HighLights:
- कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सहसंयोजक सौरव दास और आशुतोष रांका को जमानत मिली
- दोनों नेता सात दिनों तक तिहाड़ जेल में बंद रहने के बाद रिहा हुए
- लिखित माफीनामे, शपथ पत्र और जमानत संबंधी दस्तावेजों की प्रक्रिया के बाद रिहाई का आदेश जारी हुआ
नई दिल्ली (Threesocieties.com Desk): कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सहसंयोजक सौरव दास और आशुतोष रांका को आखिरकार जमानत मिल गई है। सात दिनों से तिहाड़ जेल में बंद दोनों नेताओं को बुधवार को स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) कोर्ट से राहत मिली। जमानतदारों के दस्तावेज स्वीकार किए जाने और आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद उनकी रिहाई का आदेश जारी किया गया। जेल से बाहर आने के बाद सौरव दास ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सत्य की जीत हुई है।
दोनों नेताओं की जमानत पर सुनवाई तीसरी बार हुई। इससे पहले उनकी रिहाई का रास्ता जमानतदारों के दस्तावेजों से जुड़ी आपत्तियों के कारण नहीं खुल पाया था। इस बार नए जमानतदारों और दस्तावेजों को स्वीकार किए जाने के बाद रिहाई की प्रक्रिया आगे बढ़ी। दोनों नेताओं को लिखित माफीनामा और शपथ पत्र देने के बाद जमानत पर छोड़ा गया।यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया, जब इससे कुछ घंटे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने उनकी हिरासत बढ़ाए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर तत्काल हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था। हाईकोर्ट ने उन्हें SEM कोर्ट की प्रक्रिया का इंतजार करने और कानून के अनुसार उचित कानूनी विकल्प अपनाने की बात कही थी।
तीसरी पेशी में मिली जमानत, सात दिन बाद जेल से बाहर आए दोनों नेता
सौरव दास और आशुतोष रांका की जमानत का मामला लगातार चर्चा में था। दोनों नेता 14 अक्टूबर को गिरफ्तारी के बाद से हिरासत में थे। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, पहले उनकी न्यायिक हिरासत पांच दिनों के लिए बढ़ाई गई और इसके बाद दो दिनों का अतिरिक्त विस्तार हुआ। इस तरह दोनों नेताओं को कुल सात दिनों तक जेल में रहना पड़ा।मंगलवार को हुई पिछली सुनवाई में जमानतदारों से संबंधित दस्तावेजों में आपत्तियां सामने आई थीं। इसके बाद दोनों की रिहाई नहीं हो सकी और उन्हें दो दिनों के लिए हिरासत में रखने का आदेश दिया गया था।
बुधवार को दोनों नेताओं को कड़ी सुरक्षा के बीच मंदिर मार्ग स्थित स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया गया। जमानत की प्रक्रिया पूरी करने के लिए नए जमानतदारों के दस्तावेज भी प्रस्तुत किए गए। करीब डेढ़ घंटे तक चली सुनवाई के दौरान जमानत से जुड़े पहलुओं पर विचार किया गया। इसके बाद अदालत ने फैसला सुनाया और दोनों नेताओं की रिहाई का रास्ता साफ हो गया।
जमानतदारों के दस्तावेज स्वीकार होने के बाद रिहाई का आदेश
सौरव दास और आशुतोष रांका की रिहाई में जमानतदारों के दस्तावेज अहम मुद्दा बन गए थे। बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली पुलिस के स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट और एसीपी रितु राज ने दोनों की ओर से पेश किए गए नए जमानतदारों और दस्तावेजों को स्वीकार करने के बाद रिहाई के आदेश पर हस्ताक्षर किए।इससे पहले 19 अक्टूबर को SEM कोर्ट ने जमानतदारों के आधार कार्ड की तस्वीरों में विसंगतियों और माता-पिता के विवरण से संबंधित कमियों का हवाला देते हुए रिहाई की प्रक्रिया रोक दी थी। इसके साथ ही दोनों नेताओं की हिरासत दो दिनों के लिए बढ़ा दी गई थी।
जमानत की प्रक्रिया में दस्तावेजों की स्वीकार्यता महत्वपूर्ण होती है। इस मामले में भी जमानत मिलने के बाद आवश्यक औपचारिकताओं को पूरा करना दोनों नेताओं की रिहाई के लिए जरूरी रहा। नए दस्तावेज स्वीकार किए जाने के बाद दोनों को जमानत पर रिहा करने का आदेश जारी किया गया। हालांकि, लिखित माफीनामे और शपथ पत्र की सटीक शर्तों तथा उनके कानूनी प्रभाव के बारे में विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है।
जेल से बाहर आते ही सौरव दास बोले- सत्य की जीत हुई
रिहाई के बाद सौरव दास ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि सत्य की जीत हुई है। सात दिनों तक जेल में रहने के बाद दोनों नेताओं की रिहाई से उनके समर्थकों को राहत मिली।इस मामले में जमानत की प्रक्रिया लगातार कानूनी और प्रक्रियागत मुद्दों के कारण चर्चा में रही। पहली दो पेशियों में राहत नहीं मिलने के बाद तीसरी पेशी में जमानत मिलना दोनों नेताओं के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम रहा। रिहाई के बाद सौरव दास की टिप्पणी ने मामले को राजनीतिक और सार्वजनिक चर्चा के केंद्र में बनाए रखा। हालांकि, जमानत पर रिहाई को किसी मामले में अंतिम न्यायिक निष्कर्ष या आरोपों से पूर्ण मुक्ति के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इसका अर्थ है कि अदालत ने संबंधित प्रक्रिया के तहत उन्हें हिरासत से बाहर आने की अनुमति दी है।
दिल्ली हाईकोर्ट ने तत्काल हस्तक्षेप से किया था इनकार
सौरव दास और आशुतोष रांका की रिहाई से पहले दिल्ली हाईकोर्ट में भी मामला पहुंचा था। दोनों नेताओं की हिरासत बढ़ाए जाने के खिलाफ याचिका पर जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की पीठ के समक्ष सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अभीक चिमनी ने दलीलें पेश कीं। अदालत को बताया गया कि सौरव दास की उम्र 27 वर्ष और आशुतोष रांका की उम्र 32 वर्ष है। इसी दौरान पीठ ने जेन-जी को लेकर टिप्पणी की। जस्टिस प्रसाद ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि इन उम्र के लोगों को जेन-जी की श्रेणी में नहीं रखा जाएगा।
अदालत में जेन-जी की आयु सीमा को लेकर भी चर्चा हुई। हाईकोर्ट की यह टिप्पणी सुनवाई के दौरान चर्चा का विषय बनी। हालांकि, याचिका पर मुख्य कानूनी मुद्दा दोनों नेताओं की हिरासत बढ़ाए जाने और संबंधित प्रक्रिया में न्यायिक हस्तक्षेप का था।हाईकोर्ट ने SEM कोर्ट के समक्ष लंबित प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। अदालत ने याचिकाकर्ताओं को संबंधित आदेश की प्रतीक्षा करने और कानून के अनुसार उचित अपीलीय मंच का सहारा लेने का सुझाव दिया। इसके बाद याचिकाकर्ताओं ने अपनी अर्जी वापस ले ली।
CJP संस्थापक अभिजीत दीपके की सोशल मीडिया पोस्ट भी चर्चा में
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान जेन-जी को लेकर हुई टिप्पणी के बाद कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक तस्वीर साझा करते हुए व्यंग्यात्मक टिप्पणी की कि देश में केवल एक ही व्यक्ति वास्तव में जेन-जी की योग्यता रखता है। उनकी इस पोस्ट को अदालत में हुई टिप्पणी के संदर्भ में देखा गया। सोशल मीडिया पर राजनीतिक टिप्पणियां अक्सर किसी कानूनी मामले को लेकर सार्वजनिक बहस को और तेज कर देती हैं। हालांकि, इस मामले में दोनों नेताओं की जमानत और रिहाई का फैसला संबंधित अदालत की प्रक्रिया के तहत हुआ।
क्या था पूरा मामला?
कॉकरोच जनता पार्टी के सहसंयोजक सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी के बाद से ही उनकी हिरासत और जमानत का मामला चर्चा में रहा। 14 अक्टूबर को गिरफ्तारी के बाद दोनों को न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। इसके बाद हिरासत की अवधि बढ़ाई गई और जमानत की प्रक्रिया के दौरान दस्तावेजों को लेकर आपत्तियां सामने आईं।19 अक्टूबर को जमानतदारों के दस्तावेजों में कथित विसंगतियों के कारण उनकी रिहाई नहीं हो सकी। इसके बाद दोनों नेताओं की ओर से कानूनी विकल्प अपनाए गए और दिल्ली हाईकोर्ट में भी याचिका दायर की गई।
हाईकोर्ट से तत्काल राहत नहीं मिलने के बाद SEM कोर्ट में जमानत की प्रक्रिया पर सबकी निगाहें टिकी थीं। तीसरी पेशी में नए जमानतदारों और दस्तावेजों को स्वीकार किए जाने के बाद दोनों नेताओं को जमानत मिल गई। इस तरह सात दिनों तक जेल में रहने के बाद सौरव दास और आशुतोष रांका बाहर आ सके।