धनबाद में अग्नि-भूधंसान प्रभावितों के हक में कोर्ट सख्त, CCL-DGMS समेत 20 को नोटिस

धनबाद के झरिया समेत अग्नि-भूधंसान प्रभावित क्षेत्रों के मानवाधिकार का मामला कोर्ट पहुंचा। BCCL-DGMS समेत 20+ को नोटिस जारी, वैज्ञानिक सर्वे और सुरक्षा उपायों की मांग।

धनबाद में अग्नि-भूधंसान प्रभावितों के हक में कोर्ट सख्त, CCL-DGMS समेत 20 को नोटिस
अग्नि-भूधंसान प्रभावितों के मानवाधिकार पर कोर्ट का बड़ा आदेश।

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  • अग्नि-भूधंसान प्रभावितों के मानवाधिकार का मामला धनबाद सिविल कोर्ट पहुंचा
  • BCCL, DGMS, जिला प्रशासन, पुलिस, CISF समेत 20 से अधिक को नोटिस
  • झरिया, कतरास, सिजुआ, लोदना समेत कई क्षेत्रों में खतरे का उल्लेख
  • भूमिगत आग, जमीन धंसने और दरारों की स्वतंत्र जांच की मांग

धनबाद (Threesocieties.com Desk): झरिया कोयलांचल के अग्नि प्रभावित और भू-धंसाव वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के मानवाधिकारों की सुरक्षा का मामला अब धनबाद सिविल कोर्ट पहुंच गया है। धनबाद सिविल कोर्ट के अधिवक्ता दीप नारायण ने मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम के तहत अदालत में मुकदमा दायर कर प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों के जीवन, संपत्ति, मकान और आजीविका की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।

मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने बीसीसीएल, जिला प्रशासन, डीजीएमएस, पुलिस, सीआईएसएफ, धनबाद नगर निगम और पर्यावरण विभाग समेत 20 से अधिक संबंधित अधिकारियों एवं संस्थानों को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

झरिया से कतरास तक जमीन धंसने और भूमिगत आग का खतरा

अदालत में दायर आवेदन में कहा गया है कि झरिया, कतरास, सिजुआ, कुस्तौर, बस्ताकोला, लोदना, पुटकी-बलिहारी, गोविंदपुर, बरोरा और मुनीडीह समेत कई कोयला खनन एवं भू-धंसाव प्रभावित क्षेत्रों में लोगों की जान-माल पर लगातार खतरा बना हुआ है।आवेदन के अनुसार, इन इलाकों में अचानक जमीन धंसने, जमीन में दरार पड़ने, भूमिगत आग, गैस उत्सर्जन और सतह धंसने जैसी घटनाओं का खतरा बना रहता है। इससे प्रभावित बस्तियों में रहने वाले लोगों के बीच भय का माहौल है। याचिका में कहा गया है कि ऐसी परिस्थितियों में लोगों के जीवन के अधिकार, सुरक्षित आवास, आजीविका और संपत्ति के अधिकार की प्रभावी सुरक्षा जरूरी है।

अवैध कोयला खनन और अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग

अधिवक्ता दीप नारायण ने अदालत से प्रभावित क्षेत्रों में स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है। इसमें यह पता लगाने का आग्रह किया गया है कि क्या कहीं अवैध कोयला उत्खनन, अनधिकृत प्रवेश या असुरक्षित खनन गतिविधियां अब भी जारी हैं। साथ ही यह भी जांच कराने की मांग की गई है कि खतरनाक क्षेत्रों में ऐसी गतिविधियों को रोकने में संबंधित विभागों की ओर से किसी प्रकार की चूक, लापरवाही या मिलीभगत हुई है या नहीं। आवेदन में संबंधित विभागों और अधिकारियों से रिकॉर्ड मंगाकर उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जिम्मेदारी निर्धारित करने की मांग की गई है।

BCCL-DGMS और प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट की मांग

अदालत के समक्ष दायर आवेदन में केंद्र और राज्य सरकार, BCCL, DGMS, जिला प्रशासन, नगर निगम, पुलिस, CISF और पर्यावरण से जुड़े प्राधिकरणों से विस्तृत रिपोर्ट मंगाने का आग्रह किया गया है। याचिका में यह भी मांग की गई है कि प्रभावित इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति, खनन समाप्त होने के बाद किए गए कार्यों और पुनर्वास से संबंधित व्यवस्थाओं की भी समीक्षा की जाए।

वैज्ञानिक सर्वे और GIS आधारित Hazard Map बनाने की मांग

अधिवक्ता ने अग्नि एवं भू-धंसाव प्रभावित क्षेत्रों के वैज्ञानिक सर्वेक्षण के लिए स्वतंत्र बहु-विषयक विशेषज्ञ समिति गठित करने की मांग की है। इस समिति में खनन इंजीनियरिंग, भूविज्ञान, भू-तकनीकी इंजीनियरिंग, खान सुरक्षा, पर्यावरण, आपदा प्रबंधन और पुनर्वास विशेषज्ञों को शामिल करने का सुझाव दिया गया है। याचिका में धनबाद के भूमि-धंसाव प्रवण, अग्नि प्रभावित और अन्य खतरनाक क्षेत्रों का वैज्ञानिक सर्वेक्षण एवं मानचित्रण कराने तथा GIS आधारित सार्वजनिक Hazard Map तैयार करने की मांग की गई है।इसमें सुरक्षित, संवेदनशील और अत्यधिक खतरनाक क्षेत्रों को अलग-अलग वर्गीकृत करने का प्रस्ताव है, ताकि खतरे वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा के लिए समय रहते कार्रवाई की जा सके।

दरार और भूमिगत आग वाले इलाकों में तत्काल निरीक्षण की मांग

आवेदन में कहा गया है कि जिन क्षेत्रों में जमीन में दरार, भूमिगत आग, गैस उत्सर्जन, भूमि धंसाव या अन्य खतरनाक संकेत दिखाई दें, वहां तत्काल विशेषज्ञों से निरीक्षण कराया जाना चाहिए। याचिका में यह भी मांग की गई है कि किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार किए बिना, जहां गंभीर खतरा दिखाई दे वहां प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने की कार्रवाई की जाए।

पुरानी खदानों की बैकफिलिंग और स्थिरीकरण की जांच

खनन समाप्त हो चुके क्षेत्रों का स्वतंत्र ऑडिट कराने की मांग भी की गई है। इसमें यह जांचने का आग्रह किया गया है कि पुरानी खदानों में वैज्ञानिक तरीके से बैकफिलिंग, स्थिरीकरण और पुनर्स्थापन का काम निर्धारित मानकों के अनुरूप हुआ है या नहीं। यदि किसी क्षेत्र में निर्धारित सुरक्षा एवं पुनर्स्थापन उपायों का पालन नहीं हुआ है तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों और संस्थाओं की जवाबदेही तय करने की मांग की गई है।

खतरनाक क्षेत्रों में बैरिकेडिंग और 24 घंटे निगरानी की मांग

याचिका में खतरनाक स्थानों पर चेतावनी बोर्ड, बाड़बंदी, बैरिकेडिंग और पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था कराने की मांग की गई है। इसके अलावा संवेदनशील स्थानों पर चौबीसों घंटे निगरानी की व्यवस्था करने का भी आग्रह किया गया है, ताकि लोग अनजाने में खतरनाक क्षेत्रों में प्रवेश न कर सकें और किसी दुर्घटना को रोका जा सके।

आसन्न खतरे वाले परिवारों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने की मांग

अधिवक्ता ने BCCL, DGMS और जिला प्रशासन को संयुक्त रूप से ऐसे आबादी वाले क्षेत्रों की पहचान करने का निर्देश देने का आग्रह किया है जहां तत्काल खतरा मौजूद है। ऐसे स्थानों पर रहने वाले लोगों को खतरे के बारे में स्पष्ट जानकारी देने, जरूरत पड़ने पर समय रहते सुरक्षित स्थान पर विस्थापित करने और प्रभावित परिवारों को अस्थायी आवास उपलब्ध कराने की मांग की गई है। साथ ही विस्थापित परिवारों के लिए भोजन, चिकित्सा सुविधा और अन्य मूलभूत जरूरतों की व्यवस्था सुनिश्चित करने का भी आग्रह किया गया है।

मानवाधिकार और सुरक्षा को लेकर महत्वपूर्ण मामला

यह मामला केवल भू-धंसाव और भूमिगत आग से सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि अग्नि एवं भू-धंसाव प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के जीवन, आवास, आजीविका और मानवाधिकारों की सुरक्षा से जुड़ा है।अदालत द्वारा BCCL, DGMS, जिला प्रशासन और अन्य संबंधित विभागों को नोटिस जारी किए जाने के बाद अब मामले में संबंधित पक्षों के जवाब और उनके द्वारा उठाए गए सुरक्षा एवं पुनर्वास उपायों पर नजर रहेगी।