जिसे कभी मिला था सम्मान में झटका, वही विनयतोष मिश्रा अब बने ओडिशा के DGP

मधुबनी के लाल और 1993 बैच के IPS अधिकारी विनयतोष मिश्रा ने ओडिशा DGP का अतिरिक्त प्रभार संभाला। जानिए उनकी शिक्षा, करियर, सम्मान और नई प्राथमिकताएं।

जिसे कभी मिला था सम्मान में झटका, वही विनयतोष मिश्रा अब बने ओडिशा के DGP
बिहार के विनयतोष मिश्रा बने ओडिशा DGP।

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  HighLights:

  • 1993 बैच के IPS अधिकारी विनयतोष मिश्रा ने ओडिशा DGP का अतिरिक्त प्रभार संभाला
  • मधुबनी के पौना गांव से है उनका पैतृक संबंध, अंधराठाढ़ी के ठाढ़ी में ननिहाल
  • क्राइम ब्रांच के DG रहते अपराध नियंत्रण और जांच के क्षेत्र में बनाई पहचान
  • 2009 में पुलिस पदक और 2016 में राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित

भुवनेश्वर (Threesocieties.com Desk): बिहार के मधुबनी की धरती ने एक बार फिर देश को ऐसा पुलिस अधिकारी दिया है, जिसने अपनी प्रतिभा और करीब तीन दशक की शानदार सेवा के दम पर ओडिशा पुलिस के सर्वोच्च पद तक पहुंच बनाई है। मधुबनी के मूल निवासी और 1993 बैच के वरिष्ठ IPS अधिकारी विनयतोष मिश्रा ने ओडिशा के पुलिस महानिदेशक (DGP) का अतिरिक्त/कार्यवाहक प्रभार संभाल लिया है।

विनयतोष मिश्रा ने निवर्तमान DGP योगेश बहादुर खुरानिया के सेवानिवृत्त होने के बाद पुलिस प्रमुख की जिम्मेदारी संभाली। राज्य सरकार ने नियमित DGP की नियुक्ति होने तक पुलिस नेतृत्व में निरंतरता बनाए रखने के लिए उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी है। विनयतोष मिश्रा के DGP बनने की खबर सामने आते ही उनके पैतृक गांव पौना और ननिहाल ठाढ़ी समेत पूरे मिथिलांचल में खुशी का माहौल है। ओडिशा में भी लंबे समय से पुलिस सेवा में सक्रिय रहे मिश्रा के समर्थकों और परिचितों ने उनकी उपलब्धि पर खुशी जताई।

मधुबनी के पौना गांव से है पैतृक संबंध

विनयतोष मिश्रा का पैतृक संबंध मधुबनी जिले के रहिका प्रखंड स्थित पौना गांव से है। उनका ननिहाल अंधराठाढ़ी प्रखंड के ठाढ़ी गांव में है। उनका परिवार शिक्षा और विद्वता की मजबूत परंपरा से जुड़ा रहा है। उनके दादा स्व. बल्लू मिश्रा और पिता डॉ. लेखनाथ मिश्रा उच्च शिक्षा प्राप्त थे। वहीं उनके नाना स्व. विष्णुलाल झा शास्त्री अपने समय के प्रकांड विद्वान माने जाते थे। ऐसे शैक्षणिक माहौल में पले-बढ़े विनयतोष मिश्रा ने बचपन से ही पढ़ाई में अपनी प्रतिभा का परिचय दिया।

इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद UPSC में सफलता

विनयतोष मिश्रा का जन्म 3 नवंबर 1966 को मधुबनी में हुआ था। उन्होंने स्कूली शिक्षा के बाद मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। इसके बाद वर्ष 1993 में UPSC परीक्षा पास कर भारतीय पुलिस सेवा में प्रवेश किया और ओडिशा कैडर चुना। पुलिस सेवा में आने के बाद उन्होंने अलग-अलग महत्वपूर्ण पदों पर काम किया और कानून-व्यवस्था, अपराध अनुसंधान, फॉरेंसिक तथा प्रशासनिक प्रबंधन के क्षेत्र में लंबा अनुभव हासिल किया।

क्राइम ब्रांच से DGP की कुर्सी तक

DGP की जिम्मेदारी संभालने से पहले विनयतोष मिश्रा ओडिशा क्राइम ब्रांच के DG के पद पर कार्यरत थे। अपराध की जांच और पुलिसिंग में लंबे अनुभव के कारण उन्हें ओडिशा पुलिस के अनुभवी अधिकारियों में गिना जाता है। उन्होंने CID, क्राइम ब्रांच और स्टेट फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां भी संभाली हैं। इसके अलावा फायर सर्विसेज, होम गार्ड्स और सिविल डिफेंस जैसे विभागों में भी नेतृत्वकारी भूमिकाएं निभा चुके हैं। उनके व्यापक प्रशासनिक अनुभव को देखते हुए कार्यवाहक DGP के रूप में उनकी नियुक्ति को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

राष्ट्रपति पुलिस पदक समेत कई सम्मान

विनयतोष मिश्रा की सेवाओं को कई स्तर पर सम्मानित किया जा चुका है। उन्हें वर्ष 2009 में पुलिस पदक मिला। इसके बाद वर्ष 2016 में विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित किया गया। आंतरिक सुरक्षा के क्षेत्र में योगदान के लिए उन्हें 2017 में आंतरिक सुरक्षा सेवा पदक भी प्रदान किया गया। करीब तीन दशक की पुलिस सेवा में उन्होंने कठिन अपराधों की जांच, आधुनिक फॉरेंसिक तकनीक और प्रशासनिक सुधारों से जुड़े कामों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

2009 का सम्मान समारोह भी रहा चर्चा में

विनयतोष मिश्रा से जुड़ा वर्ष 2009 का एक प्रसंग भी लंबे समय तक चर्चा में रहा। उस समय पुलिस पदक प्राप्त करने वाले अधिकारियों के सम्मान समारोह में उनके साथ कथित तौर पर अलग व्यवहार किए जाने की बात सामने आई थी। बताया जाता है कि तत्कालीन मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने समारोह में अन्य अधिकारियों को सम्मानित किया, जबकि विनयतोष मिश्रा को उसी तरह सम्मान नहीं मिला। इस घटना को लेकर उस समय काफी चर्चा हुई थी। हालांकि वर्षों बाद वही अधिकारी ओडिशा पुलिस के सर्वोच्च पद की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

DGP बनते ही तीन बड़े फोकस

DGP का पद संभालने के बाद विनयतोष मिश्रा ने अपनी प्राथमिकताओं को लेकर स्पष्ट संकेत दिए हैं। उनकी प्राथमिकताओं में जमीनी स्तर पर पुलिसिंग को मजबूत करना, जांच की गुणवत्ता बढ़ाना और अपराधियों को सजा दिलाने की दर में सुधार शामिल है। इसके साथ ही उन्होंने नशीले पदार्थों और साइबर अपराध के खिलाफ कार्रवाई तेज करने पर जोर दिया है। आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल और पुलिस को अधिक जवाबदेह बनाने के साथ समुदाय की भागीदारी को भी महत्वपूर्ण माना है।

साइबर अपराध और नशे के खिलाफ होगी कड़ी कार्रवाई

बदलते दौर में साइबर अपराध पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन चुका है। ऑनलाइन ठगी, डिजिटल फ्रॉड और तकनीक आधारित अपराधों से निपटने के लिए पुलिसिंग को और मजबूत करना मिश्रा की प्राथमिकताओं में शामिल है। इसी तरह युवाओं को प्रभावित कर रहे नशीले पदार्थों के नेटवर्क पर भी कार्रवाई तेज करने की बात उन्होंने कही है। ऐसे में आने वाले समय में ओडिशा पुलिस की अपराध नियंत्रण रणनीति में तकनीक और इंटेलिजेंस आधारित पुलिसिंग की भूमिका और बढ़ सकती है।

मिथिलांचल में जश्न, गांव में बंटी मिठाई

विनयतोष मिश्रा के DGP बनने की खबर से उनके पैतृक और ननिहाल गांव में खुशी का माहौल है। पौना और ठाढ़ी के लोगों ने उनकी उपलब्धि को पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय बताया। ठाढ़ी निवासी उनके मामा डॉ. ज्ञानेश्वर झा ने कहा कि सीमित संसाधनों के बीच शिक्षा हासिल करने से लेकर पुलिस विभाग के शीर्ष पद तक पहुंचने की उनकी यात्रा नई पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक है। मधुबनी से लेकर ओडिशा तक लोग इसे बिहार की प्रतिभा और विनयतोष मिश्रा की मेहनत की बड़ी उपलब्धि के रूप में देख रहे हैं।

आगे क्या होगा?

फिलहाल विनयतोष मिश्रा के पास DGP का अतिरिक्त/कार्यवाहक प्रभार है। नियमित DGP की नियुक्ति को लेकर राज्य सरकार के अगले फैसले पर नजर रहेगी। हालांकि, कार्यवाहक DGP के रूप में भी उनके सामने कानून-व्यवस्था, साइबर अपराध, नशे के नेटवर्क और पुलिसिंग को आधुनिक बनाने जैसी बड़ी चुनौतियां होंगी। मधुबनी के एक छोटे से गांव से निकलकर ओडिशा पुलिस की कमान तक पहुंचने वाले विनयतोष मिश्रा की कहानी इसलिए भी खास है, क्योंकि यह सिर्फ एक अधिकारी की पदोन्नति नहीं बल्कि मेहनत, शिक्षा और लंबी प्रशासनिक यात्रा की मिसाल है।