20 जुलाई से 13 अगस्त तक चलेगा संसद का मानसून सत्र, राष्ट्रपति मुर्मू ने दी मंजूरी

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संसद के मानसून सत्र 2026 को मंजूरी दे दी है। 20 जुलाई से 13 अगस्त तक चलने वाले इस सत्र में राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर चर्चा होगी। बंगाल, असम और पुडुचेरी चुनाव के बाद यह पहला बड़ा संसदीय सत्र होगा।

20 जुलाई से 13 अगस्त तक चलेगा संसद का मानसून सत्र, राष्ट्रपति मुर्मू ने दी मंजूरी
20 जुलाई से शुरू होगा मानसून सत्र।

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  • राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संसद के मानसून सत्र 2026 को दी मंजूरी
  • 20 जुलाई से 13 अगस्त तक चलेगा संसद का सत्र
  • राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर दोनों सदनों में होगी चर्चा
  • संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया के जरिए दी जानकारी
  • तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) में बगावत का असर भी सत्र में दिख सकता है

नई दिल्ली (Threesocieties.com Desk): देश की राजनीति और नीतिगत फैसलों के लिहाज से महत्वपूर्ण माने जाने वाले संसद के आगामी मानसून सत्र 2026 की तारीखों का ऐलान हो गया है। भारत सरकार की सिफारिश पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संसद के दोनों सदनों की बैठक बुलाने को अपनी आधिकारिक मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही यह तय हो गया है कि संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई 2026 से शुरू होकर 13 अगस्त 2026 तक चलेगा।

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केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस संबंध में जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि सरकार की अनुशंसा पर राष्ट्रपति ने संसद के दोनों सदनों की बैठक बुलाने की स्वीकृति प्रदान कर दी है। करीब तीन सप्ताह से अधिक समय तक चलने वाले इस सत्र में केंद्र सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयकों और नीतिगत प्रस्तावों को सदन के समक्ष रख सकती है। वहीं विपक्ष भी महंगाई, बेरोजगारी, किसानों के मुद्दे, राष्ट्रीय सुरक्षा और विभिन्न राज्यों से जुड़े मामलों को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी में है।

राजनीतिक दृष्टि से भी यह मानसून सत्र बेहद अहम माना जा रहा है। पश्चिम बंगाल, असम और पुडुचेरी में हाल में हुए चुनावों में भारतीय जनता पार्टी के प्रदर्शन के बाद यह पहला बड़ा संसदीय सत्र होगा। ऐसे में चुनावी नतीजों का असर संसद के भीतर की राजनीति और बहसों में देखने को मिल सकता है। इसके अलावा तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) में हुई राजनीतिक उठापटक और बगावत का मुद्दा भी संसद में चर्चा का विषय बन सकता है। तृणमूल कांग्रेस के 20 और शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसदों की अलग समूह के तौर पर मान्यता की मांग पर अभी लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के फैसले का इंतजार किया जा रहा है। माना जा रहा है कि इस विषय पर भी सत्र के दौरान राजनीतिक हलचल तेज हो सकती है।

संसद के मानसून सत्र में राष्ट्रीय महत्व के विभिन्न मुद्दों पर व्यापक चर्चा, बहस और नीति निर्धारण की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। सरकार जहां अपनी विधायी प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने का प्रयास करेगी, वहीं विपक्ष जनता से जुड़े मुद्दों को जोरदार तरीके से उठाने की रणनीति पर काम कर रहा है। ऐसे में आगामी मानसून सत्र के दौरान संसद में कई अहम और तीखी बहसें देखने को मिल सकती हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी सत्र न केवल सरकार की नीतिगत दिशा तय करेगा, बल्कि विपक्ष की रणनीति और राजनीतिक समीकरणों की भी परीक्षा लेगा। इसलिए 20 जुलाई से शुरू होने वाला यह सत्र देश की राजनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।