झारखंड पुलिस में अफसरों का टोटा! 8 महीने में 40 DSP-इंस्पेक्टर रिटायर, बढ़ा विधि-व्यवस्था का दबाव
झारखंड पुलिस में अधिकारियों की कमी बढ़ती जा रही है। 31 अगस्त तक 2026 में 40 पुलिस अधिकारी रिटायर हो चुके हैं, जिनमें 15 डीएसपी और 25 इंस्पेक्टर शामिल हैं। जानिए पूरी डिटेल।
HighLights:
- 31 अगस्त को झारखंड पुलिस के पांच अधिकारी सेवानिवृत्त हुए
- 2010 बैच की IPS संध्या रानी मेहता समेत छह पुलिस अधिकारी रिटायर हुए
- 1 जनवरी से 31 अगस्त 2026 तक कुल 40 पुलिस अधिकारी सेवानिवृत्त
- इनमें 15 डीएसपी और 25 पुलिस इंस्पेक्टर शामिल हैं
रांची (Threesocieties.com Desk): झारखंड पुलिस में अधिकारियों की कमी लगातार गंभीर होती जा रही है। वर्ष 2026 के शुरुआती आठ महीनों में ही राज्य पुलिस के 40 अधिकारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं। इनमें 15 डीएसपी और 25 पुलिस इंस्पेक्टर शामिल हैं। बड़ी संख्या में अधिकारियों के रिटायर होने से उनके पदों पर रिक्तियां बढ़ी हैं, जिसका सीधा असर पुलिसिंग और विधि-व्यवस्था पर पड़ने की आशंका है।
सोमवार, 31 अगस्त को भी झारखंड पुलिस के पांच अधिकारी सेवानिवृत्त हुए। इनमें दो डीएसपी और तीन पुलिस इंस्पेक्टर शामिल हैं। इसके अलावा 2010 बैच की आईपीएस अधिकारी संध्या रानी मेहता समेत कुल छह अधिकारियों के सेवानिवृत्त होने की जानकारी है। सेवानिवृत्ति के अवसर पर बैचमेट्स और साथी पुलिस अधिकारियों ने उन्हें शुभकामनाएं दीं तथा उनके लंबे सेवाकाल के दौरान किए गए योगदान को याद किया।
31 अगस्त को दो डीएसपी और तीन इंस्पेक्टर रिटायर
31 अगस्त को सेवानिवृत्त होने वाले अधिकारियों में डीएसपी बैजू उरांव और डीएसपी राजेश कुमार के अलावा पुलिस इंस्पेक्टर रमेश कुमार सिंह, आशुतोष प्रताप नारायण और अशोक कुमार सिंह शामिल हैं। डीएसपी बैजू उरांव वर्तमान में गुमला जिले में पदस्थापित थे। अन्य अधिकारी भी राज्य के अलग-अलग स्थानों पर पुलिस सेवा में अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे।
अधिकारियों की सेवानिवृत्ति के मौके पर सहकर्मियों और बैचमेट्स ने उनके बेहतर भविष्य, अच्छे स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना की। पुलिस अधिकारियों ने उनके लंबे सेवाकाल के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने और अपराध नियंत्रण में निभाई गई भूमिका को भी याद किया।
आठ महीने में 40 अधिकारी हुए रिटायर
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 1 जनवरी 2026 से 31 अगस्त 2026 के बीच झारखंड पुलिस के कुल 40 अधिकारी सेवानिवृत्त हुए हैं। इनमें 15 डीएसपी और 25 पुलिस इंस्पेक्टर हैं।
जनवरी में सबसे अधिक 16 अधिकारी सेवानिवृत्त
31 जनवरी 2026 को कुल 16 अधिकारी सेवानिवृत्त हुए। इनमें डीएसपी सिप्रियन बागे, अखिलेश्वर प्रसाद मंडल, शैलेश प्रसाद, सरोज कुमार सिंह और विनोद उरांव समेत कई अधिकारी शामिल रहे। इसी दिन इंस्पेक्टर संजय कुमार, राजीव रंजन-1, प्रदीप चौधरी, सुमन कुमार सिन्हा, विश्वनाथ सिंह, बंधन भगत, परमानंद बिरुवा, प्रभु सहाय एक्का, प्रदीप कुमार महतो, कृष्ण कुमार साहू और सकलदीप सिंह भी सेवानिवृत्त हुए।
28 फरवरी को डीएसपी अनूप बी. केरकेट्टा तथा इंस्पेक्टर किशुन दास और रामेश्वर राम सेवानिवृत्त हुए।
31 मार्च को डीएसपी बीरेंद्र बाड़ा तथा इंस्पेक्टर सत्यम कुमार और कमलेश कुमार ने पुलिस सेवा से विदाई ली।
31 मई को डीएसपी रतिभान सिंह, डीएसपी सुधीर प्रसाद साहू, डीएसपी अजय कुमार तथा इंस्पेक्टर मनोज कुमार गुप्ता और फ्रांसिस जेवियर बाड़ा सेवानिवृत्त हुए।
30 जून को डीएसपी कुलदीप टोप्पो और इंस्पेक्टर रंजीत सिन्हा, सुधीर पोद्दार, नंद किशोर साह और रामाकांत ओझा रिटायर हुए।
31 जुलाई को डीएसपी मंजू कश्यप तथा पुलिस इंस्पेक्टर शिव गोप और विष्णु देव चौधरी सेवानिवृत्त हुए।
इसके बाद 31 अगस्त को पांच अधिकारी सेवानिवृत्त हुए। इस तरह सूची के अनुसार जनवरी से अगस्त तक कुल संख्या 40 हो जाती है।
अधिकारियों की कमी से पुलिसिंग पर असर
एक साथ बड़ी संख्या में डीएसपी और इंस्पेक्टर के सेवानिवृत्त होने से पुलिस विभाग के सामने रिक्त पदों को भरने की चुनौती बढ़ गई है। राज्य में पहले से ही पर्याप्त संख्या में पुलिस बल और कनीय पुलिस पदाधिकारियों की कमी की चर्चा होती रही है।बल की कमी का असर पुलिस की नियमित पेट्रोलिंग पर भी पड़ रहा है। पेट्रोलिंग वाहनों में कई बार मानक के अनुरूप पुलिसकर्मियों की उपलब्धता नहीं हो पाती। वहीं थानों और अन्य पुलिस इकाइयों में कार्यरत जवानों पर अतिरिक्त ड्यूटी का दबाव बढ़ जाता है। पुलिस बल की कमी के कारण कई पुलिसकर्मियों को 12-12 घंटे तक ड्यूटी करनी पड़ रही है। लंबे समय तक लगातार ड्यूटी और पर्याप्त मानवबल की कमी का असर पुलिसकर्मियों के साप्ताहिक अवकाश पर भी पड़ रहा है।
रिक्त पद भरना बनी बड़ी चुनौती
डीएसपी और इंस्पेक्टर जैसे महत्वपूर्ण पदों से अधिकारियों की सेवानिवृत्ति के बाद इन पदों पर रिक्तियां बढ़ रही हैं। ये अधिकारी थानों, अनुमंडलों और विभिन्न पुलिस इकाइयों में कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण, जांच और प्रशासनिक जिम्मेदारियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में पुलिस विभाग के सामने दोहरी चुनौती है—एक ओर लगातार सेवानिवृत्त हो रहे अधिकारियों के पदों को भरना और दूसरी ओर पर्याप्त संख्या में पुलिसकर्मियों की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि समय रहते रिक्त पदों पर पदस्थापन और नई बहाली नहीं हुई तो आने वाले समय में पुलिस अधिकारियों पर काम का दबाव और बढ़ सकता है। इसका असर अपराध की जांच, पेट्रोलिंग, कानून-व्यवस्था और आम लोगों को मिलने वाली पुलिस सेवा पर भी पड़ सकता है।
झारखंड में कानून-व्यवस्था को प्रभावी बनाए रखने के लिए पर्याप्त संख्या में पुलिस अधिकारियों और जवानों की उपलब्धता बेहद जरूरी है। ऐसे में आठ महीने में 40 अधिकारियों की सेवानिवृत्ति के बाद अब विभाग की नजर रिक्त पदों को भरने और पुलिस बल को मजबूत करने की दिशा में उठाए जाने वाले अगले कदमों पर रहेगी।
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