HighLights:
- JDU को चुनौती: अनंत सिंह ने कहा कि पार्टी उनके खिलाफ कार्रवाई करे, उन्हें इसकी परवाह नहीं ह
- ललन सिंह पर तंज: केंद्रीय मंत्री को लेकर बोले- बिहार में 100 ललन सिंह हैं, किसके बारे में पूछ रहे हैं?
- पटना स्नातक सीट पर जेडीयू प्रत्याशी के खिलाफ,जन सुराज को समर्थन, कहा - टूट चुका है नीरज कुमार का राजनीतिक किला
- अनंत सिंह ने नीतीश कुमार को अपना गुरु बताया और उनके प्रति समर्थन जताया
पटना (Threesocieties.com Desk): बिहार विधान परिषद चुनाव के बीच जनता दल यूनाइटेड (JDU) के विधायक अनंत सिंह के बयानों ने राज्य की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में अपनी ही पार्टी के उम्मीदवार नीरज कुमार का विरोध कर जन सुराज पार्टी के प्रत्याशी डॉ. अनुज सिंह का समर्थन करने वाले अनंत सिंह ने अब जेडीयू नेतृत्व को खुली चुनौती दी है। उन्होंने कहा कि वह चाहते हैं कि पार्टी उनके खिलाफ कार्रवाई करे। अपनी बेबाक शैली में उन्होंने कहा, “न मुझे मरने का गम है, न जीने की खुशी।”
मोकामा विधायक ने केंद्रीय मंत्री और जेडीयू के वरिष्ठ नेता ललन सिंह को लेकर भी ऐसा बयान दिया, जिसने राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज कर दी है। जब उनसे पूछा गया कि ललन सिंह पटना स्नातक चुनाव में किसके साथ हैं, तो उन्होंने कहा, “बिहार में एकाध सौ ललन सिंह हैं, किसके बारे में पूछ रहे हैं?” केंद्रीय मंत्री ललन सिंह का नाम स्पष्ट किए जाने पर अनंत सिंह ने कहा कि वह उन्हें नहीं जानते हैं और वह दिल्ली में रहते हैं, जबकि वह पटना में रहते हैं।
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अनंत सिंह के इन बयानों को जेडीयू के भीतर जारी राजनीतिक खींचतान और पटना स्नातक सीट पर उम्मीदवार को लेकर असहमति के संदर्भ में देखा जा रहा है। खास बात यह है कि अनंत सिंह को लंबे समय से ललन सिंह का करीबी माना जाता रहा है। ऐसे में केंद्रीय मंत्री को लेकर उनका यह बयान कई सवाल खड़े कर रहा है।
‘JDU मुझ पर कार्रवाई करे’, अनंत सिंह का दो टूक जवाब
पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में जेडीयू उम्मीदवार नीरज कुमार का विरोध करने को लेकर अनंत सिंह से जब पार्टी की संभावित कार्रवाई के बारे में सवाल पूछा गया, तो उन्होंने बेबाक अंदाज में जवाब दिया। उन्होंने कहा कि वह चाहते हैं कि जेडीयू उनके खिलाफ कार्रवाई करे। अनंत सिंह ने कहा कि उन्हें न मरने का गम है और न जीने की खुशी। उनके इस बयान को पार्टी नेतृत्व के प्रति उनकी बेपरवाही और अपने राजनीतिक रुख पर कायम रहने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
दरअसल, अनंत सिंह पटना स्नातक सीट पर नीरज कुमार के खिलाफ लगातार बयान दे रहे हैं। वह जन सुराज के प्रत्याशी डॉ. अनुज सिंह के समर्थन में खुलकर सामने आए हैं। जेडीयू के उम्मीदवार का विरोध कर दूसरी पार्टी के प्रत्याशी का समर्थन करने से पार्टी के भीतर असहज स्थिति पैदा हो गई है। अनंत सिंह के तेवर से साफ है कि फिलहाल वह नीरज कुमार के समर्थन में आने को तैयार नहीं हैं। हालांकि, उनके खिलाफ पार्टी की ओर से क्या कदम उठाया जाएगा, इस पर अंतिम फैसला जेडीयू नेतृत्व को करना है।
‘बिहार में 100 ललन सिंह हैं’, केंद्रीय मंत्री को लेकर क्या बोले अनंत सिंह?
अनंत सिंह के बयान का सबसे अधिक चर्चा में रहने वाला हिस्सा केंद्रीय मंत्री ललन सिंह को लेकर उनकी टिप्पणी है। पत्रकारों ने उनसे पूछा कि पटना स्नातक सीट के चुनाव में ललन सिंह किसके साथ हैं। इस पर अनंत सिंह ने कहा कि बिहार में एकाध सौ ललन सिंह हैं, किसके बारे में पूछा जा रहा है।जब पत्रकारों ने स्पष्ट किया कि सवाल केंद्रीय मंत्री ललन सिंह को लेकर है, तो अनंत सिंह ने कहा कि वह उन्हें नहीं जानते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ललन सिंह दिल्ली में रहते हैं, जबकि वह पटना में रहते हैं।
यह बयान इसलिए भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि ललन सिंह जेडीयू के वरिष्ठ नेता और केंद्र सरकार में मंत्री हैं। अनंत सिंह और ललन सिंह के बीच पहले करीबी राजनीतिक संबंधों की चर्चा होती रही है। ऐसे में अनंत सिंह का इस तरह का जवाब देना राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।हालांकि, अनंत सिंह ने यह स्पष्ट नहीं किया कि केंद्रीय मंत्री को नहीं जानने की बात उन्होंने किस संदर्भ में कही। इसलिए उनके बयान के पीछे की मंशा को लेकर किसी निश्चित निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
पटना स्नातक सीट पर नीरज कुमार का विरोध क्यों कर रहे अनंत सिंह?
पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में जेडीयू ने नीरज कुमार को अपना उम्मीदवार बनाया है। दूसरी ओर, जन सुराज पार्टी की ओर से डॉ. अनुज सिंह चुनाव मैदान में हैं। इस चुनाव में अनंत सिंह ने जेडीयू उम्मीदवार के बजाय जन सुराज प्रत्याशी का समर्थन किया है। अनंत सिंह की नाराजगी की वजह के तौर पर विधानसभा चुनाव के दौरान नीरज कुमार द्वारा उनके विरोध की बात सामने आई है। जेडीयू के वरिष्ठ नेता ललन सिंह ने भी पहले इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए संकेत दिया था कि अनंत सिंह की नाराजगी की एक वजह पुराना राजनीतिक घटनाक्रम है।
अनंत सिंह का कहना रहा है कि जब विधानसभा चुनाव के दौरान नीरज कुमार ने उनका विरोध किया था, तब पार्टी की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई। ऐसे में अब पटना स्नातक सीट के चुनाव में नीरज कुमार का समर्थन करने का सवाल ही नहीं उठता। हालांकि, इस विवाद को लेकर दोनों पक्षों के सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि अनंत सिंह ने इस चुनाव में जेडीयू उम्मीदवार के समर्थन में खड़े होने के बजाय उनके विरोध का रास्ता चुना है।
जन सुराज के डॉ. अनुज सिंह की जीत का दावा
अनंत सिंह ने पटना स्नातक सीट पर जन सुराज के उम्मीदवार डॉ. अनुज सिंह की जीत का दावा किया है। वह लगातार कह रहे हैं कि नीरज कुमार का राजनीतिक प्रभाव पहले जैसा नहीं रह गया है और उनका किला टूट चुका है। अनंत सिंह का दावा है कि मतदाताओं ने उनके समर्थित उम्मीदवार के पक्ष में मतदान किया है। हालांकि, चुनाव में किस उम्मीदवार को कितना समर्थन मिला, इसका वास्तविक पता मतगणना के बाद ही चलेगा।
जब पत्रकारों ने उनसे पूछा कि अगर डॉ. अनुज सिंह जीत गए तो क्या वह रसगुल्ला बंटवाएंगे, तो उन्होंने कहा कि यह रसगुल्ला बांटने वाला चुनाव नहीं है। उन्होंने क्षेत्र में दूरी और तीन जिलों में फैले निर्वाचन क्षेत्र का हवाला देते हुए खर्च की बात भी कही। उनके इस जवाब से यह साफ है कि वह चुनाव को लेकर अपने समर्थन और दावे को गंभीरता से पेश कर रहे हैं। दूसरी ओर, नीरज कुमार की जीत या हार को लेकर फिलहाल किसी भी दावे को अंतिम परिणाम नहीं माना जा सकता।
ललन सिंह को अनंत सिंह से सुलह कराने की जिम्मेदारी मिली थी
पटना स्नातक सीट पर नीरज कुमार के विरोध में अनंत सिंह के खुलकर सामने आने के बाद जेडीयू के भीतर इस विवाद को सुलझाने की कोशिशों की चर्चा हुई थी। ललन सिंह को अनंत सिंह से बातचीत कर स्थिति संभालने की जिम्मेदारी दिए जाने की बात सामने आई थी। बताया गया कि ललन सिंह ने अनंत सिंह से बातचीत की थी। इसके बाद उन्होंने मीडिया से कहा था कि अनंत सिंह की नाराजगी की एक वजह विधानसभा चुनाव के दौरान नीरज कुमार का उनका विरोध करना है। उस समय पार्टी की प्रदेश इकाई की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई थी।
ललन सिंह ने अनंत सिंह को नीरज कुमार के खिलाफ सार्वजनिक बयानबाजी से बचने की सलाह भी दी थी। हालांकि, अनंत सिंह ने अपना विरोध जारी रखा और जन सुराज के उम्मीदवार के पक्ष में बयान देते रहे। इस घटनाक्रम से संकेत मिलता है कि विवाद केवल उम्मीदवार के समर्थन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे पुराने राजनीतिक समीकरण और आपसी नाराजगी भी अहम भूमिका निभा सकते हैं।
नीतीश कुमार को बताया अपना गुरु, उनके विरोध से किया इनकार
जेडीयू उम्मीदवार नीरज कुमार का विरोध करने और पार्टी नेतृत्व को कार्रवाई की चुनौती देने के बावजूद अनंत सिंह ने नीतीश कुमार के प्रति अपना रुख अलग रखा है। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को अपना गुरु बताया और कहा कि उन्होंने पूरे बिहार को बसाने का काम किया है। अनंत सिंह ने यह भी स्पष्ट किया कि वह नीतीश कुमार का विरोध नहीं कर सकते। इससे उनके राजनीतिक रुख का एक अलग पहलू सामने आता है। एक ओर वह जेडीयू के उम्मीदवार नीरज कुमार के खिलाफ हैं, वहीं दूसरी ओर नीतीश कुमार के प्रति समर्थन जता रहे हैं।
नीतीश कुमार और नीरज कुमार की मुलाकात को लेकर सवाल पूछे जाने पर भी अनंत सिंह ने इसे सामान्य राजनीतिक प्रक्रिया के रूप में देखा। वहीं, जेडीयू के वरिष्ठ नेता वशिष्ठ नारायण सिंह के बारे में सवाल पूछे जाने पर अनंत सिंह ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि वह जीवन के अंतिम दौर में हैं और वह उनके बारे में कुछ नहीं बोलना चाहते।
पुलिस कार्रवाई को लेकर भी जताई नाराजगी
मोकामा में चुनाव के दौरान हुई झड़प और पुलिस की कार्रवाई को लेकर भी अनंत सिंह ने नाराजगी जाहिर की। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके समर्थकों को परेशान किया और कुछ लोगों को हिरासत में लिया। उनके करीबी माने जाने वाले छोटू सिंह को हिरासत में लिए जाने को लेकर भी सवाल उठे।अनंत सिंह ने दावा किया कि उनके समर्थकों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई से जन सुराज के उम्मीदवार के पक्ष में मतदान प्रभावित नहीं होगा। उन्होंने यहां तक कहा कि ऐसी कार्रवाई के बावजूद उनके समर्थित उम्मीदवार को अधिक वोट मिल सकते हैं। हालांकि, पुलिस कार्रवाई को लेकर अनंत सिंह के आरोपों और उनके चुनावी प्रभाव की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है। चुनाव में मतदाताओं का वास्तविक रुख मतगणना के बाद ही स्पष्ट होगा।
बिहार की आठ एमएलसी सीटों पर चुनाव, अब मतगणना का इंतजार
बिहार विधान परिषद की आठ सीटों के चुनाव के बीच पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र पर राजनीतिक मुकाबला खासा चर्चा में रहा। यहां जेडीयू के नीरज कुमार, जन सुराज के डॉ. अनुज सिंह और आरजेडी के दिलीप कुमार के बीच मुकाबला बताया गया है। अनंत सिंह के बयानों ने इस मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है। उनकी ओर से डॉ. अनुज सिंह की जीत का दावा और नीरज कुमार के खिलाफ लगातार बयानबाजी ने जेडीयू की अंदरूनी राजनीति को भी चर्चा में ला दिया है।
अब सबकी नजरें 27 अक्टूबर को होने वाली मतगणना पर हैं। परिणाम सामने आने के बाद ही पता चलेगा कि पटना स्नातक सीट पर किस उम्मीदवार को जीत मिली और अनंत सिंह के दावे कितने सही साबित हुए। फिलहाल अनंत सिंह के बयानों ने बिहार की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। पार्टी कार्रवाई की चुनौती, केंद्रीय मंत्री ललन सिंह पर तंज और नीतीश कुमार के प्रति समर्थन- इन तीनों पहलुओं ने उनके राजनीतिक रुख को चर्चा का विषय बना दिया है।