Coal India के अधिकारियों की प्रमोशन पॉलिसी बदली, 30 सितंबर से लागू होंगे नए नियम
कोल इंडिया ने अधिकारियों की प्रमोशन पॉलिसी में बदलाव किया है। 30 सितंबर होगी मानक प्रभावी तारीख। जानें पात्रता, वरिष्ठता, DPC और वेतन निर्धारण के नए नियम।
HighLights:
- कोल इंडिया ने अधिकारियों की पदोन्नति प्रक्रिया में किया संशोधन
- वार्षिक प्रमोशन चक्र में 30 सितंबर को बनाया गया मानक प्रभावी तारीख का आधार
- अतिरिक्त रिक्तियों पर पदोन्नति के लिए 1 अक्टूबर से तारीख निर्धारित करने का प्रावधान
- बाद के पदोन्नति आदेशों के लिए प्रभावी तारीख एक दिन आगे बढ़ाने की व्यवस्था
कोलकाता (Threesocieties.com Desk): कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) में अधिकारियों की पदोन्नति प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने के लिए नई व्यवस्था लागू की गई है। कंपनी ने प्रमोशन की प्रभावी तारीख निर्धारित करने के साथ पात्रता अवधि, चयन प्रक्रिया और पदोन्नति के बाद वेतन निर्धारण से संबंधित नियमों में संशोधन किया है। इस बदलाव का असर कोल इंडिया और उसकी सहायक कंपनियों में अधिकारियों की नियमित पदोन्नति प्रक्रिया पर पड़ेगा।
कोल इंडिया की ओर से 17 अक्टूबर 2026 को जारी कार्यालय आदेश संख्या 1496 के अनुसार, कंपनी के निदेशक मंडल ने 15 अक्टूबर को हुई अपनी 496वीं बैठक में अधिकारियों की पदोन्नति के लिए मानक प्रभावी तारीख (SED) लागू करने की मंजूरी दी। इसके लिए मानव संसाधन नियमावली के संबंधित प्रावधानों में संशोधन किया गया है।
नए प्रावधान 30 सितंबर 2026 की कट-ऑफ तारीख वाले वार्षिक पदोन्नति चक्र और इसके बाद की प्रक्रियाओं पर लागू होंगे। ऐसे में अधिकारियों के लिए यह समझना महत्वपूर्ण है कि नई व्यवस्था में प्रमोशन की प्रभावी तारीख कैसे तय होगी, अतिरिक्त रिक्तियों पर पदोन्नति का क्या नियम रहेगा और वेतन निर्धारण पर इसका क्या असर पड़ सकता है।
30 सितंबर होगी प्रमोशन की मानक प्रभावी तारीख
कोल इंडिया के संशोधित नियमों के अनुसार, वार्षिक पदोन्नति प्रक्रिया में नियमित पदोन्नति की प्रभावी तारीख निर्धारित करने के लिए 30 सितंबर को आधार बनाया जाएगा। संबंधित पदोन्नति चक्र में सीधी रिक्तियों के लिए इसी तारीख को मानक प्रभावी तारीख माना जाएगा।इस व्यवस्था का उद्देश्य पदोन्नति की प्रभावी तारीख निर्धारित करने के लिए एक मानक तय करना है। इससे संबंधित पदोन्नति चक्र में तारीखों के निर्धारण की प्रक्रिया अधिक स्पष्ट होगी। हालांकि, प्रभावी तारीख का निर्धारण अपने आप में पदोन्नति की गारंटी नहीं है। किसी अधिकारी की पदोन्नति निर्धारित पात्रता, चयन प्रक्रिया और लागू नियमों के अनुरूप ही होगी।
अतिरिक्त रिक्तियों पर क्या होगा नियम?
नए आदेश में उसी चयन सूची से बाद में उत्पन्न होने वाली अतिरिक्त रिक्तियों पर पदोन्नति के लिए भी व्यवस्था निर्धारित की गई है। ऐसे मामलों में 1 अक्टूबर से प्रभावी तारीख निर्धारित करने का प्रावधान किया गया है। इसके बाद जारी होने वाले प्रत्येक अगले पदोन्नति आदेश के साथ प्रभावी तारीख एक दिन आगे बढ़ाने की व्यवस्था है। इसके लिए 29 अक्टूबर की अंतिम सीमा भी निर्धारित की गई है।
इस प्रावधान का संबंध एक ही चयन सूची से बाद में उत्पन्न होने वाली अतिरिक्त रिक्तियों पर जारी किए जाने वाले पदोन्नति आदेशों से है। इसलिए हर अधिकारी या हर पदोन्नति मामले में एक जैसी तारीख लागू मानने के बजाय संबंधित आदेश और रिक्ति की स्थिति के अनुसार नियमों को देखना होगा।
पात्रता अवधि और DPC की प्रक्रिया में भी संशोधन
पदोन्नति की प्रभावी तारीख के अलावा कोल इंडिया ने पात्रता अवधि, छूट अवधि और विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की प्रक्रिया से संबंधित प्रावधानों में भी संशोधन किया है। पदोन्नति के लिए पात्रता तय करने में निर्धारित सेवा अवधि और अन्य आवश्यक शर्तों की भूमिका महत्वपूर्ण रहती है। नई व्यवस्था में संबंधित नियमों को संशोधित किया गया है, ताकि पदोन्नति प्रक्रिया के विभिन्न चरणों में लागू प्रावधान स्पष्ट रहें।
DPC की प्रक्रिया पदोन्नति के लिए अधिकारियों के मूल्यांकन और चयन से जुड़ी होती है। संशोधित नियमों के तहत इस प्रक्रिया से संबंधित प्रावधान भी शामिल किए गए हैं। हालांकि, किसी अधिकारी की पात्रता या चयन का अंतिम निर्धारण संबंधित पद, लागू सेवा नियमों और विभागीय प्रक्रिया के आधार पर होगा।
प्रमोशन आदेश में देरी होने पर क्या होगा?
कई बार पदोन्नति की प्रक्रिया पूरी होने और संबंधित आदेश जारी होने के बीच समय का अंतर हो सकता है। इसी तरह, पदोन्नति आदेश जारी होने और अधिकारी के उच्च पद का कार्यभार संभालने की तारीख भी अलग-अलग हो सकती है। कोल इंडिया के संशोधित आदेश में पदोन्नति आदेश जारी होने में देरी और संबंधित परिस्थितियों से जुड़े प्रावधानों में भी बदलाव किया गया है। इससे ऐसे मामलों का निपटारा लागू संशोधित नियमों के आधार पर किया जाएगा।
हालांकि, केवल आदेश जारी होने में देरी होने से किसी अधिकारी को स्वतः पिछली तारीख से पदोन्नति या अतिरिक्त आर्थिक लाभ मिलने का अधिकार नहीं माना जा सकता। इसके लिए संबंधित नियमों और मामले की परिस्थितियों को देखना आवश्यक होगा।
वेतन निर्धारण पर भी पड़ेगा असर
पदोन्नति के बाद वेतन निर्धारण भी नए प्रावधानों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। आदेश में कुछ परिस्थितियों में पदोन्नति की प्रभावी तारीख और वास्तव में उच्च पद का कार्यभार ग्रहण करने की तारीख के बीच अंतर को ध्यान में रखकर वेतन संबंधी लाभ तय करने की व्यवस्था की गई है। इसका महत्व उन मामलों में हो सकता है, जहां किसी अधिकारी की पदोन्नति की प्रभावी तारीख और उच्च पद पर कार्यभार संभालने की तारीख एक नहीं है। ऐसे मामलों में वेतन संबंधी लाभों का निर्धारण संशोधित प्रावधानों के अनुसार किया जाएगा। हालांकि, इससे सभी अधिकारियों के वेतन में स्वतः बढ़ोतरी होने या सभी को पिछली तारीख से एरियर मिलने की गारंटी नहीं है। वास्तविक लाभ संबंधित अधिकारी की स्थिति, लागू वेतन नियमों और पदोन्नति आदेश पर निर्भर करेगा।
क्या सभी अधिकारियों को मिलेगा प्रमोशन का फायदा?
कोल इंडिया के आदेश में स्पष्ट किया गया है कि मानक प्रभावी तारीख तय होने मात्र से किसी अधिकारी को पदोन्नति का अधिकार नहीं मिलेगा। पदोन्नति के लिए निर्धारित पात्रता, चयन प्रक्रिया और अन्य आवश्यक शर्तों को पूरा करना अनिवार्य होगा। इसका अर्थ है कि नई व्यवस्था पदोन्नति की तारीख निर्धारित करने और संबंधित प्रक्रियाओं को नियमित करने का आधार प्रदान करती है। लेकिन किसी अधिकारी का प्रमोशन होगा या नहीं, यह संबंधित पद की रिक्ति, पात्रता और लागू चयन प्रक्रिया पर निर्भर करेगा। इसलिए अधिकारियों को अपने पद, सेवा अवधि, पात्रता और संबंधित पदोन्नति चक्र के नियमों के आधार पर ही अपने मामले का आकलन करना चाहिए।
30 सितंबर 2026 से लागू होंगे नए प्रावधान
कोल इंडिया के संशोधित नियम 30 सितंबर 2026 की कट-ऑफ तारीख वाले वार्षिक पदोन्नति चक्र और इसके बाद की प्रक्रियाओं पर लागू होंगे। इससे पहले के पदोन्नति चक्रों से संबंधित मामलों में पुराने प्रावधान लागू रहेंगे, जब तक किसी विशेष विषय पर आदेश में अलग व्यवस्था नहीं दी गई हो।




