नेपाल में बाढ़ की तबाही: मौत का आंकड़ा 1000 पार, 4 हजार लापता; चितवन में मिले 321 शव
नेपाल में विनाशकारी बाढ़ से मौत का आंकड़ा 987 पहुंच गया है और करीब 4 हजार लोग लापता हैं। चितवन में 321 शव मिले, 199 अज्ञात शव DNA सैंपल सुरक्षित कर दफनाए गए। पढ़ें Nepal Flood Live Updates।
HighLights:
- नेपाल में विनाशकारी बाढ़ से अब तक 987 लोगों की मौत, करीब 4 हजार अब भी लापता
- 26 अगस्त को भोटेकोशी नदी में अचानक आई बाढ़ ने मचाई भारी तबाही
- सात जिलों में नदियों का जलस्तर बढ़ने के बाद फिर बाढ़ का अलर्ट
- 11,800 से ज्यादा लोगों को अब तक सुरक्षित निकाला गया
काठमांडू (Threesocieties.com Desk): नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के बाद तबाही का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। भोटेकोशी नदी में अचानक आए तेज बहाव ने नेपाल-तिब्बत सीमा से लेकर निचले इलाकों तक भारी तबाही मचाई। बाढ़ के पानी और मलबे में बहकर सैकड़ों किलोमीटर दूर तक शव पहुंच रहे हैं। ताजा सरकारी आंकड़ों के मुताबिक नेपाल में अब तक 987 शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि करीब 4,000 लोग अभी भी लापता हैं। चितवन में सबसे ज्यादा 321 शव मिले हैं।

नेपाल में राहत और बचाव अभियान के बीच कई इलाकों में नदियों का जलस्तर फिर बढ़ने लगा है। प्रशासन ने रसुवा, नुवाकोट, धादिंग, गोरखा, तनहूं, नवलपरासी और चितवन समेत सात जिलों में नदी किनारे रहने वाले लोगों के लिए अलर्ट जारी किया है।
26 अगस्त को आई थी विनाशकारी बाढ़
26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास अचानक बर्फ, चट्टान और मलबे के खिसकने के बाद भोटेकोशी नदी में भारी मात्रा में पानी और मलबा आया। देखते ही देखते बाढ़ ने रसुवा जिले के कई इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया। बाढ़ का पानी और मलबा त्रिशूली नदी के रास्ते निचले इलाकों तक पहुंचा। इससे सड़कें, पुल, घर, बिजली परियोजनाएं और दूसरे बुनियादी ढांचे बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुए।नदी का तेज बहाव शवों को काफी दूर तक बहाकर ले गया। यही वजह है कि आपदा के केंद्र से सैकड़ों किलोमीटर दूर चितवन और नवलपरासी जैसे जिलों में भी बड़ी संख्या में शव बरामद किए जा रहे हैं।
चितवन बना शवों की पहचान का सबसे बड़ा केंद्र
चितवन में अब तक 321 शव बरामद किए जा चुके हैं, जो नेपाल के प्रभावित जिलों में सबसे ज्यादा हैं। कई शव इतने क्षतिग्रस्त हो चुके हैं कि उनकी पहचान करना मुश्किल हो रहा है। इस बीच चितवन में 199 अज्ञात शवों को DNA नमूने और पहचान संबंधी विवरण सुरक्षित करने के बाद दफना दिया गया है। प्रशासन ने बताया कि शवों के DNA सैंपल और पहचान संबंधी रिकॉर्ड सुरक्षित रखे गए हैं, ताकि भविष्य में किसी लापता व्यक्ति के परिजनों के दावे की स्थिति में DNA मिलान कराया जा सके। चितवन पुलिस के अनुसार जिले में बरामद शवों में पुरुषों, महिलाओं और बच्चों के शव शामिल हैं। इसके अलावा बड़ी संख्या में मानव अंग और अन्य अवशेष भी मिले हैं।
एक शव पर तीन परिवारों ने किया दावा
बाढ़ के बाद शवों की पहचान सबसे बड़ी चुनौती बन गई है। कई परिवार अपने लापता परिजनों को अस्पतालों और शवगृहों में तलाश रहे हैं। कई मामलों में फोटो, कपड़े, गहने, टैटू और शरीर पर मौजूद निशानों के आधार पर पहचान की कोशिश की जा रही है। जहां पहचान संभव नहीं हो पा रही है, वहां DNA सैंपल सुरक्षित किए जा रहे हैं।
4 हजार के करीब लोग अब भी लापता
नेपाल सरकार के ताजा आंकड़ों के मुताबिक करीब 4,000 लोग अब भी लापता हैं। इनमें हाइड्रोपावर परियोजनाओं में काम करने वाले कर्मचारी, सुरक्षा बलों के जवान और विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। लापता लोगों की तलाश में सुरक्षा बलों की टीमें नदियों के किनारे, मलबे और हाइड्रोपावर परियोजनाओं के आसपास सर्च ऑपरेशन चला रही हैं।
11,800 से ज्यादा लोगों का रेस्क्यू
बाढ़ प्रभावित इलाकों से अब तक 11,800 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। राहत और बचाव अभियान में नेपाल सेना, नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल के 21 हजार से ज्यादा सुरक्षाकर्मी तैनात हैं। दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क और पुल तबाह होने के कारण हेलिकॉप्टरों के जरिए रेस्क्यू अभियान चलाया जा रहा है। कई इलाकों में अभी भी जमीन के रास्ते पहुंचना बेहद मुश्किल है।
हाइड्रोपावर परियोजनाओं में फंसे लोगों की तलाश
बाढ़ ने नेपाल की कई हाइड्रोपावर परियोजनाओं को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। कई परियोजनाओं में काम करने वाले कर्मचारी और श्रमिक लापता हैं। कुछ लोगों के सुरंगों में फंसे होने की आशंका है। रेस्क्यू टीमों के सामने सबसे बड़ी चुनौती मलबे से बंद सुरंगों तक पहुंचना है। खराब मौसम, टूटे पुल और सड़कें तथा लगातार बढ़ता जलस्तर बचाव अभियान को मुश्किल बना रहे हैं।
मलबे से उठ रही दुर्गंध, महामारी का खतरा
आपदा के कई दिन बाद प्रभावित इलाकों में एक और संकट पैदा हो गया है। मलबे और पानी में दबे शवों के सड़ने से दुर्गंध फैल रही है। इससे प्रभावित क्षेत्रों में संक्रमण और महामारी का खतरा बढ़ गया है। प्रशासन के सामने एक तरफ लापता लोगों की तलाश और दूसरी तरफ शवों के सुरक्षित प्रबंधन की चुनौती है। अस्पतालों और शवगृहों की क्षमता पर भी दबाव बढ़ा है। इसी वजह से चितवन प्रशासन ने अज्ञात शवों को अस्थायी रूप से दफनाने का फैसला लिया है। DNA और अन्य पहचान संबंधी रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की व्यवस्था की गई है।
चीन भेजेगा DNA विशेषज्ञ और राहत सामग्री
बाढ़ में मारे गए लोगों की पहचान में मदद के लिए चीन नेपाल को DNA जांच विशेषज्ञों की टीम भेजने की तैयारी में है। इसके अलावा ड्रोन, DNA जांच से जुड़े उपकरण और पानी साफ करने के उपकरण सहित जरूरी राहत सामग्री भी उपलब्ध कराई जा रही है।यह मदद ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब बड़ी संख्या में शवों की पहचान अभी बाकी है और हजारों परिवार अपने लापता परिजनों की तलाश कर रहे हैं।
5 साल की बच्ची 60 घंटे बाद मलबे से जिंदा निकली
इस भयावह त्रासदी के बीच कुछ ऐसी घटनाएं भी सामने आई हैं, जिन्होंने लोगों को उम्मीद दी है। रसुवा में एक पांच वर्षीय बच्ची करीब 60 घंटे तक मलबे के नीचे फंसी रहने के बाद जिंदा मिली। रेस्क्यू टीम ने उसे सुरक्षित बाहर निकाला और बाद में हेलिकॉप्टर से अस्पताल पहुंचाया गया। बच्ची की हालत स्थिर बताई गई। इसी तरह आठ वर्षीय जोयल घाले ने बाढ़ के दौरान पेड़ पर चढ़कर अपनी जान बचाई। घायल हालत में मिलने के बाद उसे अस्पताल पहुंचाया गया और बाद में वह अपनी मां से मिल सका।
प्रिंसिपल की सूझबूझ से बची करीब 900 छात्रों की जान
बाढ़ के दौरान एक स्कूल के प्रिंसिपल के समय रहते लिए गए फैसले ने सैकड़ों बच्चों की जान बचा ली। बाढ़ की चेतावनी मिलते ही स्कूल खाली कराया गया और करीब 900 छात्रों को सुरक्षित ऊंचाई वाले स्थान पर पहुंचाया गया। समय पर लिया गया यह फैसला बड़े हादसे को टालने में बेहद महत्वपूर्ण साबित हुआ।
बच्चों ने पॉकेटमनी बचाकर जुटाए 61 हजार नेपाली रुपये
नेपाल की इस त्रासदी के बीच इंसानियत की मिसाल भी देखने को मिली। डोटी जिले के एक स्कूल के कक्षा 6 से 12 तक के छात्रों ने अपनी पॉकेटमनी और बचत से 61,815 नेपाली रुपये जुटाए। बच्चों ने यह राशि प्रधानमंत्री आपदा राहत कोष में जमा कराई। स्कूल के प्रिंसिपल के मुताबिक छात्रों ने अपनी इच्छा से बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए यह रकम दी।
फिर बढ़ रहा खतरा
सबसे बड़ी चिंता यह है कि राहत और बचाव अभियान के बीच कुछ इलाकों में फिर नदियों का जलस्तर बढ़ रहा है। नए भूस्खलन और ग्लेशियर से जुड़ी घटनाओं का खतरा भी बना हुआ है। ऐसे में प्रशासन ने नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है।
नेपाल इस समय एक साथ कई मोर्चों पर जूझ रहा है—लापता लोगों की तलाश, शवों की पहचान, राहत एवं पुनर्वास, बुनियादी ढांचे की बहाली और नए बाढ़-भूस्खलन के खतरे से निपटना। हजारों परिवार अभी भी अपने अपनों की खबर का इंतजार कर रहे हैं और बचाव दल मुश्किल हालात में लगातार अभियान चला रहे हैं।
Anjala Kumar 



