धनबाद: 15 साल बाद मटकुरिया गोलीकांड में आया फैसला, पूर्व मंत्री मन्नान मल्लिक समेत 28 को तीन साल की सजा
Matkuria Firing Case: धनबाद के चर्चित मटकुरिया गोलीकांड में 15 साल बाद एमपी-एमएलए कोर्ट ने पूर्व मंत्री मन्नान मल्लिक समेत 28 लोगों को तीन वर्ष की सजा और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। दो आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी हुआ।
HighLights:
- 15 वर्ष बाद मटकुरिया गोलीकांड मामले में अदालत ने सुनाया फैसला
- पूर्व विधायक एवं पूर्व मंत्री मन्नान मल्लिक समेत 28 दोषियों को तीन वर्ष की कैद
- प्रत्येक दोषी पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया
- अपील दायर करने के लिए अदालत ने 30 दिनों की औपबंधिक जमानत दी
- दो आरोपी अदालत में हाजिर नहीं हुए, गिरफ्तारी वारंट जारी
- 27 अप्रैल 2011 को अतिक्रमण हटाने के दौरान हुई थी हिंसक झड़प
- तत्कालीन एसपी आर.के. धान घायल हुए थे, चार लोगों की हुई थी मौत
धनबाद (Threesocieties.com Desk): धनबाद के बहुचर्चित मटकुरिया गोलीकांड मामले में आखिरकार 15 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद अदालत ने अपना फैसला सुना दिया। धनबाद एमपी-एमएलए कोर्ट के विशेष न्यायाधीश दुर्गेश चंद्र अवस्थी की अदालत ने मामले में पूर्व मंत्री एवं पूर्व विधायक मन्नान मल्लिक समेत 28 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए प्रत्येक को तीन वर्ष के कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। हालांकि अदालत ने सभी दोषियों को उच्च न्यायालय में अपील दाखिल करने के लिए 30 दिनों की औपबंधिक जमानत भी प्रदान की है।
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दो आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट
फैसला सुनाए जाने के दौरान विनोद सिंह उर्फ पप्पू सिंह और अजय कुमार राउत अदालत में उपस्थित नहीं हुए। इसे गंभीरता से लेते हुए अदालत ने दोनों के बंधपत्र रद्द कर दिए और उनकी गिरफ्तारी के लिए वारंट जारी कर दिया।
इन दोषियों को मिली सजा
अदालत ने पूर्व विधायक मन्नान मल्लिक, उनके पुत्र हुबान मल्लिक, शब्बीर आलम, धर्मवीर कुमार शर्मा, राजकुमार पासी, वीरेंद्र कुमार सिंह, कुमार अभिषेक, मोहम्मद अजीम, अजय कुमार सिंह, शगुन चौहान, बलदेव पांडेय, दिलचंद चौहान, मोहम्मद कलाम, भगवान साव, शक्ति कुमार, बाबर अली खान, ब्रजेश कुमार, वीरेंद्र पासवान, अरविंद कुमार सिंह, रंजीत कुमार, जीवन चंद्र घोष, मोहम्मद हलीम अंसारी, मदन महतो, नवनीत नीरज, हरिंदर शाही, दीपक कुमार पासवान, इजहार अहमद और बद्री रविदास को दोषी मानते हुए सजा सुनाई।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़े मन्नान मल्लिक
अदालत ने सभी आरोपियों को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया था। हालांकि इलाजरत होने के कारण पूर्व विधायक मन्नान मल्लिक और उनके पुत्र हुबान मल्लिक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत में शामिल हुए। उनके अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि दोनों स्वास्थ्य कारणों से न्यायालय में उपस्थित नहीं हो सके।
2011 में हुई थी हिंसक झड़प
यह मामला 27 अप्रैल 2011 का है, जब मटकुरिया इलाके में बीसीसीएल के आवासों को अतिक्रमण से मुक्त कराने पहुंची पुलिस टीम और आंदोलनकारियों के बीच हिंसक झड़प हो गई थी। घटना के दौरान तत्कालीन धनबाद एसपी आर.के. धान गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जबकि विकास सिंह समेत चार लोगों की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद तत्कालीन एसडीओ जॉर्ज कुमार के लिखित आवेदन पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
38 लोगों पर दायर हुआ था आरोप पत्र
पुलिस अनुसंधान के बाद कुल 38 लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया था। सुनवाई के दौरान पूर्व मंत्री बच्चा सिंह, ओपी लाल, पूर्व डिप्टी मेयर नीरज सिंह, उदय सिंह और अशोक यादव का निधन हो गया, जबकि दिलीप कुमार को भगोड़ा घोषित किए जाने के बाद उनके विरुद्ध मुकदमा बंद कर दिया गया।
38 गवाहों की गवाही के बाद आया फैसला
मामले में 2 मार्च 2022 को आरोप तय किए गए, जिसके बाद नियमित सुनवाई शुरू हुई। अपर लोक अभियोजक सत्येंद्र राय ने अदालत में 38 गवाहों की गवाही कराई। लगभग चार वर्षों तक चली सुनवाई और कुल 15 वर्षों की कानूनी प्रक्रिया के बाद अदालत ने शुक्रवार को अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाया।
इस फैसले के साथ धनबाद के सबसे चर्चित और संवेदनशील मामलों में से एक मटकुरिया गोलीकांड की निचली अदालत की सुनवाई पूरी हो गई। अब दोषियों के पास उच्च न्यायालय में अपील करने का कानूनी विकल्प उपलब्ध है।




