HighLights:
- कतरास में युवती किरण कुमारी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत
- परिजनों ने कथित अवैध गर्भपात और चिकित्सकीय लापरवाही के आरोप लगाए
- पुलिस ने सेंट्रल और न्यू रिलीफ डायग्नोस्टिक सेंटर को सील किया
- परिजनों ने दोषियों पर कार्रवाई और मृतका की बेटी के लिए मुआवजे की मांग की
धनबाद (Threesocieties.com Desk): जिले के कतरास थाना क्षेत्र में एक युवती की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद हड़कंप मच गया है। श्यामडीह चौक स्थित सेंट्रल डायग्नोस्टिक सेंटर में कथित अवैध गर्भपात के दौरान किरण कुमारी की मौत होने का आरोप उसके परिजनों ने लगाया है। घटना के बाद पुलिस ने सेंट्रल डायग्नोस्टिक सेंटर और सरायढेला स्थित न्यू रिलीफ डायग्नोस्टिक सेंटर को सील कर दिया है।

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मृतका के परिजनों ने कथित अवैध गर्भपात, चिकित्सकीय लापरवाही और पर्याप्त चिकित्सा सुविधाओं के अभाव को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मामले में दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई, संबंधित लोगों की गिरफ्तारी और मृतका की दो वर्षीय बेटी के भविष्य के लिए उचित मुआवजे की मांग की है।हालांकि, अवैध गर्भपात, भ्रूण के लिंग की जांच और चिकित्सकीय लापरवाही से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। मौत के वास्तविक कारणों का पता जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट से ही चल सकेगा।
सेंट्रल डायग्नोस्टिक सेंटर में क्या हुआ?
मृतका के पिता राजेंद्र केवट की ओर से कतरास थाना में दी गई लिखित शिकायत के अनुसार, उनकी बेटी किरण कुमारी को गर्भपात कराने के लिए श्यामडीह चौक स्थित सेंट्रल डायग्नोस्टिक सेंटर लाया गया था। शिकायत में सेंटर के संचालन से जुड़े सचिन कुमार केवट उर्फ पवन कुमार केवट का उल्लेख किया गया है। परिजनों का आरोप है कि सेंटर में कथित तौर पर गर्भपात की प्रक्रिया के दौरान किरण की हालत बिगड़ गई। शिकायत के मुताबिक, उसे अत्यधिक रक्तस्राव हुआ, जिसके बाद उसकी स्थिति गंभीर हो गई।आरोप है कि गंभीर हालत में किरण को पास के निजी संजीवनी अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद परिवार में मातम छा गया और परिजनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। पुलिस जांच में यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि सेंटर में किस प्रकार की चिकित्सकीय प्रक्रिया की जा रही थी, उसे करने के लिए आवश्यक अनुमति और योग्य चिकित्सा कर्मी उपलब्ध थे या नहीं तथा युवती की हालत बिगड़ने के बाद उसे किस तरह का उपचार दिया गया।
भ्रूण के लिंग की जांच का भी आरोप
मृतका के ममेरे भाई चंद्रिका कुमार ने आरोप लगाया है कि किरण की पहले से दो साल की एक बेटी थी। उनके दावे के अनुसार, दूसरी बार गर्भवती होने के बाद सरायढेला स्थित न्यू रिलीफ डायग्नोस्टिक सेंटर में भ्रूण के लिंग की जांच कराई गई थी। परिजनों का आरोप है कि गर्भ में लड़की होने की जानकारी मिलने के बाद कतरास के सेंट्रल डायग्नोस्टिक सेंटर में गर्भपात कराया गया। परिवार ने इस पूरे घटनाक्रम की जांच कर इसमें शामिल लोगों की भूमिका सामने लाने की मांग की है। गौरतलब है कि भारत में गर्भधारण से पहले या बाद में भ्रूण का लिंग निर्धारित करने और उसे बताने पर कानूनन प्रतिबंध है। हालांकि, इस मामले में भ्रूण के लिंग की जांच किए जाने और उसके आधार पर गर्भपात कराए जाने के आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
पुलिस ने दोनों डायग्नोस्टिक सेंटर किए सील
घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कतरास के सेंट्रल डायग्नोस्टिक सेंटर और धनबाद के सरायढेला स्थित न्यू रिलीफ डायग्नोस्टिक सेंटर को सील कर दिया। दोनों केंद्रों पर ताला लगाए जाने की जानकारी पुलिस की ओर से दी गई है। कतरास थाना प्रभारी प्रवीण कुमार के अनुसार, मामले की छानबीन की जा रही है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। बाघमारा के डीएसपी अजीत कुमार विमल ने भी मामले में कार्रवाई किए जाने की बात कही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मृतका के पति और सेंटर के संचालक को पुलिस हिरासत में रखे जाने की बात सामने आई है।
परिजनों की मांग—दोषियों पर कार्रवाई और बेटी के भविष्य की व्यवस्था
किरण की मौत के बाद परिजनों ने मामले में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है। परिवार का कहना है कि मृतका की दो वर्षीय बेटी के भविष्य को देखते हुए उचित मुआवजे की व्यवस्था की जानी चाहिए। परिजनों ने जांच में पारदर्शिता और जिम्मेदार लोगों की भूमिका सामने लाने पर जोर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि समय पर उचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाती, तो स्थिति अलग हो सकती थी। हालांकि, इस दावे की पुष्टि चिकित्सकीय साक्ष्यों और जांच रिपोर्ट के आधार पर ही की जा सकेगी।
जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट से खुलेगा मौत का राज
फिलहाल पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती युवती की मौत की वास्तविक परिस्थितियों का पता लगाना है। इसके लिए परिजनों की शिकायत, संबंधित केंद्रों के दस्तावेज, उपलब्ध चिकित्सकीय रिकॉर्ड, संबंधित व्यक्तियों के बयान और पोस्टमार्टम रिपोर्ट अहम हो सकते हैं। जांच में यह भी स्पष्ट करना होगा कि दोनों केंद्रों के बीच कोई संबंध था या नहीं और कथित घटनाक्रम में उनकी वास्तविक भूमिका क्या रही। किसी भी व्यक्ति को दोषी ठहराने से पहले आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों की कानूनी प्रक्रिया के तहत जांच जरूरी है।फिलहाल मामला जांच के अधीन है। पुलिस की जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही किरण कुमारी की मौत के कारणों तथा परिजनों की ओर से लगाए गए आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी।