धनबाद (Threesocieties.com Desk): धनबाद के बरटाँड़ बस स्टैंड को शहर से करीब 15 किलोमीटर दूर कतरास के लिलोरी स्थान में शिफ्ट करने की प्रस्तावित योजना अब राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बन गई है। इस प्रस्ताव को लेकर झारखंड विधानसभा के बजट सत्र में तीखी चर्चा देखने को मिली। झरिया की विधायक Ragini Singh ने इस मामले को सूचना के माध्यम से सदन में उठाते हुए सरकार से कई गंभीर सवाल पूछे।
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विधायक रागिनी सिंह ने कहा कि बस स्टैंड को शहर से दूर स्थानांतरित करना आम लोगों की सुविधा के विपरीत है। उनका कहना है कि इससे मजदूर, छात्र, ग्रामीण यात्री और छोटे व्यापारियों को रोजाना अतिरिक्त दूरी और खर्च का सामना करना पड़ेगा।उन्होंने सदन में बताया कि वर्तमान में Bartand Bus Stand परिसर में लगभग 21 एकड़ जमीन उपलब्ध है। यह जमीन फिलहाल नगर निगम द्वारा सफाई कार्य के लिए एक निजी एजेंसी को दी गई है। ऐसे में जब शहर के भीतर इतनी बड़ी जगह मौजूद है, तो बस स्टैंड को बाहर शिफ्ट करने का औचित्य समझ से परे है।

शहर से बाहर बस स्टैंड होने पर बढ़ेगी परेशानी
विधायक ने कहा कि यदि बस स्टैंड को Lilori Sthan स्थानांतरित किया गया तो यात्रियों को शहर आने-जाने में अतिरिक्त समय और पैसा खर्च करना पड़ेगा। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले लोग, मजदूर वर्ग और छात्रों के लिए यह निर्णय काफी मुश्किलें खड़ी कर सकता है।उन्होंने यह भी कहा कि बस स्टैंड के शहर से बाहर जाने का असर स्थानीय व्यापार और शहर की यातायात व्यवस्था पर भी पड़ सकता है। वर्तमान में बरटाँड़ क्षेत्र में बस स्टैंड के कारण बाजार और परिवहन गतिविधियां सक्रिय रहती हैं।
सरकार से क्या मांग की गई
रागिनी सिंह ने सरकार से मांग की कि यात्रियों की सुविधा और शहर की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बस स्टैंड को धनबाद शहर के भीतर ही आधुनिक सुविधाओं के साथ विकसित किया जाए। उन्होंने कहा कि यदि बरटाँड़ बस स्टैंड की उपलब्ध जमीन का सही तरीके से विकास किया जाए, तो यहां आधुनिक टर्मिनल, पार्किंग, यात्री प्रतीक्षालय और अन्य सुविधाएं आसानी से बनाई जा सकती हैं।
मुद्दे पर बढ़ सकती है सियासत
बरटांड़ बस स्टैंड को लिलोरी स्थान शिफ्ट करने का प्रस्ताव आने के बाद से ही स्थानीय लोगों और व्यापारियों के बीच भी चर्चा तेज हो गई है। कई लोगों का मानना है कि शहर से दूर बस स्टैंड होने पर यात्रियों की संख्या प्रभावित हो सकती है और स्थानीय व्यापार पर भी असर पड़ेगा।
अब देखना होगा कि विधानसभा में उठे इस मुद्दे के बाद सरकार इस योजना पर पुनर्विचार करती है या फिर बस स्टैंड शिफ्टिंग की प्रक्रिया आगे बढ़ती है।