर्ट, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फॉरेंसिक साक्ष्यों को भी जांच का हिस्सा बनाया गया। इसके साथ ही मामले में तकनीकी साक्ष्यों की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही।
अब अदालत में CBI की क्लोजर रिपोर्ट पर सुनवाई के दौरान जांच की प्रक्रिया और साक्ष्य जुटाने के तरीके को लेकर सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अदालत इन सवालों पर क्या रुख अपनाती है और क्या उपलब्ध रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई पर्याप्त मानी जाती है।
पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक रिपोर्ट में क्या आया था सामने?
मामले की जांच के दौरान मेडिकल और फॉरेंसिक रिपोर्टों को लेकर भी चर्चा हुई थी। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में चोट के निशानों का उल्लेख था। वहीं, फॉरेंसिक जांच के संबंध में छात्रा के कपड़ों पर स्पर्म मिलने की बात सामने आई थी। इसके बाद DNA जांच कराई गई। एक रिपोर्ट के मुताबिक, जांच के सिलसिले में करीब 30 लोगों के DNA सैंपल लिए गए थे। हालांकि, किसी भी सैंपल का संबंधित नमूने से मिलान नहीं होने की बात सामने आई।
इन निष्कर्षों के आधार पर CBI ने अपनी जांच पूरी करने के बाद क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की। एजेंसी का कहना था कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर किसी व्यक्ति के खिलाफ अभियोजन चलाने के लिए पर्याप्त ठोस सबूत नहीं मिले। हालांकि, फॉरेंसिक जांच के निष्कर्षों और किसी व्यक्ति के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं मिलने के आधार पर दाखिल क्लोजर रिपोर्ट को लेकर परिवार की आपत्ति बनी हुई है। अदालत में अब रिपोर्ट और जांच के तरीकों पर उठे सवालों के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होगी।
क्लोजर रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं है छात्रा का परिवार
CBI की क्लोजर रिपोर्ट दाखिल होने के बाद छात्रा के परिवार ने इस पर आपत्ति जताई। परिजनों की मांग है कि मामले की सच्चाई सामने आए और छात्रा को न्याय मिले। परिवार के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि हॉस्टल में बेहोश मिलने से लेकर अस्पताल में मौत होने तक आखिर क्या परिस्थितियां थीं।
क्लोजर रिपोर्ट का मतलब यह नहीं है कि अदालत ने मामले में अंतिम फैसला सुना दिया है। CBI ने अपनी जांच के आधार पर रिपोर्ट दाखिल की है, लेकिन अदालत को इस रिपोर्ट पर विचार करना है। परिवार को रिपोर्ट के खिलाफ अपनी आपत्तियां रखने का अवसर भी मिला है। अदालत के सामने अब यह सवाल है कि CBI की जांच और उसके निष्कर्ष उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पर्याप्त हैं या मामले के किसी पहलू पर और जांच की जरूरत है। CCTV फुटेज और तकनीकी साक्ष्यों से जुड़े सवाल इस सुनवाई को और महत्वपूर्ण बनाते हैं।
क्या CBI की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार करेगी अदालत?
मामले में अब सबकी नजर विशेष पॉक्सो अदालत की अगली सुनवाई पर है। अदालत के पास क्लोजर रिपोर्ट पर विचार करने के बाद उसे स्वीकार करने या कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई करने का विकल्प है। परिस्थितियों और रिकॉर्ड के आधार पर अदालत आगे की जांच का निर्देश देने पर भी विचार कर सकती है। हालांकि, अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि अदालत किस नतीजे पर पहुंचेगी। क्लोजर रिपोर्ट पर अंतिम निर्णय न्यायालय की सुनवाई और उपलब्ध रिकॉर्ड के मूल्यांकन के बाद ही सामने आएगा। इस मामले में 6 नवंबर की तारीख महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अगली सुनवाई में CBI की रिपोर्ट, परिवार की आपत्तियों और जांच के दौरान उठे सवालों पर आगे विचार हो सकता है।
6 नवंबर को होगी अगली सुनवाई, न्याय की उम्मीद में परिवार
पटना NEET छात्रा मौत मामले में अभी अंतिम न्यायिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है। CBI ने पर्याप्त ठोस सबूत नहीं मिलने के आधार पर क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की है, जबकि अदालत में जांच की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठे हैं। छात्रा के परिवार ने रिपोर्ट पर आपत्ति जताते हुए न्याय की मांग की है। अब 6 नवंबर को होने वाली अगली सुनवाई पर सबकी नजर रहेगी। अदालत की आगे की टिप्पणी और आदेश से यह स्पष्ट हो सकेगा कि क्लोजर रिपोर्ट पर क्या रुख अपनाया जाता है और मामले में अतिरिक्त जांच की जरूरत महसूस की जाती है या नहीं।
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