पटना। जेडीयू के नेशनल प्रसिडेंट ललन सिंह ने पीएम नरेंद्र मोदी के एक पुराने भाषण का वीडियो शेयर किया जिसमें उन्होंने सीएम नीतीश कुमार के डीएनए पर सवाल खड़ा किया। ललन सिंह ने बीजेपी नेताओं से सवाल किया अगर मोदी के खिलाफ बोलना पिछड़े वर्ग का अपमान है तो फिर नीतीश कुमार के डीएनए पर सवाल करना क्या पिछड़े वर्ग का अपमान नहीं है।
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भाजपा के छोटका से लेकर बड़का नेता सब पुरा मक्खन का कनस्तर लगा कर बोल रहे हैं कि "देश के आदरणीय प्रधानमंत्री जी के ख़िलाफ़ बोलना पिछड़े वर्ग का अपमान हैं"... मुझे तो हंसी भी आती है ! हम उन्हें 25 जुलाई 2015 की याद कराना चाहते हैं जब आदरणीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी ने… pic.twitter.com/wYmgThRlPA
— Rajiv Ranjan (Lalan) Singh (@LalanSingh_1) March 26, 2023
ललन सिंह ने कहा कि बीजेपीके छोटे से लेकर बड़े नेता सब मक्खन का कनस्तर लगा कर बोल रहे हैं कि देश के प्रधानमंत्री के खिलाफ बोलना पिछड़े वर्ग का अपमान हैं। मुझे तो हंसी भी आती है। हम उन्हें 25 जुलाई 2015 की याद दिलाना चाहते हैं, जब पीएम नरेंद्र मोदी ने बिहार के सीएम नीतीश कुमार के डीएनए पर सवाल खड़ा किया था। बीजेपी के लीडर जवाब दें कि नीतीश कुमार जी किस वर्ग से आते हैं।
मोदी सरनेम पर टिप्पणी को बीजेपी ने पिछड़ों का अपमान बताया
मोदी सरनेम पर टिप्पणी को लेकर मानहानि मामले में दो साल की सजा होने के बाद राहुल गांधी की संसद सदस्यता रद्द कर दी गई है। इसको लेकर विपक्ष की सभी पार्टियां भाजपा के खिलाफ एकजुट हो गई है और इस फैसले का विरोध कर रही है। राहुल गांधी की टिप्पणी ‘सभी चोरों का उपनाम मोदी कैसे होता है’ के खिलाफ गुजरात के बीजेपी एमएलए पूर्णेश मोदी ने मानहानि का मुदकमा दायर किया था। सूरत की एक अदालत ने इस मामले में राहुल गांधी को दो साल की सजा सुनाई। इसके 24 घंटे के भीतर ही कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता खत्म कर दी गई। बीजेपी ने राहुल गांधी के बयान को पिछड़े वर्ग से ताल्लुक रखने वाले मोदी समाज का अपमान बताया।
पिछड़े समाज से आते हैं नीतीश कुमार
अब जेडीयू ने जाति की राजनीति को लेकर बीजेपी पर निशाना साधा और नीतीश कुमार के डीएनए पर प्रधानमंत्री की टिप्पणी को लेकर तंज कसा। मालूम हो कि नीतीश कुमार कुर्मी जाति से संबंध रखते हैं, जो पिछड़े वर्ग में आता है। पीएम नरेंद्र मोदी ने नीतीश कुमार के डीएनए में गड़बड़ी को लेकर साल 2015 में उस समय भाषण दिया था, जब 2014 के आम चुनाव से पहले जदयू और बीजेपी की 15 साल पुरानी दोस्ती में दरार आ गई थी और नीतीश कुमार ने आरजेडी से हाथ मिला लिया था।