Highlights:
- गुरुदास चटर्जी हत्याकांड के सजायाफ्ता शूटर उमेश सिंह की रिहाई का रास्ता साफ
- झारखंड हाईकोर्ट में राज्य सरकार ने हलफनामा दाखिल कर दी जानकारी
- कारा महानिरीक्षक ने 12 नवंबर तक या उससे पहले रिहाई का दिया आश्वासन
- हाईकोर्ट पहले ही समयपूर्व रिहाई से जुड़े बोर्ड के आदेशों को कर चुका है निरस्त
धनबाद (Threesocieties.com Desk): Gurudas Chatterjee Murder Case: धनबाद के बहुचर्चित मजदूर नेता और निरसा के पूर्व विधायक गुरुदास चटर्जी हत्याकांड में उम्रकैद की सजा काट रहे शूटर उमेश सिंह की जेल से रिहाई का रास्ता साफ हो गया है। झारखंड सरकार ने झारखंड हाईकोर्ट में हलफनामा दाखिल कर आश्वासन दिया है कि उमेश सिंह को 12 नवंबर 2026 तक या उससे पहले जेल से रिहा कर दिया जाएगा।
गुरुवार को हाईकोर्ट में अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से कारा महानिरीक्षक (आईजी) स्वयं अदालत में उपस्थित हुए। उन्होंने सरकार की ओर से औपचारिक हलफनामा दाखिल कर अदालत को रिहाई की समयसीमा से अवगत कराया। राज्य सरकार के इस आश्वासन के बाद करीब 26 साल से अधिक समय से जेल में बंद उमेश सिंह की रिहाई का रास्ता साफ हो गया है। उमेश सिंह 27 अप्रैल 2000 से जेल में बंद है। उसकी रिहाई का मामला लंबे समय से झारखंड हाईकोर्ट और राज्य सजा पुनरीक्षण बोर्ड के समक्ष लंबित रहा है।
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अवमानना याचिका के बाद सरकार ने हाईकोर्ट में दिया हलफनामा
उमेश सिंह की ओर से झारखंड हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल की गई थी। इसमें आरोप लगाया गया था कि हाईकोर्ट के पूर्व आदेश के बावजूद राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों ने उसकी समयपूर्व रिहाई की प्रक्रिया पूरी नहीं की। गुरुवार को मामले की सुनवाई के दौरान कारा महानिरीक्षक की उपस्थिति में राज्य सरकार ने हलफनामा दाखिल किया। इसमें अदालत को भरोसा दिया गया कि उमेश सिंह को 12 नवंबर तक या उससे पहले रिहा कर दिया जाएगा। उमेश सिंह की ओर से झारखंड हाईकोर्ट के वरीय अधिवक्ता शैलेश कुमार सिंह ने पक्ष रखा।
हाईकोर्ट पहले ही निरस्त कर चुका है समयपूर्व रिहाई से जुड़े आदेश
दरअसल, उमेश सिंह की समयपूर्व रिहाई का मामला झारखंड हाईकोर्ट पहुंचा था। हाईकोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति अंबुज नाथ की एकल पीठ ने 17 नवंबर 2025 को अपने फैसले में राज्य सजा पुनरीक्षण बोर्ड (स्टेट सेंटेंस रिव्यू बोर्ड) के दो आदेशों को निरस्त कर दिया था। बोर्ड ने 19 फरवरी 2025 और 1 सितंबर 2025 को उमेश सिंह की समयपूर्व रिहाई की मांग खारिज कर दी थी। हाईकोर्ट ने इन अस्वीकृति आदेशों को रद्द करते हुए संबंधित अधिकारियों को तीन सप्ताह के भीतर औपचारिक रिहाई आदेश जारी करने का निर्देश दिया था। हालांकि, निर्धारित अवधि में रिहाई की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई। इसके बाद उमेश सिंह की ओर से हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल की गई। अब राज्य सरकार की ओर से हलफनामा दाखिल कर 12 नवंबर तक रिहाई का आश्वासन दिया गया है।
तीन बार खारिज हो चुकी थी उमेश सिंह की रिहाई की अर्जी
उमेश सिंह की ओर से पैरवी कर रहे वरीय अधिवक्ता शैलेश कुमार सिंह के अनुसार, उमेश सिंह 27 अप्रैल 2000 से जेल में बंद है। राज्य सजा पुनरीक्षण बोर्ड उसकी रिहाई की अर्जी तीन बार खारिज कर चुका था। बोर्ड की ओर से अपनी टिप्पणी में कहा गया था कि उमेश सिंह ने हत्याकांड में शूटर की भूमिका निभाई थी। ऐसे में उसे रिहा करने से समाज पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। बोर्ड के फैसले को उमेश सिंह की ओर से हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। इसके बाद हाईकोर्ट ने बोर्ड के संबंधित अस्वीकृति आदेशों को निरस्त कर दिया था।
14 अप्रैल 2000 को दिनदहाड़े हुई थी गुरुदास चटर्जी की हत्या
गुरुदास चटर्जी हत्याकांड धनबाद और झारखंड की राजनीति के सबसे चर्चित आपराधिक मामलों में शामिल रहा है। मजदूर नेता और मार्क्सवादी समन्वय समिति (मासस) के तत्कालीन विधायक गुरुदास चटर्जी की 14 अप्रैल 2000 को दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। घटना के दिन गुरुदास चटर्जी धनबाद में एक बैठक में हिस्सा लेने के बाद बाइक से निरसा स्थित अपने घर लौट रहे थे। बाइक अपूर्वा घोष चला रहे थे। दोपहर करीब 2:45 बजे गोविंदपुर में देवली प्रीमियम हार्डकोक के पास बाइक सवार हमलावर वहां पहुंचे। आरोप के मुताबिक, निरसा के शिव शंकर सिंह और उमेश सिंह ने गुरुदास चटर्जी को निशाना बनाया। उमेश सिंह ने उन पर गोली चला दी, जिससे उनकी मौत हो गई।इस हत्याकांड में शिव शंकर सिंह के पिता नर्मदेश्वर प्रसाद सिंह पर भी हत्या की साजिश रचने का आरोप लगा था।
सेशन कोर्ट ने सुनाई थी सजा, हाईकोर्ट ने फांसी में बदली थी उम्रकैद
गुरुदास चटर्जी हत्याकांड में धनबाद सेशन कोर्ट ने 20 नवंबर 2003 को फैसला सुनाया था। अदालत ने शिव शंकर सिंह, उमेश सिंह, नर्मदेश्वर प्रसाद सिंह और विजय सिंह को दोषी ठहराया था। इसके बाद 6 मई 2005 को झारखंड हाईकोर्ट ने शिव शंकर सिंह और उमेश सिंह की उम्रकैद की सजा को फांसी की सजा में बदल दिया था। वहीं, नर्मदेश्वर प्रसाद सिंह और विजय सिंह को बरी कर दिया गया था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को पलटते हुए दोनों दोषियों की फांसी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया था।
2018 में शिव शंकर सिंह को मिल चुकी है रिहाई
इस हत्याकांड में उम्रकैद की सजा काट रहे शिव शंकर सिंह को पहले ही रिहाई मिल चुकी है। 9 अप्रैल 2018 को तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास की अध्यक्षता वाली राज्य सजा पुनरीक्षण समिति ने शिव शंकर सिंह की सजा माफ करने का फैसला लिया था। इसके बाद उसकी रिहाई का आदेश जारी किया गया था। अब उमेश सिंह की रिहाई को लेकर झारखंड सरकार ने भी हाईकोर्ट में हलफनामा दाखिल कर 12 नवंबर तक की समयसीमा दी है। करीब 26 साल से अधिक समय तक जेल में रहने के बाद उमेश सिंह की रिहाई की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में पहुंच गई है।