Highlights:

  • दरभंगा स्नातक सीट पर बड़ा उलटफेर: राजद के अनिल कुमार झा ने भाजपा के सर्वेश कुमार सिंह को हराया
  • 4010 मतों से जीत: अंतिम परिणाम में अनिल झा ने जीत दर्ज की
  •  पहले बढ़त में थे सर्वेश: मतगणना के अधिकांश समय भाजपा प्रत्याशी चल रहे थे आगे
  • अंतिम चरण में बदला खेल: एलिमिनेशन राउंड में सर्वेश कुमार 1046 मतों से थे आगे 

दरभंगा (Threesocieties.com Desk): बिहार विधान परिषद की दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की मतगणना में अंतिम समय में बड़ा उलटफेर देखने को मिला। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रत्याशी अनिल कुमार झा ने भाजपा प्रत्याशी एवं मौजूदा विधान पार्षद सर्वेश कुमार सिंह को 4010 मतों से पराजित कर जीत दर्ज की। मतगणना के दौरान अधिकांश समय बढ़त बनाए रखने वाले सर्वेश कुमार सिंह अंतिम चरण में पिछड़ गए। दूसरी वरीयता के मतों की गिनती और हस्तांतरण ने चुनाव का पूरा समीकरण बदल दिया।

ADVERTISEMENT

दरभंगा स्नातक सीट के नतीजे ने एक बार फिर दिखाया कि वरीयता आधारित चुनाव में पहली वरीयता के मतों में बढ़त होने के बावजूद अंतिम जीत सुनिश्चित नहीं होती। चुनाव के अंतिम दौर में मतपत्रों पर दर्ज अगली वरीयताओं के आधार पर मतों का हस्तांतरण निर्णायक साबित हो सकता है।

अनिल झा को 25406 व सर्वेश कुमार को 21396 मत मिले

निर्वाची पदाधिकारी सह प्रमंडलीय आयुक्त हिमांशु कुमार राय ने गुरुवार की देर रात परिणाम की घोषणा की। इसके बाद निर्वाचित उम्मीदवार अनिल कुमार झा को प्रमाणपत्र सौंपा गया। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अनिल कुमार झा को कुल 25406 मत मिले, जबकि भाजपा प्रत्याशी सर्वेश कुमार को 21396 मत प्राप्त हुए। इस तरह दोनों उम्मीदवारों के बीच जीत का अंतर 4010 मतों का रहा।

शुरुआत से बढ़त बनाए हुए थे भाजपा के सर्वेश कुमार

दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की मतगणना के दौरान भाजपा प्रत्याशी सर्वेश कुमार सिंह अधिकांश समय अपने प्रतिद्वंद्वियों से आगे रहे। पहली वरीयता के मतों की गिनती पूरी होने के बाद भी उनकी बढ़त बनी हुई थी। हालांकि, निर्धारित जीत का कोटा पूरा नहीं होने के कारण मतगणना को एलिमिनेशन प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ाना पड़ा।इस प्रक्रिया में कम मत प्राप्त करने वाले प्रत्याशियों को क्रमशः मुकाबले से बाहर किया जाता है। उनके मतपत्रों पर दर्ज अगली वरीयता के अनुसार पात्र शेष प्रत्याशियों को मत हस्तांतरित किए जाते हैं। यही प्रक्रिया दरभंगा स्नातक सीट के चुनाव परिणाम में निर्णायक साबित हुई।

अंतिम तीन प्रत्याशियों के बीच मुकाबले में भी आगे थे सर्वेश

मतगणना के अंतिम दौर में जब मुकाबला तीन प्रत्याशियों के बीच सिमट गया, तब भी भाजपा के सर्वेश कुमार सिंह 1046 मतों से आगे चल रहे थे। इस स्थिति में उनकी जीत की संभावना मजबूत मानी जा रही थी। लेकिन इसके बाद हुई मतों की गणना ने पूरे चुनावी मुकाबले की दिशा बदल दी।जन सुराज पार्टी के प्रत्याशी मोहम्मद इम्तियाज के मतपत्रों पर दर्ज दूसरी वरीयता के मतों की गिनती और नियमानुसार हस्तांतरण के बाद राजद के अनिल कुमार झा आगे निकल गए। अंतिम परिणाम में उन्होंने सर्वेश कुमार सिंह को 4010 मतों से पराजित कर दिया।

दूसरी वरीयता के वोटों ने कैसे पलटी बाजी?

स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में मतदाता अपनी पहली पसंद के साथ अगली पसंद भी दर्ज कर सकते हैं। यदि कोई प्रत्याशी जीत के लिए निर्धारित कोटा हासिल नहीं करता, तो मतगणना नियमों के अनुसार आगे बढ़ती है। कम मत पाने वाले प्रत्याशियों के मतपत्रों पर दर्ज अगली वरीयता के मतों को पात्र प्रत्याशियों के खाते में स्थानांतरित किया जाता है।दरभंगा सीट पर भी यही प्रक्रिया महत्वपूर्ण रही। सर्वेश कुमार सिंह की शुरुआती बढ़त अंतिम परिणाम तक कायम नहीं रह सकी। मोहम्मद इम्तियाज के मतपत्रों पर दर्ज दूसरी वरीयता के मतों के हस्तांतरण के बाद अनिल झा ने बढ़त हासिल की और अंततः जीत दर्ज की। इस तरह चुनाव के अंतिम चरण में मतों के हस्तांतरण ने परिणाम बदल दिया। यह मुकाबला वरीयता आधारित मतगणना की अहमियत का उदाहरण बन गया।

2020 में निर्दलीय जीतकर विधान परिषद पहुंचे थे सर्वेश कुमार

सर्वेश कुमार सिंह का पिछला चुनावी सफर भी चर्चा में रहा था। वर्ष 2020 के चुनाव में उन्होंने भाजपा से अलग होकर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा था। उस चुनाव में उन्होंने जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के प्रत्याशी दिलीप चौधरी को हराकर पहली बार विधान परिषद में प्रवेश किया था।इस बार सर्वेश कुमार भाजपा के टिकट पर चुनाव मैदान में थे। मतगणना के अधिकांश समय बढ़त बनाए रखने के बावजूद उन्हें अंतिम चरण में हार का सामना करना पड़ा। दूसरी वरीयता के मतों के हस्तांतरण ने उनकी बढ़त को जीत में तब्दील नहीं होने दिया।

वरीयता आधारित चुनाव में अंतिम चरण का महत्व

दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का परिणाम बताता है कि वरीयता आधारित चुनाव में केवल पहली वरीयता के मतों की संख्या पर नजर रखना पर्याप्त नहीं है। जब कोई प्रत्याशी आवश्यक कोटा हासिल नहीं करता, तो एलिमिनेशन राउंड और मतों का हस्तांतरण चुनाव के परिणाम को प्रभावित कर सकता है। इस चुनाव में भी शुरुआती बढ़त और अंतिम नतीजे के बीच बड़ा अंतर देखने को मिला। अंततः राजद के अनिल कुमार झा ने भाजपा के सर्वेश कुमार सिंह को 4010 मतों से हराकर जीत दर्ज की।