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    HighLights:

  • अमित शाह ने 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले 21 राज्यों में UCC लागू करने का दावा किया
  • फिलहाल उत्तराखंड देश का एकमात्र राज्य है जहां UCC लागू है
  • गुजरात, असम और मध्य प्रदेश में UCC को लेकर विधानसभा स्तर पर प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है
  • महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ में UCC के लिए समितियां गठित की गई हैं

मुंबई (Threesocieties.com Desk): समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code-UCC) को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि 2029 में होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा के नेतृत्व वाली NDA सरकारों वाले 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू कर दी जाएगी। शाह ने यह बात मुंबई में भाजपा के ‘सेवा संकल्प अभियान’ की लॉन्चिंग के दौरान आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कही।

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अमित शाह के इस बयान के बाद UCC एक बार फिर देश की राजनीति के केंद्र में आ गया है। फिलहाल उत्तराखंड देश का पहला और एकमात्र राज्य है, जहां समान नागरिक संहिता लागू हो चुकी है। उत्तराखंड में जनवरी 2025 से UCC प्रभावी है। अब केंद्र की नजर अन्य NDA शासित राज्यों में इसे लागू करने पर है।

2029 तक 21 राज्यों में UCC लागू करने का लक्ष्य

अमित शाह ने कहा कि जिन राज्यों में भाजपा के नेतृत्व वाली NDA सरकारें हैं, वहां आने वाले समय में समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में काम किया जाएगा। उन्होंने भरोसा जताया कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले 21 राज्यों में UCC लागू हो जाएगा।शाह ने कहा कि केंद्र सरकार ने कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। उन्होंने तत्काल तीन तलाक खत्म करने का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे मुस्लिम महिलाओं को बराबरी का अधिकार मिला है। गृह मंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य देश में नागरिकों के लिए समान अधिकार और समान कानून की व्यवस्था को मजबूत करना है।

अभी सिर्फ उत्तराखंड में लागू है UCC

देश में UCC को सबसे पहले उत्तराखंड में लागू किया गया। जनवरी 2025 में राज्य में समान नागरिक संहिता प्रभावी हुई। इसके बाद अन्य भाजपा और NDA शासित राज्यों में भी इसे लागू करने की प्रक्रिया तेज हुई है। शाह के मुताबिक देश में NDA की सरकारें कई राज्यों में हैं और इनमें से 21 राज्यों में 2029 से पहले UCC लागू करने का लक्ष्य रखा गया है।

गुजरात, असम और मध्य प्रदेश में बढ़ी उम्मीद

UCC लागू करने की दिशा में गुजरात, असम और मध्य प्रदेश में भी प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है। इन राज्यों में UCC से संबंधित प्रस्ताव विधानसभा से पारित हो चुके हैं। अब आगे की संवैधानिक प्रक्रिया और अधिसूचना का इंतजार है। इसका मतलब है कि इन राज्यों में UCC लागू होने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जा चुके हैं। राष्ट्रपति की मंजूरी और अधिसूचना जारी होने के बाद इसे लागू करने का रास्ता साफ हो सकता है।

महाराष्ट्र समेत इन राज्यों में बनी समितियां

UCC को लेकर सिर्फ उत्तर और पश्चिम भारत के राज्यों में ही हलचल नहीं है। महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ में भी समान नागरिक संहिता का कानून तैयार करने के लिए समितियों का गठन किया गया है। इन समितियों के माध्यम से राज्य की परिस्थितियों और मौजूदा कानूनों का अध्ययन कर UCC को लागू करने की संभावनाओं पर काम किया जा रहा है।

तीन तलाक का भी किया जिक्र

अमित शाह ने अपने संबोधन में तीन तलाक के मुद्दे का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि तत्काल तीन तलाक को खत्म करने का फैसला मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। शाह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने देश को लंबे समय तक चली ‘पॉलिसी पैरालिसिस’ से बाहर निकालने का काम किया है। उनके मुताबिक सरकार ने विकास और जनभागीदारी की राजनीति को आगे बढ़ाया है।

भ्रष्टाचार, जातिवाद और परिवारवाद पर भी निशाना

गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश में विकास और जनभागीदारी को प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने दावा किया कि भारत भ्रष्टाचार, जातिवाद और परिवारवादी राजनीति के दुष्प्रभावों से बाहर निकलने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। मुंबई में आयोजित कार्यक्रम में शाह ने भाजपा के आगामी ‘सेवा संकल्प अभियान’ की भी जानकारी दी। यह अभियान देशभर में व्यापक स्तर पर चलाया जाएगा।

मणिपुर में NRC पर भी बोले अमित शाह

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर यानी NRC का मुद्दा भी उठा। अमित शाह ने कहा कि मणिपुर में जनगणना से पहले NRC को लेकर काम किया जाएगा। जब उनसे पूछा गया कि मणिपुर में NRC लागू करने के लिए वर्ष 1951 को आधार माना जाएगा या नहीं, तो शाह ने कहा कि इस मुद्दे पर बातचीत चल रही है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय स्तर पर भी सहयोगी दलों से चर्चा की जा रही है। इस संबंध में अंतिम फैसला समय आने पर बताया जाएगा।

17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलेगा सेवा संकल्प अभियान

अमित शाह ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के रूप में 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक देशभर में ‘सेवा संकल्प अभियान’ चलाया जाएगा। पहले भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन के अवसर पर 17 सितंबर से 2 अक्टूबर तक ‘सेवा पखवाड़ा’ मनाया जाता था। इस बार अभियान का विस्तार एक महीने तक किया गया है। अभियान को राज्य से लेकर जिला, लोकसभा-विधानसभा क्षेत्र और बूथ स्तर तक आयोजित किया जाएगा। इस दौरान देशभर में कई सामाजिक और जनभागीदारी से जुड़े कार्यक्रम होंगे।

युवाओं के लिए भी होंगे कई कार्यक्रम

अभियान के तहत रक्तदान, दीप प्रज्ज्वलन और जनता के प्रति आभार व्यक्त करने जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। बच्चों और युवाओं के लिए ‘मेरे सपनों का भारत चित्र’ के तहत चित्रकला और भाषण प्रतियोगिताएं भी होंगी। इसके अलावा ‘नमो सेवा की अनकही कहानियां’, ‘आंगन मिलन सेवा’, ‘सेवा की कहानी’ और ‘सेवा ज्योति कलश यात्रा’ जैसे कार्यक्रम भी प्रस्तावित हैं। ‘वडनगर से वाराणसी की सेवा यात्रा’ के तहत युवा मोटरसाइकिल से सात राज्यों से गुजरेंगे और गांवों में रात्रि प्रवास भी करेंगे। वहीं ‘सेवा मेरा योगदान’ के तहत जनभागीदारी से 25 सेवा गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।

UCC पर अब आगे क्या?

अमित शाह के 2029 से पहले 21 राज्यों में UCC लागू करने के ऐलान के बाद आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक और कानूनी बहस तेज होने की संभावना है। उत्तराखंड के बाद अब गुजरात, असम और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों पर विशेष नजर रहेगी, जबकि महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ में गठित समितियों की रिपोर्ट और उसके बाद की प्रक्रिया भी अहम होगी। UCC लागू होने की दिशा में राज्यों की संवैधानिक प्रक्रिया, विधानसभा की भूमिका और अंतिम अधिसूचना सबसे महत्वपूर्ण चरण होंगे।