मुन्नार में कोयला नीति पर मंथन, सांसद कालीचरण सिंह की अहम बैठक में भागीदारी

मुन्नार में संसदीय स्थायी समिति, कोयला, खान एवं इस्पात की महत्वपूर्ण बैठक में सांसद कालीचरण सिंह ने सहभागिता की। CIL, ECL, NCL, WCL के कामकाज, कोयला उत्पादन बढ़ाने और कोल गैसीफिकेशन योजना पर चर्चा हुई।

मुन्नार में कोयला नीति पर मंथन, सांसद कालीचरण सिंह की अहम बैठक में भागीदारी
कोयला उत्पादन बढ़ेगा, गैसीफिकेशन पर जोर; मुन्नार में संसदीय समिति का मंथन।

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     HighLights:

  • मुन्नार में संसदीय स्थायी समिति, कोयला, खान एवं इस्पात की महत्वपूर्ण बैठक 
  • चतरा सांसद कालीचरण सिंह ने बैठक में सहभागिता की
  • Coal India Limited (CIL) और उसकी अनुषंगी कंपनियों ECL, NCL एवं WCL के कार्यों की समीक्षा हुई
  • देश की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों के मद्देनजर कोयला उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर चर्चा हुई

मुन्नार (Threesocieties.com Desk): संसदीय स्थायी समिति, कोयला, खान एवं इस्पात की महत्वपूर्ण बैठक मुन्नार में आयोजित हुई। बैठक में चतरा लोकसभा क्षेत्र के सांसद कालीचरण सिंह ने सहभागिता की। बैठक के दौरान देश की ऊर्जा जरूरतों, कोयला उत्पादन बढ़ाने, खनन क्षेत्र में परिचालन दक्षता मजबूत करने और भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।

सांसद कालीचरण सिंह को 18वीं लोकसभा में कोयला, खान एवं इस्पात संबंधी संसदीय समिति का सदस्य बनाया गया है। वे 26 सितंबर 2024 से इस समिति से जुड़े हैं।

CIL और अनुषंगी कंपनियों के कामकाज की समीक्षा

बैठक में कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) तथा उसकी प्रमुख अनुषंगी कंपनियों ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ECL), नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (NCL) और वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (WCL) के कामकाज की विस्तृत समीक्षा की गई।चर्चा का प्रमुख केंद्र देश में बढ़ती ऊर्जा और संसाधन आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए कोयला उत्पादन की क्षमता में वृद्धि करना रहा। इसके साथ ही खनन कार्यों में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल, परिचालन दक्षता बढ़ाने और उत्पादन प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने पर भी विचार किया गया।

कोल इंडिया देश की ऊर्जा व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उसकी विभिन्न अनुषंगी कंपनियां देश के अलग-अलग कोयला क्षेत्रों में उत्पादन और आपूर्ति का काम करती हैं। कंपनी के हालिया आंकड़ों के अनुसार ECL, NCL, WCL समेत विभिन्न अनुषंगी कंपनियां देश की कोयला जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।

उत्पादन क्षमता बढ़ाने और दक्षता पर जोर

बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि देश की बढ़ती ऊर्जा मांग को देखते हुए कोयला उत्पादन की क्षमता को लगातार मजबूत करना जरूरी है। इसके लिए मौजूदा खदानों में उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ आधुनिक तकनीक और बेहतर प्रबंधन प्रणाली को अपनाने पर भी जोर दिया गया। परिचालन दक्षता में सुधार के साथ सुरक्षा, पर्यावरणीय प्रबंधन और संसाधनों के जिम्मेदार इस्तेमाल को भी महत्वपूर्ण माना गया। कोल इंडिया की विभिन्न परियोजनाओं में तकनीक आधारित निगरानी, पर्यावरण प्रबंधन और खनन क्षेत्रों के पुनर्वास जैसे कार्य पहले से किए जा रहे हैं।

कोल गैसीफिकेशन योजना पर भी हुई चर्चा

बैठक का एक महत्वपूर्ण विषय कोल गैसीफिकेशन योजना रहा। कोयला मंत्रालय के साथ-साथ MCL, SECL और CCL से जुड़े विषयों पर भी विचार-विमर्श किया गया। कोल गैसीफिकेशन को कोयले के पारंपरिक उपयोग से आगे बढ़कर तकनीक आधारित और अधिक विविध उपयोग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जाता है। इसके माध्यम से कोयले से गैस तथा विभिन्न औद्योगिक उपयोगों के लिए आवश्यक उत्पाद तैयार करने की संभावनाओं को बढ़ावा दिया जा सकता है। ऐसे में कोल गैसीफिकेशन को देश की ऊर्जा सुरक्षा, औद्योगिक विकास और आयात निर्भरता कम करने की व्यापक रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।

स्वच्छ और आधुनिक तकनीक पर जोर

बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ कोयला क्षेत्र को आधुनिक और तकनीक आधारित बनाया जाए। खनन गतिविधियों में नई तकनीकों का इस्तेमाल उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ सुरक्षा और पर्यावरणीय प्रभावों को बेहतर ढंग से प्रबंधित करने में भी मददगार हो सकता है। कोल इंडिया की ओर से खदानों में डिजिटल निगरानी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित वीडियो एनालिटिक्स, पर्यावरणीय निगरानी और माइन क्लोजर जैसी व्यवस्थाओं पर काम किया जा रहा है।

आत्मनिर्भर भारत और ऊर्जा सुरक्षा पर फोकस

बैठक में देश की ऊर्जा आवश्यकताओं को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए तकनीकी नवाचार, जिम्मेदार संसाधन प्रबंधन और दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में निरंतर प्रयास की जरूरत पर बल दिया गया। सांसद कालीचरण सिंह की इस समिति में भागीदारी चतरा जैसे कोयला उत्पादक क्षेत्र के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जा सकती है। चतरा लोकसभा क्षेत्र में CCL की कई महत्वपूर्ण कोयला परियोजनाएं हैं। इनमें आम्रपाली, मगध, संघमित्रा और पिपरवार क्षेत्र की परियोजनाएं प्रमुख हैं। कोयला क्षेत्र से जुड़े स्थानीय मुद्दों, उत्पादन, विस्थापन, पुनर्वास, रोजगार और क्षेत्रीय विकास जैसे विषयों को संसदीय स्तर पर प्रभावी ढंग से रखने के लिए समिति की भूमिका महत्वपूर्ण है।

ऊर्जा जरूरतों के साथ संतुलित विकास की दिशा

मुन्नार की इस बैठक में हुई चर्चा से यह संकेत मिलता है कि देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए कोयला उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ तकनीक, दक्षता और स्वच्छ ऊर्जा उपयोग पर भी समान रूप से ध्यान दिया जा रहा है। कोयला क्षेत्र में उत्पादन बढ़ाने, आधुनिक तकनीकों को अपनाने, गैसीफिकेशन को प्रोत्साहित करने और संसाधनों के जिम्मेदार इस्तेमाल के जरिए भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ने पर जोर दिया गया।

सांसद कालीचरण सिंह ने बैठक में सहभागिता को महत्वपूर्ण बताते हुए ऊर्जा सुरक्षा, आत्मनिर्भरता और सुरक्षित भविष्य के संकल्प के साथ निरंतर प्रयास की प्रतिबद्धता व्यक्त की। ऊर्जावान भारत, आत्मनिर्भर भारत और सुरक्षित भविष्य के लक्ष्य के साथ कोयला क्षेत्र में तकनीकी नवाचार और जिम्मेदार संसाधन प्रबंधन को आगे बढ़ाने पर बैठक में विशेष जोर रहा।