धनबाद (Threesocieties.com Desk): कोयला कंपनी ईसीएल (Eastern Coalfields Limited) के मुगमा क्षेत्र से एक बेहद चिंताजनक मामला सामने आया है। कुमारधुबी कोलियरी की डिस्पेंसरी में पदस्थापित 31 वर्षीय महिला डॉक्टर कल्याणी मंडल ने कथित रूप से यूनियन नेताओं के दबाव और मानसिक तनाव के बाद दवा का ओवरडोज लेकर आत्महत्या का प्रयास किया।
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घटना शनिवार शाम की बताई जा रही है। डॉक्टर की हालत बिगड़ने के बाद उन्हें पहले ईसीएल के सांकतोड़िया अस्पताल ले जाया गया, जहां से प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें दुर्गापुर अस्पताल रेफर कर दिया गया। फिलहाल डॉक्टर की हालत में सुधार बताया जा रहा है।
यूनियन नेताओं पर दबाव बनाने का आरोप
जानकारी के अनुसार शनिवार को कुमारधुबी कोलियरी स्थित डिस्पेंसरी में एक यूनियन नेता अपने कुछ साथियों के साथ डॉक्टर कल्याणी मंडल से मिलने पहुंचे थे। बताया जाता है कि वे लोग किसी कागजात पर जबरन हस्ताक्षर करवाना चाह रहे थे, लेकिन डॉक्टर ने ऐसा करने से साफ इनकार कर दिया। आरोप है कि इससे नाराज होकर यूनियन नेताओं ने डॉक्टर के चेंबर का दरवाजा बाहर से बंद कर दिया, जिससे कुछ समय तक वह अंदर ही बंद रहीं।
घर पहुंचकर उठाया खौफनाक कदम
चेंबर से बाहर निकलने के बाद डॉक्टर सीधे गोपालपुरा कॉलोनी स्थित अपने आवास पहुंचीं। बताया जाता है कि उन्होंने अपनी मां और बेटी को घर से बाहर भेज दिया और फिर अंदर से दरवाजा बंद कर दवा का ओवरडोज खा लिया। काफी देर तक दरवाजा नहीं खुलने पर परिजनों और स्थानीय लोगों को शक हुआ। इसके बाद पूरे मामले की सूचना ईसीएल प्रबंधन को दी गई।
दरवाजा तोड़कर निकाला गया बाहर
मामले की जानकारी मिलते ही पीओ अमित कुमार मौके पर पहुंचे। ईसीएल के सुरक्षाकर्मियों की मदद से घर का दरवाजा तोड़ा गया, जिसके बाद डॉक्टर को बाहर निकालकर तुरंत सांकतोड़िया अस्पताल पहुंचाया गया। डॉक्टर की हालत गंभीर होने पर उन्हें बेहतर इलाज के लिए दुर्गापुर अस्पताल रेफर कर दिया गया।
जीएम ने कहा- जांच के बाद ही साफ होगी सच्चाई
इस पूरे मामले पर ईसीएल मुगमा एरिया के जीएम राजकिशोर सिंह ने कहा कि फिलहाल घटना के पीछे की वजह स्पष्ट नहीं है। उनके अनुसार यह घरेलू विवाद है या किसी प्रकार का दबाव, इसकी सही जानकारी डॉक्टर के स्वस्थ होकर लौटने के बाद ही सामने आ पाएगी।
इलाके में चर्चा का विषय बनी घटना
ईसीएल क्षेत्र में इस घटना के बाद डॉक्टरों की सुरक्षा और यूनियन दबाव को लेकर नई बहस छिड़ गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि आरोप सही साबित होते हैं तो यह मामला कार्यस्थल पर दबाव और उत्पीड़न से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन सकता है।