Highlights: 

  • दुनिया के बड़े क्रिप्टो एक्सचेंज बाइनेंस से 6.36 अरब डॉलर के क्रिप्टो एसेट ट्रांसफर होने का दावा
  •  सिहमलावरों ने 10 अलग-अलग ब्लॉकचेन नेटवर्क के जरिए फंड ट्रांसफर किए
  • उत्तर TRM Labs ने कुख्यात हैकर ग्रुप TraderTraitor को हमले के लिए जिम्मेदार माना
  • बाइनेंस और उसके ब्लॉकचेन पार्टनर्स ने प्रभावित फंड को फ्रीज करने की कार्रवाई की

नई दिल्ली (Threesocieties.com Desk): दुनिया की सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज कंपनियों में शामिल बाइनेंस (Binance) पर अब तक का सबसे बड़ा साइबर हमला हुआ है। 29 अक्टूबर 2026 को हुए इस हमले में करीब 6.36 अरब डॉलर के क्रिप्टो एसेट बाइनेंस के वॉलेट से बाहर ट्रांसफर कर दिए गए। चौंकाने वाली बात यह है कि इस रकम का बड़ा हिस्सा महज 20 मिनट के भीतर 10 अलग-अलग ब्लॉकचेन नेटवर्क के जरिए ट्रांसफर किया गया।

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अमेरिकी ब्लॉकचेन इन्वेस्टिगेशन फर्म TRM Labs ने इस हमले के पीछे उत्तर कोरिया के कुख्यात हैकर ग्रुप 'TraderTraitor' का हाथ होने की आशंका जताई है। फर्म का कहना है कि ऑन-चेन और ऑफ-चेन डिजिटल सबूत इस ग्रुप की संलिप्तता की ओर इशारा करते हैं।इस घटना ने पूरी क्रिप्टोकरेंसी इंडस्ट्री में खलबली मचा दी है। बाइनेंस ने प्रभावित नेटवर्क पर निकासी सेवाएं अस्थायी रूप से रोक दीं और यूजर्स को उनके फंड की सुरक्षा का भरोसा दिलाया है।

6.36 अरब डॉलर की चोरी, करीब 20 मिनट में पूरा खेल!

ब्लॉकचेन एनालिसिस फर्म TRM Labs की रिपोर्ट के मुताबिक, हमलावरों ने 29 अक्टूबर की रात बाइनेंस से जुड़े वॉलेट को निशाना बनाया। करीब 6.36 अरब डॉलर की क्रिप्टोकरेंसी अलग-अलग नेटवर्क पर हमलावरों के नियंत्रण वाले वॉलेट में भेज दी गई। इस हमले में Ethereum, Bitcoin, Tron, XRP Ledger, Solana, Arbitrum, Optimism, Base, Avalanche और Polygon जैसे 10 ब्लॉकचेन नेटवर्क प्रभावित हुए। 

TRM Labs के मुताबिक, सबसे बड़ी रकम Ethereum नेटवर्क से निकाली गई। इसके अलावा Bitcoin, Tron और XRP जैसे प्रमुख डिजिटल एसेट भी हमलावरों के हाथ लगे। इस चोरी का पैमाना इतना बड़ा है कि फरवरी 2025 में Bybit एक्सचेंज पर हुए करीब 1.5 अरब डॉलर के साइबर हमले का रिकॉर्ड भी पीछे छूट गया है। बाइनेंस की यह घटना अब तक की सबसे बड़ी क्रिप्टो चोरी मानी जा रही है।

कैसे दिया गया इतने बड़े साइबर हमले को अंजाम?

यह हमला केवल किसी सामान्य पासवर्ड चोरी या वॉलेट हैकिंग का मामला नहीं था। शुरुआती जांच के अनुसार, हमलावरों ने बाइनेंस के सिस्टम तक पहुंच बनाने के लिए बेहद सुनियोजित रणनीति अपनाई। TRM Labs के मुताबिक, चोरी से कम से कम 36 घंटे पहले हमलावरों ने अपनी तैयारी शुरू कर दी थी। उन्होंने पहले छोटे ट्रांजेक्शन के जरिए अपने ऑपरेशनल वॉलेट को सक्रिय किया। इसके बाद कोड तैयार कर अलग-अलग वॉलेट पर उसका परीक्षण किया गया। 

रिपोर्ट में Ethereum नेटवर्क पर EIP-7702 नाम की तकनीक के इस्तेमाल का भी जिक्र है। इसके जरिए हमलावरों ने बाइनेंस के एक हॉट वॉलेट को अपने नियंत्रण वाले कोड के माध्यम से संचालित करने का तरीका अपनाया। अन्य ब्लॉकचेन नेटवर्क पर भी बाइनेंस के वॉलेट से अनधिकृत ट्रांजेक्शन किए गए।बाइनेंस की शुरुआती जांच में संकेत मिला है कि किसी कर्मचारी के DevOps लैपटॉप से छेड़छाड़ कर हमलावरों ने एक सर्विस कंटेनर तक पहुंच बनाई होगी। इसी के जरिए अनधिकृत निकासी ट्रांजेक्शन भेजे जा सके। हालांकि, कंपनी ने कहा है कि अभी तक वॉलेट की प्राइवेट की लीक होने का कोई सबूत नहीं मिला है। हमले की पूरी तकनीकी प्रक्रिया की जांच जारी है।

कौन है TraderTraitor, जिस पर लगा है इतना बड़ा आरोप?

इस ऐतिहासिक साइबर हमले के पीछे उत्तर कोरिया के हैकर ग्रुप TraderTraitor का नाम सामने आया है। TRM Labs ने अपने ऑन-चेन और ऑफ-चेन विश्लेषण के आधार पर इस ग्रुप को हमले के लिए जिम्मेदार माना है। यह ग्रुप उत्तर कोरिया से जुड़े साइबर अपराधियों के नेटवर्क का हिस्सा माना जाता है और इसे Lazarus Group से जुड़े अभियानों के संदर्भ में भी देखा जाता है। इससे पहले फरवरी 2025 में Bybit क्रिप्टो एक्सचेंज पर करीब 1.5 अरब डॉलर की चोरी हुई थी।

अमेरिकी जांच एजेंसी FBI ने उस हमले के लिए भी उत्तर कोरिया के TraderTraitor ग्रुप को जिम्मेदार ठहराया था। विशेषज्ञों के मुताबिक, बाइनेंस हमले के तौर-तरीकों में पिछले उत्तर कोरिया समर्थित साइबर हमलों से समानताएं दिखाई देती हैं। हालांकि, बाइनेंस ने अपनी शुरुआती आधिकारिक जानकारी में किसी खास हैकर ग्रुप को हमले के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया है। TraderTraitor से जुड़ा निष्कर्ष फिलहाल TRM Labs का आकलन है।

बाइनेंस ने क्या कार्रवाई की? करीब 3 अरब डॉलर के एसेट फ्रीज

हमले की जानकारी सामने आते ही बाइनेंस ने सुरक्षा के लिहाज से प्रभावित नेटवर्क पर निकासी सेवाओं को अस्थायी रूप से रोक दिया। कंपनी ने ब्लॉकचेन पार्टनर्स, डिजिटल एसेट जारी करने वाली कंपनियों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ मिलकर चोरी किए गए फंड का पता लगाने और उन्हें फ्रीज करने की कोशिश शुरू की। 

TRM Labs के अनुसार, विभिन्न कंपनियों और ब्लॉकचेन नेटवर्क की मदद से करीब 2.7 अरब डॉलर के एसेट फ्रीज किए गए। बाइनेंस ने भी अपने अपडेट में लगभग 3 अरब डॉलर के प्रभावित एसेट फ्रीज होने की जानकारी दी। इस कार्रवाई में Tether, Circle, Ripple और अन्य कंपनियों ने भी सहयोग किया। Arbitrum नेटवर्क की सिक्योरिटी काउंसिल ने भी संदिग्ध वॉलेट से कुछ डिजिटल एसेट को हमलावरों की पहुंच से बाहर किया। हालांकि, फंड फ्रीज होने का मतलब यह नहीं है कि पूरी रकम तुरंत वापस मिल गई है। बाकी रकम की रिकवरी के लिए जांच और कानूनी प्रक्रिया जारी है।

यूजर्स के पैसे का क्या होगा? बाइनेंस ने दिया बड़ा भरोसा

इतने बड़े साइबर हमले के बाद बाइनेंस के करोड़ों यूजर्स के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि उनके अकाउंट में रखे पैसे सुरक्षित हैं या नहीं। बाइनेंस के सह-सीईओ रिचर्ड टेंग ने यूजर्स को भरोसा दिलाया कि उनके फंड सुरक्षित हैं और कंपनी नुकसान की भरपाई के लिए प्रतिबद्ध है। कंपनी ने इस संकट से निपटने के लिए 6.34 अरब डॉलर से अधिक की रकम अलग रखने की जानकारी दी है। इसमें करीब 5 अरब डॉलर के प्रभावित क्रिप्टो टोकन पहले से उपलब्ध हैं। बाकी रकम के बराबर डिजिटल एसेट जुटाने के लिए कंपनी बाजार और OTC मार्केट के जरिए खरीदारी कर रही है। बाइनेंस का कहना है कि यूजर्स के प्रभावित बैलेंस की भरपाई कंपनी के अपने संसाधनों और SAFU (Secure Asset Fund for Users) जैसे सुरक्षा फंड के जरिए की जाएगी।

निकासी सेवाएं कब होंगी शुरू?

साइबर हमले के बाद बाइनेंस ने प्रभावित नेटवर्क पर डिपॉजिट और विड्रॉल सेवाओं को अस्थायी रूप से रोक दिया था। कंपनी ने सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा और सिस्टम को दोबारा दुरुस्त करने की प्रक्रिया शुरू की। शुरुआती अपडेट में करीब 45 घंटे के भीतर निकासी सेवा बहाल करने की उम्मीद जताई गई थी।हालांकि, सेवा शुरू होने का समय सुरक्षा जांच और सिस्टम की तैयारियों पर निर्भर करेगा। बाद के अपडेट में कंपनी ने कहा कि डिपॉजिट सेवाएं सामान्य हो रही हैं, जबकि निकासी सेवाओं को दोबारा शुरू करने से पहले सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा जारी है।

क्रिप्टो बाजार में हड़कंप, बिटकॉइन और Ethereum पर दबाव

बाइनेंस पर हुए इस हमले का असर केवल एक्सचेंज तक सीमित नहीं रहा। खबर सामने आने के बाद क्रिप्टोकरेंसी बाजार में भी दबाव देखने को मिला। रिपोर्टों के मुताबिक, बिटकॉइन की कीमत में करीब 3 से 4 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई और यह 79 हजार डॉलर के नीचे पहुंच गया। Ethereum में भी गिरावट देखने को मिली। क्रिप्टो बाजार में निवेशकों की चिंता बढ़ने की एक बड़ी वजह यह है कि बाइनेंस जैसे बड़े एक्सचेंज की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हुए हैं। हालांकि, यह घटना किसी एक एक्सचेंज की सुरक्षा से जुड़ी है। इससे पूरी ब्लॉकचेन तकनीक या सभी क्रिप्टोकरेंसी नेटवर्क के हैक होने का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।

Bybit के 1.5 अरब डॉलर के हमले से चार गुना बड़ा मामला

क्रिप्टो इंडस्ट्री में फरवरी 2025 का Bybit हैक लंबे समय तक सबसे बड़ी चोरी के रूप में चर्चा में रहा था। उस हमले में करीब 1.5 अरब डॉलर की क्रिप्टोकरेंसी चोरी हुई थी। अब बाइनेंस से जुड़े 6.36 अरब डॉलर के ट्रांसफर ने उस रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया है। यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि डिजिटल करेंसी के बढ़ते कारोबार के साथ साइबर सुरक्षा की चुनौतियां भी लगातार गंभीर होती जा रही हैं। बाइनेंस ने नुकसान की भरपाई और प्रभावित फंड की रिकवरी का भरोसा दिया है। अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि जांच एजेंसियां कितनी रकम वापस हासिल कर पाती हैं और कंपनी अपनी निकासी सेवाओं को पूरी तरह कब बहाल करती है।