धनबाद: सिजुआ में भू-धंसान से घर जमींदोज, मलबे में दबकर 10 साल के बच्चे की मौत
धनबाद के सिजुआ में भू-धंसान से मकान जमींदोज होने पर 10 वर्षीय बच्चे की मौत हो गई। परिवार के सदस्य घायल हैं। मुआवजा और पुनर्वास की मांग पर ग्रामीणों ने धनबाद-कतरास मार्ग जाम किया।
HighLights:
- भू-धंसान के मलबे में दबकर 10 वर्षीय विक्रम भुइयां की मौत
- मृतक की मां समेत तीन बच्चे घायल, निजी अस्पताल में इलाज
- धनबाद-कतरास मुख्य मार्ग जाम कर मुआवजा और पुनर्वास की मांग
- स्थानीय लोगों ने अवैज्ञानिक खनन और अवैध उत्खनन को हादसे के लिए जिम्मेदार ठहराया
धनबाद (Threesocieties.com Desk): धनबाद कोयलांचल में भू-धंसान का खतरा एक बार फिर जानलेवा साबित हुआ है। बीसीसीएल के सिजुआ क्षेत्र स्थित मोदीडीह 10 नंबर कॉलोनी की भुइयां पट्टी में मंगलवार तड़के करीब पांच बजे जोरदार आवाज के साथ भू-धंसान हुआ। भू-धंसान की चपेट में आने से एक मकान पूरी तरह जमींदोज हो गया। हादसे में मलबे में दबकर 10 वर्षीय विक्रम भुइयां की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि उसकी मां समेत परिवार के तीन बच्चे घायल हो गए।

घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। तेज आवाज और चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे। स्थानीय लोगों ने अपनी जान जोखिम में डालकर मलबे में दबे परिवार के सदस्यों को बाहर निकाला। सभी घायलों को तत्काल कतरास के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है।
भू-धंसान से टूटी लोगों की नींद
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मंगलवार सुबह करीब पांच बजे अचानक जमीन में हलचल शुरू हुई। इसी दौरान चरचराहट की आवाज आने लगी और देखते ही देखते मकान जमीन में समाने लगा। उस समय गुड्डू भुइयां चाय पीने सिजुआ मोड़ गए थे, जबकि उनकी पत्नी चंदा देवी और बच्चे घर में सो रहे थे। अचानक मकान के धंसने से परिवार के सदस्य मलबे में दब गए। चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग दौड़े और राहत कार्य शुरू किया। काफी मशक्कत के बाद सभी को मलबे से बाहर निकाला गया। हादसे में विक्रम भुइयां (10 वर्ष) की मौत हो गई। वहीं चंदा देवी (42 वर्ष), आरती कुमारी (11 वर्ष), पूजा देवी (13 वर्ष) और वाला कुमार (3 वर्ष) घायल हुए हैं। सभी को इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया।

कई मकान जमींदोज, 12 परिवार प्रभावित
भू-धंसान की घटना में गुड्डू भुइयां के अलावा करण भुइयां, जर्नादन मल्लाह, केदार भुइयां और गोपी भुइयां के मकान भी जमींदोज होने की बात सामने आई है। वहीं बोगली भुइयां, केदार भुइयां और अर्जुन भुइयां के मकान आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं।घटना के बाद बीसीसीएल प्रबंधन की ओर से आसपास के प्रभावित 12 परिवारों की सूची तैयार की गई है। इलाके में अभी भी लोगों के बीच दहशत का माहौल है।
अवैज्ञानिक खनन को हादसे के लिए ठहराया जिम्मेदार
स्थानीय लोगों का आरोप है कि धनबाद कोयलांचल में लंबे समय से जारी अवैज्ञानिक कोयला खनन, खनन के बाद भूमिगत क्षेत्रों में पर्याप्त बालू भराई नहीं होने और अवैध कोयला उत्खनन के कारण जमीन के भीतर बड़े पैमाने पर खोखलापन पैदा हो गया है। यही वजह है कि सिजुआ और आसपास के क्षेत्रों में समय-समय पर भू-धंसान की घटनाएं सामने आती रहती हैं। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि प्रभावित परिवारों को तत्काल मुआवजा दिया जाए और उन्हें सुरक्षित स्थान पर पुनर्वासित किया जाए। साथ ही भू-धंसान के कारणों की उच्चस्तरीय जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
मुआवजा और पुनर्वास की मांग पर सड़क जाम
हादसे के बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने धनबाद-कतरास मुख्य मार्ग को जाम कर दिया। लोगों ने सड़क के समीप टायर जलाकर सरकार और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। सड़क जाम होने से दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतार लग गई। ग्रामीण मृतक बच्चे के परिवार को तत्काल मुआवजा देने, प्रभावित परिवारों के सुरक्षित पुनर्वास और भू-धंसान की समस्या का स्थायी समाधान करने की मांग पर अड़े रहे।
मौके पर पहुंचे विधायक शत्रुघ्न महतो
घटना की सूचना मिलते ही विधायक शत्रुघ्न महतो समर्थकों के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने आक्रोशित लोगों को समझाने-बुझाने का प्रयास किया। विधायक ने घटना की जानकारी सीएमडी, उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक सहित संबंधित अधिकारियों को दी और प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा एवं पुनर्वास उपलब्ध कराने की मांग की। ग्रामीणों ने पांच लाख रुपये मुआवजा और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की मांग रखी है।
पहले ही डेंजर जोन घोषित किया जा चुका है इलाका
स्थानीय लोगों के अनुसार, सिजुआ 10 नंबर मोड़, जोगता मोड़ और आसपास के कुछ इलाकों को बीसीसीएल की ओर से पहले ही डेंजर जोन के रूप में चिह्नित किया जा चुका है। लोगों को क्षेत्र खाली करने की सूचना भी दी गई थी। इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोग इन इलाकों में रह रहे हैं।
ताजा हादसे के बाद एक बार फिर सवाल उठ रहा है कि डेंजर जोन में रहने वाले परिवारों को सुरक्षित स्थान पर पुनर्वासित करने की दिशा में अब तक ठोस कदम क्यों नहीं उठाए गए। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब तक प्रभावित परिवारों का स्थायी पुनर्वास नहीं किया जाता, तब तक इस तरह की घटनाओं का खतरा बना रहेगा।
सिजुआ की घटना ने एक बार फिर धनबाद के कोयलांचल में भूमिगत खनन, जमीन की सुरक्षा और पुनर्वास व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन और बीसीसीएल प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत देने के साथ-साथ भू-धंसान की समस्या के स्थायी समाधान के लिए क्या कदम उठाते हैं।
Threesocieties News Desk 



