धनबाद में फिर दिखा डीसी-एसएसपी का पुराना रुतबा, एंबेसडर-जिप्सी बनी प्रशासनिक विरासत

धनबाद समाहरणालय में डीसी की पुरानी एंबेसडर और एसएसपी की मारुति जिप्सी को री-स्टोर कर प्रदर्शित किया गया है। जानिए इन ऐतिहासिक वाहनों की खासियत और प्रशासनिक विरासत।

धनबाद में फिर दिखा डीसी-एसएसपी का पुराना रुतबा, एंबेसडर-जिप्सी बनी प्रशासनिक विरासत
डीसी-एसएसपी की ऐतिहासिक गाड़ियां बनीं प्रशासनिक विरासत

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  • धनबाद डीसी की एंबेसडर और एसएसपी की मारुति जिप्सी को कराया गया री-स्टोर
  • समाहरणालय परिसर में ऐतिहासिक वाहनों को किया गया प्रदर्शित
  • दशकों तक प्रशासनिक व्यवस्था की मूक साक्षी रहीं दोनों गाड़ियां अब नई पीढ़ी को दिखाएंगी पुराना दौर
  • एंबेसडर जेएच 10 एच 0055 और मारुति जिप्सी जेएच 10 सी 0022 को मूल विंटेज लुक में सजाया गया

धनबाद (Threesocieties.com Desk): एक दौर था जब सफेद एंबेसडर कार सिर्फ एक सरकारी वाहन नहीं, बल्कि प्रशासनिक रुतबे और अधिकार की पहचान हुआ करती थी। सड़क पर लाल बत्ती लगी एंबेसडर दिखाई देती थी तो लोगों को सहज ही अंदाजा हो जाता था कि किसी बड़े अधिकारी का काफिला गुजर रहा है। जिलाधिकारी से लेकर देश के शीर्ष पदों पर बैठे अधिकारियों तक के साथ इस कार की अपनी अलग पहचान थी। समय बदला, सरकारी वाहनों का स्वरूप बदला और एंबेसडर का दौर धीरे-धीरे इतिहास बन गया। लेकिन धनबाद में अब उस दौर की यादों को एक बार फिर जीवंत कर दिया गया है।

धनबाद जिला प्रशासन ने अपनी प्रशासनिक विरासत को संरक्षित करने की अनूठी पहल करते हुए कभी डीसी और एसएसपी के इस्तेमाल में रही ऐतिहासिक गाड़ियों को पुनर्निर्मित कर समाहरणालय परिसर में प्रदर्शित किया है। अब यहां आने वाले लोगों को न सिर्फ पुरानी एंबेसडर कार देखने को मिलेगी, बल्कि पुलिस प्रशासन की पहचान रही मारुति जिप्सी भी अपनी पुरानी शान में नजर आएगी।

डीसी की एंबेसडर और एसएसपी की जिप्सी फिर अपने पुराने रूप में

धनबाद उपायुक्त की आधिकारिक एंबेसडर कार जेएच 10 एच 0055 और धनबाद एसएसपी की मारुति जिप्सी जेएच 10 सी 0022 को पूरी तरह दुरुस्त कर समाहरणालय परिसर में स्थापित किया गया है। दोनों वाहनों को उनके पुराने स्वरूप और विंटेज लुक को ध्यान में रखते हुए री-स्टोर किया गया है।

वाहनों की डेंटिंग-पेंटिंग से लेकर इंटीरियर, इंजन पार्ट्स, लाइट और लोगो तक पर विशेष ध्यान दिया गया है, ताकि इनका मूल स्वरूप अधिक से अधिक बरकरार रहे। अब ये दोनों वाहन सरकारी उपयोग में नहीं, बल्कि धनबाद के प्रशासनिक इतिहास की जीवंत निशानी के रूप में लोगों के सामने मौजूद रहेंगे।

कभी सरकारी वाहन था रुतबे और अधिकार का प्रतीक

एंबेसडर कार का भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़ा इतिहास काफी खास रहा है। लंबे समय तक सरकारी अधिकारियों की आधिकारिक गाड़ी के तौर पर इसकी अलग पहचान रही। सफेद रंग की एंबेसडर और उसके ऊपर लगी लाल बत्ती उस दौर में प्रशासनिक शक्ति की पहचान मानी जाती थी।

दूसरी ओर मारुति जिप्सी पुलिस और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों के बीच खास तौर पर लोकप्रिय रही। मजबूत बॉडी और कठिन इलाकों में आसानी से चलने की क्षमता के कारण पुलिस और प्रशासनिक कार्यों में इसका व्यापक इस्तेमाल हुआ।धनबाद जैसे कोयलांचल क्षेत्र में, जहां कानून-व्यवस्था, खनन क्षेत्रों और दूरदराज इलाकों में अधिकारियों की आवाजाही प्रशासनिक कामकाज का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है, ऐसी गाड़ियों ने वर्षों तक अधिकारियों की यात्राओं में साथ दिया।

दशकों की कहानी अपने अंदर समेटे हैं दोनों वाहन

उपायुक्त के अनुसार, इन दोनों वाहनों ने दशकों तक जिले की विधि-व्यवस्था, नीति निर्धारण, प्रशासनिक गतिविधियों और जनसेवा को बेहद करीब से देखा है। ये सिर्फ पुराने वाहन नहीं, बल्कि धनबाद के प्रशासनिक सफर की मूक गवाह हैं। सरकारी सेवा के लिए अनुपयोगी हो चुके इन ऐतिहासिक महत्व के वाहनों को नष्ट या कबाड़ में जाने देने के बजाय संरक्षित करने का फैसला किया गया। इनके पुनर्निर्माण के बाद इन्हें प्रशासनिक विरासत के रूप में समाहरणालय परिसर में स्थान दिया गया है।

नई पीढ़ी के लिए इतिहास को करीब से समझने का मौका

इस पहल का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि अब युवा और नई पीढ़ी प्रशासनिक व्यवस्था के उस दौर को करीब से देख सकेगी, जिसके बारे में आज सिर्फ किताबों, तस्वीरों या बुजुर्गों की यादों में सुनने को मिलता है। समाहरणालय आने वाले आम नागरिक, छात्र-छात्राएं और युवा इन वाहनों को देखकर यह समझ सकेंगे कि समय के साथ सरकारी परिवहन और प्रशासनिक व्यवस्था किस तरह बदली है।

प्रशासन और पुलिस के समन्वय की भी दिखेगी तस्वीर

एंबेसडर और मारुति जिप्सी को एक साथ प्रदर्शित किए जाने का अपना अलग महत्व है। एक वाहन प्रशासनिक नेतृत्व का प्रतिनिधित्व करता था, जबकि दूसरा पुलिस व्यवस्था और कानून-व्यवस्था से जुड़ा रहा। दोनों को साथ रखकर प्रशासन और पुलिस के समन्वय की तस्वीर भी सामने आती है। यह पहल सिर्फ पुरानी गाड़ियों को सहेजने तक सीमित नहीं है, बल्कि धनबाद की प्रशासनिक यात्रा को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का प्रयास भी है।

वक्त बदला, गाड़ियां बदलीं, लेकिन यादें रह गईं

आज सरकारी अधिकारियों की गाड़ियों में आधुनिक सुविधाएं, सुरक्षा उपकरण और तकनीक शामिल हैं। पुरानी एंबेसडर और जिप्सी का दौर भले ही समाप्त हो चुका हो, लेकिन इन वाहनों से जुड़ी यादें अब धनबाद समाहरणालय में सुरक्षित रहेंगी।

कभी सड़कों पर अपनी मौजूदगी से प्रशासनिक रुतबे का अहसास कराने वाली ये गाड़ियां अब शांत खड़ी होकर धनबाद के बदलते प्रशासनिक इतिहास की कहानी सुनाएंगी। यही इस पहल को खास बनाता है—वक्त आगे बढ़ गया, गाड़ियां बदल गईं, लेकिन धनबाद ने अपने पुराने प्रशासनिक गौरव को सहेज लिया।