शारदीय नवरात्र 2026: घर में यहां सजाएं माता की चौकी, जानें पूजा के 5 जरूरी नियम

शारदीय नवरात्र 2026 की शुरुआत 11 अक्टूबर से होगी। जानें घर में माता की चौकी की सही दिशा और पूजा के 5 जरूरी नियम।

शारदीय नवरात्र 2026: घर में यहां सजाएं माता की चौकी, जानें पूजा के 5 जरूरी नियम
शारदीय नवरात्र: ईशान कोण में सजाएं माता की चौकी।

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  • 11 अक्टूबर 2026, रविवार से शुरू होगा शारदीय नवरात्र
  • माता की चौकी के लिए ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा को शुभ माना जाता है
  • जगह न हो तो उत्तर या पूर्व दिशा में भी चौकी स्थापित की जा सकती है
  • चौकी के आसपास जूते-चप्पल, झाड़ू और कबाड़ न रखें

नई दिल्ली (Threesocieties.com Desk): शारदीय नवरात्र हिंदू धर्म के प्रमुख पर्वों में से एक है। मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना का यह पावन पर्व भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है। मान्यता है कि नवरात्र के दौरान विधि-विधान से मां दुर्गा की पूजा करने और घर में पूजा स्थल को स्वच्छ एवं व्यवस्थित रखने से सकारात्मक वातावरण बनता है।

साल 2026 में शारदीय नवरात्र की शुरुआत 11 अक्टूबर, रविवार से होगी। नौ दिनों तक मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा-अर्चना के बाद 20 अक्टूबर, मंगलवार को दशहरे के साथ इस पर्व का समापन होगा। नवरात्र के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु घरों में कलश स्थापना करते हैं और माता की चौकी सजाकर पूजा करते हैं। अगर आप भी इस नवरात्र घर में माता की चौकी स्थापित करने की तैयारी कर रहे हैं, तो पूजा स्थल की दिशा और साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना जरूरी है। धार्मिक मान्यताओं और वास्तु परंपराओं के अनुसार चौकी स्थापित करते समय कुछ बातों का ध्यान रखा जाता है।

माता की चौकी के लिए कौन-सी दिशा शुभ?

वास्तु शास्त्र की मान्यताओं के अनुसार घर का ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा पूजा-पाठ के लिए शुभ मानी जाती है। इसलिए संभव हो तो माता की चौकी इसी दिशा में स्थापित करें। अगर घर में उत्तर-पूर्व दिशा में पर्याप्त स्थान उपलब्ध नहीं है, तो उत्तर या पूर्व दिशा में भी पूजा स्थल बनाया जा सकता है। चौकी रखने से पहले उस स्थान की अच्छी तरह सफाई कर लें। पूजा के दौरान भक्त का मुख भी पूर्व या उत्तर दिशा की ओर हो, इसका ध्यान रखने की सलाह दी जाती है। लकड़ी की चौकी पर साफ लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछाकर माता की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित की जा सकती है।

चौकी सजाते समय इन 5 बातों का रखें ध्यान

1. पूजा स्थल के आसपास गंदगी न रखें

माता की चौकी के आसपास जूते-चप्पल, झाड़ू, कबाड़ या ऐसी कोई वस्तु न रखें जो पूजा स्थल की पवित्रता और स्वच्छता को प्रभावित करे। पूजा की जगह को नियमित रूप से साफ रखें।

2. खंडित मूर्ति या तस्वीर न रखें

पूजा के लिए साफ-सुथरी और साबुत मूर्ति या तस्वीर का इस्तेमाल करें। इसी तरह कलश और पूजा सामग्री भी स्वच्छ होनी चाहिए। धार्मिक मान्यताओं में खंडित पूजा सामग्री को शुभ नहीं माना जाता।

3. अखंड ज्योत की सुरक्षा का रखें ध्यान

अगर नवरात्र के नौ दिनों तक अखंड ज्योत जलाने का संकल्प लिया है, तो उसके स्थान को लेकर विशेष सावधानी बरतें। दीपक को पर्दे, कागज, कपड़े और अन्य ज्वलनशील वस्तुओं से दूर रखें। ऐसी जगह दीपक न रखें जहां तेज हवा आने से लौ अस्थिर हो सकती हो।

4. चौकी ऐसी जगह रखें जहां ज्यादा आवाजाही न हो

पूजा स्थल को घर के ऐसे स्थान पर रखना बेहतर है जहां बार-बार लोगों का आना-जाना न हो। इससे पूजा की व्यवस्था बनी रहती है और पूजा करते समय एकाग्रता भी बनी रहती है।

5. पूजा में ताजे फूलों का इस्तेमाल करें

मां दुर्गा की पूजा में ताजे फूल अर्पित करने की परंपरा है। पूजा स्थल पर चढ़े पुराने या सूखे फूलों को लंबे समय तक न रखें। उन्हें नियमित रूप से हटाकर पूजा स्थल को स्वच्छ रखें।

कलश स्थापना और चौकी की साफ-सफाई भी जरूरी

नवरात्र के पहले दिन कई घरों में कलश स्थापना की जाती है। कलश स्थापना से पहले पूजा स्थल की अच्छी तरह सफाई करना चाहिए। चौकी, पूजा सामग्री और आसपास की जगह को व्यवस्थित रखना चाहिए। ध्यान रखें कि पूजा की सजावट के दौरान सुरक्षा से समझौता न करें। खासकर अखंड ज्योत जलाने पर बच्चों और पालतू जानवरों की पहुंच से दीपक को दूर रखें और ज्वलनशील सजावटी सामग्री का इस्तेमाल सावधानी से करें।

क्यों खास है शारदीय नवरात्र?

शारदीय नवरात्र मां दुर्गा की शक्ति और नौ स्वरूपों की आराधना का पर्व है। इन नौ दिनों में भक्त उपवास रखते हैं, पूजा-पाठ करते हैं और माता का आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना करते हैं। नवरात्र के अंतिम चरण में अष्टमी और नवमी की पूजा के बाद दशहरे के दिन विजयादशमी मनाई जाती है। घर में माता की चौकी स्थापित करते समय सबसे महत्वपूर्ण बात श्रद्धा, स्वच्छता और पूजा स्थल की सुरक्षा है। दिशा और वास्तु से जुड़े नियम अलग-अलग परंपराओं में अलग हो सकते हैं, इसलिए इन्हें धार्मिक मान्यता के रूप में ही देखना चाहिए।

अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय, लाभ, सलाह और धार्मिक मान्यताएं सामान्य जानकारी के लिए हैं। Threesocieties.com इन मान्यताओं को अंतिम सत्य या वैज्ञानिक दावा नहीं मानता। जानकारी विभिन्न धार्मिक मान्यताओं, परंपराओं, पंचांगों, ज्योतिषीय स्रोतों और अन्य माध्यमों से संकलित की गई है। पाठकों से अनुरोध है कि किसी भी मान्यता को अपनाने से पहले अपने विवेक का इस्तेमाल करें।