- धनबाद में जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र को लेकर बड़ा सुधार
धनबाद (Threesocieties.com Desk): अब जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए लोगों को महीनों तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा। धनबाद नगर निगम ने इस प्रक्रिया को समयबद्ध और पारदर्शी बनाने के लिए नई व्यवस्था लागू करने का फैसला लिया है। इसके तहत अब अस्पताल में हुए जन्म या मृत्यु के मामलों में 21 दिनों के भीतर प्रमाण पत्र जारी करना अनिवार्य होगा।
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आवेदन करते ही मिलेगी रसीद, ट्रैकिंग होगा आसान
नई व्यवस्था के तहत जैसे ही कोई व्यक्ति जन्म या मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए आवेदन करेगा, उसे तुरंत रसीद (Receiving) दी जाएगी। इस रसीद के जरिए आवेदक यह जान सकेगा कि उसका आवेदन किस स्तर पर लंबित है और प्रक्रिया कहां तक पहुंची है।
यह कदम न सिर्फ पारदर्शिता बढ़ाएगा, बल्कि अधिकारियों की जवाबदेही भी तय करेगा।
रिजेक्शन पर 7 दिन में देना होगा कारण
नगर निगम ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि यदि किसी आवेदन को अस्वीकार किया जाता है, तो संबंधित अधिकारी को सात दिनों के भीतर कारण बताना अनिवार्य होगा। इससे मनमानी पर रोक लगेगी और आवेदकों को अनावश्यक परेशानियों से राहत मिलेगी।
अलग-अलग स्तर पर होगा निपटारा
नई गाइडलाइन के अनुसार मामलों के निष्पादन के लिए स्पष्ट समय और स्तर तय किए गए हैं:
21 दिन के भीतर: नगर निगम स्तर पर प्रमाण पत्र जारी
21 दिन से 1 वर्ष तक: जिला सांख्यिकी पदाधिकारी स्तर पर निपटारा
1 वर्ष से अधिक पुराने मामले: एसडीओ स्तर से प्रमाण पत्र निर्गत
इस व्यवस्था से लंबित मामलों के समाधान में तेजी आने की उम्मीद है।
ट्रैकिंग सिस्टम से बढ़ेगी पारदर्शिता
नगर निगम अब एक डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम लागू करने की तैयारी में है। मेयर की सहमति मिलने के बाद इसे जल्द बोर्ड में पास कर लागू किया जाएगा। इस सिस्टम के जरिए लोग घर बैठे ही अपने आवेदन की स्थिति ऑनलाइन देख सकेंगे, जिससे सरकारी दफ्तरों के चक्कर कम होंगे।
क्या हैं इस नई व्यवस्था के बड़े फायदे?
तय समय सीमा में प्रमाण पत्र मिलने की गारंटी
आवेदन करते ही रसीद मिलने से पारदर्शिता
रिजेक्शन पर जवाबदेही तय
डिजिटल ट्रैकिंग से प्रक्रिया होगी आसान
लंबित मामलों के निपटारे में तेजी
आम लोगों को मिलेगी बड़ी राहत
अब तक जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए लोगों को लंबा इंतजार और कई बार दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते थे। नई व्यवस्था लागू होने के बाद यह प्रक्रिया तेज, पारदर्शी और जवाबदेह बन जाएगी। धनबाद नगर निगम का यह कदम आम जनता को राहत देने के साथ-साथ प्रशासनिक सुधार की दिशा में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।