धनबाद (Threesocieties.com Desk): जिले की राजनीति में मंगलवार को उस वक्त हलचल मच गई, जब पुराने वामपंथी नेता हरि प्रसाद पप्पू ने भाकपा माले (CPI-ML) से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने पार्टी के सभी पदों और प्राथमिक सदस्यता को त्यागते हुए जिला सचिव को अपना इस्तीफा सौंप दिया। इस घटनाक्रम को पार्टी के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।
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कार्यशैली से नाराजगी बनी इस्तीफे की वजह
हरि प्रसाद पप्पू ने अपने इस्तीफे में साफ तौर पर कहा है कि वे पार्टी की कार्यशैली से संतुष्ट नहीं हैं। हालांकि उन्होंने विस्तार से कारणों का खुलासा नहीं किया, लेकिन उनके इस फैसले से यह संकेत जरूर मिलता है कि पार्टी के अंदरूनी हालात को लेकर असंतोष था।
मासस से शुरू हुआ था राजनीतिक सफर
हरि प्रसाद पप्पू का नाम धनबाद के पुराने और प्रभावशाली वामपंथी नेताओं में लिया जाता है। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत स्वर्गीय पूर्व सांसद ए.के. राय की पार्टी मार्क्सवादी समन्वय समिति (मासस) से की थी।
वे लंबे समय तक मासस के जिलाध्यक्ष और केंद्रीय सचिव रहे
मजदूर राजनीति में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है
कोयलांचल क्षेत्र में श्रमिकों के बीच उनकी अच्छी पहचान रही है
मासस का विलय और फिर मोहभंग
सितंबर 2024 में ए.के. राय के निधन के बाद मासस का विलय भाकपा माले में हुआ था। इसी दौरान हरि प्रसाद पप्पू भी भाकपा माले में शामिल हुए थे। लेकिन महज कुछ समय के भीतर ही पार्टी से उनका मोहभंग हो गया और अब उन्होंने इस्तीफा देकर अलग राह पकड़ ली है।
राजनीतिक मायने क्या हैं?
हरि प्रसाद पप्पू जैसे अनुभवी नेता का इस्तीफा कई सवाल खड़े करता है—
क्या भाकपा माले के अंदर असंतोष बढ़ रहा है?
क्या वामपंथी राजनीति में फिर से नए समीकरण बनेंगे?
क्या पप्पू किसी नए राजनीतिक विकल्प की ओर बढ़ेंगे?
फिलहाल इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में स्पष्ट होंगे, लेकिन इतना तय है कि इस इस्तीफे ने धनबाद की सियासत को गरमा दिया है।
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