बिहार: बांकीपुर में BJP का बड़ा दांव! अभिषेक बंटी की जगह नीरज कुमार सिन्हा बने उम्मीदवार
बिहार के बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में भाजपा ने बड़ा बदलाव करते हुए अभिषेक बंटी की जगह नीरज कुमार सिन्हा को उम्मीदवार बनाया है। अभिषेक के नामांकन वापस लेने के बाद पार्टी ने तुरंत नया चेहरा मैदान में उतारा। जानिए नीरज कुमार सिन्हा का राजनीतिक सफर और इस फैसले से कैसे बदले चुनावी समीकरण।
Highlights:
- भाजपा ने बांकीपुर उपचुनाव में बदला अपना उम्मीदवार
- अभिषेक बंटी ने पारिवारिक कारणों से नामांकन वापस लिया
- नीरज कुमार सिन्हा को केंद्रीय चुनाव समिति ने बनाया प्रत्याशी
- 2006 से भाजपा संगठन से जुड़े हैं नीरज कुमार सिन्हा
- दो बार मंडल अध्यक्ष और वर्तमान में भाजयुमो जिला उपाध्यक्ष रह चुके हैं
पटना (Threesocieties.com Desk): बिहार की सबसे चर्चित विधानसभा सीटों में शामिल बांकीपुर उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने अंतिम समय में बड़ा राजनीतिक फैसला लेते हुए अपना उम्मीदवार बदल दिया है। पहले घोषित प्रत्याशी अभिषेक कुमार उर्फ अभिषेक बंटी द्वारा पारिवारिक कारणों का हवाला देते हुए नामांकन वापस लेने के बाद पार्टी ने नीरज कुमार सिन्हा को नया उम्मीदवार घोषित कर दिया है।
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भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति ने नीरज कुमार सिन्हा के नाम पर अपनी मुहर लगा दी है। इसके बाद भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव एवं मुख्यालय प्रभारी अरुण सिंह ने आधिकारिक पत्र जारी कर उनके नाम की घोषणा कर दी। इस फैसले के साथ ही बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव का राजनीतिक मुकाबला और अधिक दिलचस्प हो गया है।
अचानक बदले उम्मीदवारए चौंके राजनीतिक गलियारे
भाजपा ने पहले अभिषेक बंटी को बांकीपुर सीट से उम्मीदवार बनाया था और उन्होंने नामांकन भी दाखिल कर दिया था। हालांकि शुक्रवार को उन्होंने पारिवारिक कारणों का हवाला देते हुए चुनाव लड़ने से असमर्थता जताई और अपना नामांकन वापस ले लिया। उनके इस फैसले के बाद भाजपा नेतृत्व ने बिना समय गंवाए संगठन के पुराने और सक्रिय कार्यकर्ता नीरज कुमार सिन्हा पर भरोसा जताया। इससे साफ संकेत मिला कि पार्टी किसी भी तरह इस महत्वपूर्ण सीट पर संगठनात्मक मजबूती के साथ चुनाव लड़ना चाहती है।
जाने नीरज कुमार सिन्हा के बारे में
भाजपा के नए उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा पटना के मीठापुर पोस्टल पार्क क्षेत्र के निवासी हैं। उनका जन्म 1 जुलाई 1994 को हुआ। उन्होंने स्नातक तक शिक्षा प्राप्त की है और वे अविवाहित हैं। नीरज कुमार का भाजपा से जुड़ाव वर्ष 2006 से है। उन्होंने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता लेकर संगठन में बूथ स्तर से अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू की। संगठन में लगातार सक्रिय रहने के कारण उन्हें कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलीं। वे दो बार भाजपा मंडल अध्यक्ष रह चुके हैं और वर्तमान में भारतीय जनता युवा मोर्चा ;भाजयुमोद्ध के जिला उपाध्यक्ष के रूप में कार्य कर रहे हैं। संगठन में उनकी सक्रियता और लंबे अनुभव को देखते हुए पार्टी ने उन्हें चुनावी मैदान में उतारा है।
परिवार का भी रहा भाजपा से पुराना रिश्ता
नीरज कुमार सिन्हा का परिवार लंबे समय से भाजपा और जनसंघ की विचारधारा से जुड़ा रहा है। उनके चाचा स्वर्गीय नरेंद्र भारती जनसंघ काल से संगठन के सक्रिय नेता थे और मंडल अध्यक्ष भी रहे। उनके सम्मान में ही भाजपा संगठन में संबंधित मंडल का नाम नरेंद्र भारती मंडल रखा गया था। इसी संगठनात्मक विरासत और जमीनी सक्रियता को देखते हुए भाजपा नेतृत्व ने नीरज कुमार सिन्हा पर भरोसा जताया है।
प्रशांत किशोर की चुनौती के बीच रणनीतिक फैसला
बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव इस बार पूरे बिहार की सबसे हाई.प्रोफाइल सीटों में गिना जा रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर का चुनावी मैदान में उतरना है। ऐसे में भाजपा का उम्मीदवार बदलना महज एक सामान्य फैसला नहीं बल्कि एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा संगठन के मजबूत और जमीनी कार्यकर्ता को मैदान में उतारकर चुनावी समीकरण अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रही है।
बदले चुनावी समीकरण
अभिषेक बंटी के नामांकन वापस लेने के बाद यह माना जा रहा था कि भाजपा नए चेहरे की तलाश में समय ले सकती हैए लेकिन पार्टी ने तेजी से फैसला लेते हुए नीरज कुमार सिन्हा को मैदान में उतार दिया। इस बदलाव के बाद अब बांकीपुर सीट पर चुनावी रणनीतियां नए सिरे से बननी शुरू हो गई हैं। विपक्षी दल भी भाजपा के इस फैसले पर करीबी नजर बनाए हुए हैं।
अब सबकी नजर चुनाव प्रचार पर
उम्मीदवार बदलने के बाद अब बांकीपुर उपचुनाव का प्रचार अभियान नए सिरे से गति पकड़ने वाला है। भाजपा संगठन पूरी ताकत के साथ चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रहा हैए जबकि विपक्ष भी इस फैसले को अपने राजनीतिक अभियान का हिस्सा बना सकता है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि संगठनात्मक अनुभव वाले नीरज कुमार सिन्हा भाजपा के लिए कितने प्रभावी साबित होते हैं और क्या यह रणनीतिक बदलाव पार्टी को चुनावी लाभ दिला पाता है। फिलहालए बांकीपुर की सियासत पूरे बिहार की राजनीति का केंद्र बनी हुई है।




