Dhanbad: चार साल बाद खुली बेनीडीह गोलीकांड की फाइल, NHRC ने की जांच, गवाहों पर सवाल
धनबाद के बेनीडीह गोलीकांड की चार साल बाद NHRC ने जांच की। घटनास्थल का जायजा लेकर मृतकों के परिजनों, पुलिस अधिकारियों और गवाहों से पूछताछ की गई।
HighLights:
- 19 नवंबर 2022 को बेनीडीह साइडिंग में हुई थी गोलीबारी
- सीआईएसएफ की फायरिंग में चार लोगों की मौत, दो घायल हुए थे
- चार साल बाद NHRC की तीन सदस्यीय टीम ने घटनास्थल की जांच की
- डीआईजी गौरव गर्ग के नेतृत्व में टीम ने आठ घंटे से अधिक पूछताछ की
धनबाद (Threesocieties.com Desk): चार साल पुराने बेनीडीह साइडिंग गोलीकांड की फाइल एक बार फिर खुल गई है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) की टीम ने बुधवार को बाघमारा थाना क्षेत्र के ब्लॉक-2 स्थित बेनीडीह साइडिंग पहुंचकर मामले की विस्तृत जांच की। आयोग की टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण करने के साथ-साथ घटना से जुड़े सीआईएसएफ जवानों, पुलिस अधिकारियों, बीसीसीएल अधिकारियों, गवाहों और मृतकों के परिजनों से पूछताछ की।
19 नवंबर 2022 की रात बेनीडीह साइडिंग में हुई गोलीबारी में चार लोगों की मौत हो गई थी, जबकि दो अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। घटना के चार साल बाद NHRC की जांच से पुलिस, सीआईएसएफ और बीसीसीएल महकमे में हलचल तेज हो गई है।
आठ घंटे से अधिक चली NHRC की जांच
दिल्ली से पहुंची राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की टीम ने करीब आठ घंटे से अधिक समय तक मामले से जुड़े विभिन्न पक्षों से जानकारी ली। टीम में आयोग के डीआईजी गौरव गर्ग, डीएसपी दुष्यंत सिंह और इंस्पेक्टर यति प्रकाश शर्मा शामिल थे। सबसे पहले टीम बेनीडीह साइडिंग स्थित घटनास्थल पर पहुंची। वहां घटना के समय मौजूद सीआईएसएफ जवान और शिकायतकर्ता अरुण कुमार यादव समेत संबंधित लोगों से घटना की परिस्थितियों के बारे में जानकारी ली गई। इसके बाद टीम ने मामले की जांच से जुड़े पुलिस अधिकारियों और बीसीसीएल के अधिकारियों से भी पूछताछ की।
चार लोगों की हुई थी मौत
19 नवंबर 2022 की रात बेनीडीह साइडिंग में कोयला ले जाने को लेकर विवाद के दौरान सीआईएसएफ की क्यूआरटी टीम और वहां मौजूद लोगों के बीच टकराव हुआ था। इस दौरान गोलीबारी हुई। गोली लगने से प्रीतम नोनियां, अताउल्ला अंसारी, जलालुद्दीन खान और समीम अंसारी की मौत हो गई थी। वहीं रमेश रविदास और बादल रवानी गंभीर रूप से घायल हुए थे। घटना के बाद सीआईएसएफ की ओर से सरकारी संपत्ति की चोरी, सरकारी कार्य में बाधा और हथियार छीनने समेत विभिन्न आरोपों में मामला दर्ज कराया गया था। दूसरी ओर मृतक प्रीतम नोनिया की पत्नी सोनिया देवी की शिकायत पर भी मामला दर्ज हुआ था।
मृतकों के परिजनों से भी हुई पूछताछ
घटनास्थल के निरीक्षण के बाद NHRC की टीम ने हरिणा गेस्ट हाउस में मृतकों के परिजनों के बयान दर्ज किये। परिजनों ने आयोग के सामने घटना को लेकर अपनी बातें रखीं और निष्पक्ष जांच की मांग की। मृतक प्रीतम नोनिया की पत्नी सोनिया देवी समेत अन्य मृतकों के परिजन जांच टीम के समक्ष उपस्थित हुए। परिजनों ने घटना की परिस्थितियों और पूर्व में हुई जांच को लेकर अपनी आपत्तियां और सवाल आयोग के सामने रखे। परिजनों की ओर से सीआईएसएफ की कार्रवाई को लेकर लगाए गये आरोपों की स्वतंत्र रूप से जांच की जा रही है।
गवाहों के बयान से जांच में आया नया मोड़
NHRC की जांच के दौरान कुछ ऐसे गवाह भी सामने आये, जिनके नाम पुलिस की ओर से घटना के गवाहों के रूप में दर्ज किये गये थे। इन लोगों ने आयोग की टीम के सामने घटना के संबंध में प्रत्यक्ष जानकारी होने से इनकार कर दिया। बाघमारा पुलिस की लिखित सूचना के आधार पर दयाल हरी, चंदन हरी, अब्बास अंसारी, पप्पू अंसारी और असगर अंसारी की पत्नी निखत प्रवीण समेत अन्य लोगों को जांच के लिए बुलाया गया था। गवाहों ने आयोग को बताया कि उन्हें घटना की जानकारी अखबार या दूसरे माध्यमों से मिली थी। उन्होंने कहा कि घटना के समय वे वहां मौजूद नहीं थे और उन्हें यह जानकारी नहीं है कि उनका नाम गवाह के रूप में कैसे दर्ज किया गया।
चेन्नई में थे असगर अंसारी, पत्नी पहुंचीं बयान देने
रथटांड़ निवासी असगर अंसारी का नाम भी गवाहों में शामिल था। बताया गया कि घटना के समय वह चेन्नई में काम कर रहे थे। NHRC की ओर से जारी नोटिस के बाद उनकी पत्नी निखत प्रवीण जांच टीम के सामने पहुंचीं। उन्होंने टीम को बताया कि घटना के दिन उनके पति चेन्नई में थे। ऐसे में उनका नाम घटना के गवाह के रूप में कैसे आया, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है। गवाहों के इन बयानों के बाद जांच टीम ने मामले की जांच प्रक्रिया और गवाहों के चयन को लेकर गंभीरता से पूछताछ की।
जांच अधिकारी से भी हुई पूछताछ
गवाहों के बयान के बाद NHRC टीम ने मामले के तत्कालीन कतरास थानेदार सह अनुसंधानकर्ता पुलिस इंस्पेक्टर रणधीर सिंह से भी पूछताछ की। टीम ने यह जानने की कोशिश की कि जिन लोगों को घटना का स्वतंत्र गवाह बताया गया, उनके बयान और घटना से संबंध का आधार क्या था। आयोग की टीम ने मामले से जुड़े दस्तावेजों और अब तक हुई जांच की प्रक्रिया की भी समीक्षा की।
पुलिस और BCCL अधिकारी रहे मौजूद
NHRC की जांच के दौरान ग्रामीण एसपी एस. मोहम्मद याकूब, डीएसपी अजीत कुमार विमल, बीसीसीएल के जीएम सिक्योरिटी एहतराम कुरैशी, सीओ गिरजानंद किस्कू, ब्लॉक-2 क्षेत्र के जीएम कुमार रंजीव, बरोरा क्षेत्र के जीएम केके सिंह, एजीएम पीएसके सिन्हा और बाघमारा थाना प्रभारी अजीत कुमार समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे। आयोग की टीम ने घटना से जुड़े पुलिस अधिकारियों, तत्कालीन थाना प्रभारियों, बीसीसीएल अधिकारियों और साइडिंग से जुड़े पदाधिकारियों से भी जानकारी ली।
अब NHRC की रिपोर्ट पर टिकी नजर
बेनीडीह गोलीकांड की चार साल बाद हुई NHRC जांच ने मामले को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। आयोग ने घटनास्थल का निरीक्षण करने के साथ घटना से जुड़े कई पक्षों के बयान लिये हैं। टीम ने जांच के दौरान जुटाये गये बयानों, दस्तावेजों और अन्य तथ्यों के आधार पर अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी। NHRC की रिपोर्ट में सामने आने वाले निष्कर्षों के बाद ही मामले में आगे की कार्रवाई की तस्वीर साफ होगी।
Threesocieties News Desk 



