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- JDU से हरिवंश व रामनाथ व BJP से विवेक ठाकुर को कैंडिडेट बनाया
पटना। आरजेडी ने बिहार से राज्यसभा के प्रेमचंद गुप्ता और अमरेंद्रधारी सिंह को कैंडिडेट बनाया है। दोनों कैंडिडेट ने गुरुवार को अपना ऩॉमिनेशन कर दिया है। मौके पर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव समेत अन्य लीडर मौजूद थे। JDU व BJP ने अपने तीन कैंडिडेट के नामों का एलान कर दिया है। जेडीयू ने हरिवंश और रामनाथ ठाकुर फिर से राज्यसभा कैंडिडेट बनाया है। बीजेपी ने एक्स सेंट्रल मिनिस्टर सीपी ठाकुर के बेटे विवेक ठाकुर का नाम कैंडिडेट बनाया है। सीपी ठाकपर राज्यसभा मेंबर हैं उनका कार्यकाल कथ्म हो रहा है।
बिहार में पांच सीटों के लिए होना है चुनाव
राज्य सभा की सीटों पर बिहार में चुनाव होना है,13 मार्च को नामांकन का अंतिम दिन है।जेडीयू के रामनाथ ठाकुर,हरिवंश सिंह और कहकशां परवीन का राज्यसभा में कार्यकाल पूरा हो रहा है। बीजेपी के सीपी ठाकुर व आरके सिन्हा का कार्यकाल समाप्त हो रहा है।एमएलए के संख्य बल के हिसाब से जेडीयू अपने दो व बीजेपी एक कैंडिडेट को ही जीता सकती है। दो सीट विपक्षी आरजेडी के हिस्से में जायेगा।
कौन हैं ये आरजेडी कैंडिडेट अमरेंद्रधारी सिंह, टेंशन में जेडीयू
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अमरेंद्रधारी सिंह।[/caption]
राज्यसभा चुनाव के लिए राजद अमरेंद्रधारी सिंह को उतारकर बिहार की पोलिटिक्स में खलबली मचा दी है। अमरेन्द्रधारी सिंह मूल रूप से भूमिहार जाति से आते हैं। अमरेंद्रधारी सिंह ना तो राजनीति का जाना-माना चेहरा हैं और ना ही कभी किसी ने राजनीतिक महकमे में उनका नाम ही सुना था। अमरेंद्रधारी सिंह फएमस बिजनसमैन व जमींदार हैं। अमरेंद्रधारी सिंह पटना जिले के ही रहने वाले हैं और कांग्रेस के कोषाध्यक्ष अहमद पटेल के काफी करीबी माने जाते हैं। पटना के पालीगंज के अंइखन गांव में एक हजार बीघा जमीन के मालिक हैं। पाटलिपुत्र कॉलोनी में उनका अपना मकान है। अमरेंद्रधारी सिंह (55) ने अबतक शादी नहीं की है। उनका रियल एस्टेट समेत 13 देशों में फर्टिलाइजर और केमिकल के इंपोर्ट का बिजनस है।
अमरेंद्रधारी सिंह दिल्ली के गोल्फ क्लब के भी सदस्य हैं, जिसके बिहार के सिर्फ तीन सदस्य हैं-किंग महेंद्र, रविशंकर प्रसाद और अमरेंद्रधारी सिंह। उन्होंने पटना के सेंट माइकल स्कूल से पढ़ाई की है। वो दिल्ली में गरीबों के लिए 200 बेड का अस्पताल बनवा रहे हैं। आरजेडी ने भूमिहार जाति से राज्यसभा कैडिडेट देकर बिहार में जेडीयू को टेंशन दे दी है। इस जाति को लालू का विरोधी माना जाता है। लालू के खिलाफत कर नीतिश को सत्ता में लाने में इस जाति की अहम भूमिका रही है। हाल के वर्षों में नीतिश व जेडीयू से भूमिहार जाति का मोहभंग हुआ है। बिहार की वर्तमान राजनीति व प्रशासनित क्षेत्र में एक-दो को छोड़ इस जाति के लोग किनारे लगे हुए हैं।आरजेडी ने भूमिहार को राज्यसभा के लिए उतार आगामी विधानसभा चुनाव में जेडीयू के लिए बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।