धनबाद DMFT बैठक में गरमाया चापाकल मुद्दा: DDC के 10 हजार मरम्मत के दावे पर MLA का सवाल

धनबाद DMFT बैठक में 10 हजार चापाकलों की मरम्मत के डीडीसी के दावे पर विधायक अरूप चटर्जी ने सवाल उठाये। 2536 नई योजनाओं, 140 स्कूलों के विकास और 419 आंगनबाड़ी भवनों की भी समीक्षा हुई।

धनबाद DMFT बैठक में गरमाया चापाकल मुद्दा: DDC के 10 हजार मरम्मत के दावे पर MLA का सवाल
धनबाद में 2536 नई विकास योजनाओं का प्रस्ताव।

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  • 10 हजार चापाकलों की मरम्मत पर सवाल: डीडीसी सन्नी राज के दावे पर निरसा एमएलए अरूप चटर्जी ने उठाये सवाल 
  • विधायक की टिप्पणी पर 200 से अधिक मुखिया और जनप्रतिनिधियों ने तालियां बजाईं।
  • 2536 नई योजनाओं का प्रस्ताव, खनन प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल सुविधाओं के विस्तार पर जोर
  • 70 प्रतिशत योजनाएं प्राथमिकता वाले क्षेत्रों और 30 प्रतिशत सड़क, ऊर्जा व अन्य बुनियादी सुविधाओं के लिए प्रस्तावित

धनबाद (Threesocieties.com Desk): धनबाद। जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT) की न्यास परिषद की बैठक में शुक्रवार को विकास योजनाओं के क्रियान्वयन और आम लोगों को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने को लेकर कई अहम मुद्दे उठे। बैठक में जहां खनन प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और आधारभूत संरचना के विकास के लिए 2,536 नई योजनाओं के अनुमोदन का प्रस्ताव सामने आया, वहीं चापाकलों की मरम्मत को लेकर अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के बीच तीखी बहस भी हुई।


उप विकास आयुक्त (डीडीसी) सन्नी राज ने जिले में 10 हजार चापाकलों की मरम्मत कराने की जानकारी दी। इस पर निरसा विधायक अरूप चटर्जी ने सवाल उठाते हुए कहा कि अधिकारियों के दावे और धरातल की स्थिति में अंतर दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि डीडीसी के अनुसार 10 हजार चापाकलों की मरम्मत करायी गयी है, लेकिन उन्हें तो 10 चापाकल भी ठीक होते नहीं दिखे। पता नहीं कहां मरम्मत हुई है।
विधायक की इस टिप्पणी पर समाहरणालय के बहुउद्देशीय सभागार में मौजूद 200 से अधिक मुखिया और अन्य जनप्रतिनिधियों ने तालियां बजाईं। इस मुद्दे ने बैठक में पेयजल व्यवस्था, सरकारी दावों और योजनाओं की वास्तविक स्थिति को लेकर चर्चा तेज कर दी।
बैठक की अध्यक्षता उपायुक्त आदित्य रंजन ने की। इसमें जिले के खनन प्रभावित क्षेत्रों में चल रही योजनाओं की समीक्षा की गयी और जनप्रतिनिधियों से स्थानीय समस्याओं तथा विकास कार्यों को लेकर सुझाव लिये गये।

चापाकलों की मरम्मत पर विधायक ने मांगा हिसाब

बैठक में पेयजल व्यवस्था को लेकर सबसे अधिक चर्चा हुई। डीडीसी सन्नी राज ने जिले में 10 हजार चापाकलों की मरम्मत कराये जाने की बात कही, लेकिन निरसा विधायक अरूप चटर्जी ने इस दावे की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े कर दिये। विधायक ने कहा कि यदि इतनी बड़ी संख्या में चापाकलों की मरम्मत हुई है, तो उसका असर आम लोगों को दिखाई देना चाहिए। उन्होंने मरम्मत के काम और उसकी वास्तविक स्थिति को लेकर सवाल उठाये।
अरूप चटर्जी ने डीप बोरिंग से संबंधित पेयजल योजनाओं में चहेते संवेदकों को काम दिये जाने की मंशा पर भी सवाल उठाया। उन्होंने स्थानीय संवेदकों को प्राथमिकता देने और योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की।बैठक में मौजूद कई मुखिया ने भी शिकायत की कि चापाकलों की मरम्मत के लिए पीएचईडी के अधिकारियों से संपर्क करने पर उनकी बात नहीं सुनी जाती। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल से जुड़ी समस्याओं के समाधान में कठिनाई होती है। इस पर डीडीसी ने बताया कि केवल निरसा क्षेत्र में 819 चापाकलों की मरम्मत करायी गयी है। उन्होंने जिले में मरम्मत किये गये चापाकलों की सूची उपलब्ध कराने की बात कही, ताकि संबंधित कार्यों का विवरण सामने आ सके।

ग्रामसभा की अनुशंसा और योजनाओं के चयन पर भी उठे सवाल

डीएमएफटी बैठक में पंचायत स्तर पर विकास योजनाओं के चयन को लेकर भी जनप्रतिनिधियों ने अपनी नाराजगी जतायी। कई मुखिया ने आरोप लगाया कि ग्रामसभा की बैठकों में प्रशासन की ओर से अपनी योजनाओं की अनुशंसा कराने के लिए दबाव बनाया जाता है। उनका कहना था कि पंचायतों की वास्तविक जरूरतों, स्थानीय समस्याओं और ग्रामीणों की प्राथमिकताओं पर पर्याप्त विचार-विमर्श होना चाहिए। विकास योजनाओं के चयन में मुखिया और ग्रामसभा की भूमिका को महत्व देने की मांग भी उठी।

कलियासोल के मुखिया ने अपनी अनुशंसाओं को भी उचित महत्व देने की मांग की। जनप्रतिनिधियों का कहना था कि योजनाओं का चयन स्थानीय जरूरतों के आधार पर होना चाहिए, ताकि डीएमएफटी की राशि का लाभ सीधे खनन प्रभावित क्षेत्रों के लोगों तक पहुंच सके।
डुमरकुंडा उत्तर के मुखिया ने बीसीसीएल क्षेत्र में विकास कार्यों की कमी का मुद्दा उठाया। वहीं, मेढ़ा पंचायत के मुखिया मनोज कुमार राउत ने मैथन जलमीनार की समस्या सामने रखी। उन्होंने कहा कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद जलमीनार से जुड़ी समस्या का समुचित समाधान नहीं हो पाया है। इसके कारण कई पंचायतों के लोगों को पेयजल संकट का सामना करना पड़ रहा है।

2536 नई योजनाओं के अनुमोदन का प्रस्ताव

बैठक में खनन प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति देने के लिए 2,536 नई योजनाओं के अनुमोदन का प्रस्ताव रखा गया। इन योजनाओं का उद्देश्य शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, स्वच्छता और आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करना है।
उप विकास आयुक्त सन्नी राज के अनुसार, जनप्रतिनिधियों की अनुशंसा पर तैयार प्रस्ताव में विभिन्न क्षेत्रों की जरूरतों को शामिल किया गया है। इनमें स्वास्थ्य उपकेंद्र, स्कूलों का विकास, आंगनबाड़ी भवन, पेयजल व्यवस्था, ग्रामीण हाट-बाजार और सड़क निर्माण से जुड़ी योजनाएं शामिल हैं।
डीएमएफटी की गाइडलाइन के अनुसार, प्रस्तावित योजनाओं में 70 प्रतिशत हिस्सा पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता, महिला एवं बाल कल्याण तथा कौशल विकास जैसे प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के लिए निर्धारित करने की योजना है। वहीं, शेष 30 प्रतिशत हिस्सा सड़क, ऊर्जा और अन्य आधारभूत सुविधाओं पर खर्च करने का प्रस्ताव है। हालांकि, इन योजनाओं के अनुमोदन और क्रियान्वयन के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कौन-कौन सी योजनाएं कब तक धरातल पर उतरेंगी।

तीन से छह महीने में दिखेंगे योजनाओं के परिणाम: उपायुक्त

उपायुक्त आदित्य रंजन ने कहा कि जिला प्रशासन का उद्देश्य खनन प्रभावित क्षेत्रों में विकास योजनाओं को पारदर्शिता के साथ लागू करना है। उन्होंने उम्मीद जतायी कि अगले तीन से छह महीनों में अधिकांश योजनाओं के परिणाम दिखाई देने लगेंगे। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से अपील की कि विकास कार्यों के दौरान आने वाली जमीन संबंधी समस्याओं और स्थानीय बाधाओं को दूर करने में प्रशासन को सहयोग दें। उपायुक्त ने यह भी आश्वस्त किया कि शिकायत मिलने पर दो से तीन दिनों के भीतर जांच दल भेजकर उचित कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन की ओर से पंचायत स्तर पर बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने और योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाने पर जोर दिया गया। बैठक में जनप्रतिनिधियों ने भी कहा कि योजनाओं का लाभ तभी मिलेगा, जब स्वीकृति के साथ-साथ उनके काम की नियमित निगरानी की जायेगी।

140 स्कूलों को सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस की तर्ज पर विकसित करने की योजना

शिक्षा के क्षेत्र में जिले के सरकारी विद्यालयों को बेहतर बनाने के लिए कई योजनाओं की जानकारी बैठक में दी गयी। उपायुक्त ने बताया कि सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस की तर्ज पर जिले के 140 विद्यालयों को विकसित किया जा रहा है।इसके अतिरिक्त 391 सरकारी विद्यालयों के नवीनीकरण की योजना पर भी काम चल रहा है। बैठक में दी गयी जानकारी के अनुसार, 87 स्कूलों में आधुनिक फर्नीचर, स्मार्ट क्लास, कंप्यूटर, पुस्तकालय और खेल सामग्री उपलब्ध करायी गयी है। अन्य 413 विद्यालयों में भी ऐसी सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रस्ताव है।
जिले के 1,558 स्कूलों के विद्यार्थियों को थाली और गिलास उपलब्ध कराये गये हैं। वहीं, आठ प्रखंडों के 2,863 शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया गया है। इन पहलों का उद्देश्य सरकारी स्कूलों में शिक्षा का माहौल बेहतर करना, विद्यार्थियों को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराना और शिक्षण व्यवस्था को मजबूत बनाना है।

सदर अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार

बैठक में स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी उपलब्धियों की भी जानकारी दी गयी। सदर अस्पताल में ओपीडी पंजीकरण व्यवस्था का आधुनिकीकरण किया गया है। वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगों की सुविधा के लिए अलग काउंटर बनाया गया है। इसके अलावा सखी हेल्प डेस्क की सुविधा भी उपलब्ध करायी गयी है। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत दो लाख बच्चों की स्क्रीनिंग की गयी। इनमें करीब पांच हजार बच्चों में स्वास्थ्य संबंधी कमियां पायी गयीं। जानकारी के अनुसार, इनमें से 1,600 बच्चों का इलाज कराया गया।प्रशासन ने स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता बढ़ाने पर भी जोर दिया। निरसा विधायक अरूप चटर्जी ने प्रत्येक प्रखंड में प्रशिक्षण केंद्र खोलने के साथ मोबाइल हेल्थ केयर एंबुलेंस उपलब्ध कराने की मांग रखी, ताकि जरूरतमंद लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंच सकें।

419 नये आंगनबाड़ी भवनों का होगा निर्माण

जिले में आंगनबाड़ी केंद्रों को बेहतर बनाने के लिए 419 नये भवनों के निर्माण की योजना पर काम चल रहा है। बैठक में दी गयी जानकारी के अनुसार, 201 आंगनबाड़ी केंद्रों को नये भवन उपलब्ध कराये गये हैं। वित्तीय वर्ष 2026-27 के अंत तक 82.5 प्रतिशत आंगनबाड़ी केंद्रों को अपने पक्के भवन में संचालित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। प्रखंडवार प्रस्तावित भवनों का विवरण इस प्रकार है:

बाघमारा: 113 भवन
झरिया: 79 भवन
धनबाद: 75 भवन
निरसा: 65 भवन
सिंदरी: 59 भवन
 टुंडी: 28 भवन

इन केंद्रों को बाल-अनुकूल मॉडल आंगनबाड़ी सह प्री-नर्सरी स्कूल के रूप में विकसित करने की योजना है। इनमें पेयजल, शौचालय और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जा रहा है।

पेयजल व्यवस्था के लिए हजारों चापाकलों का अनुरक्षण

बैठक में पेयजल व्यवस्था के तहत किये गये कार्यों का विवरण भी प्रस्तुत किया गया। अधिकारियों के अनुसार, जिले में 7,901 ट्यूबवेलों का नियमित अनुरक्षण, 2,405 राइजर पाइप, 97 उच्च क्षमता वाले ट्यूबवेल और 566 विशेष मरम्मत कार्य पूरे किये गये हैं।
इसके अलावा महुदा बस्ती, पंचेत, मैथन, तेलमच्चो और नॉर्थ जोन जलापूर्ति योजनाओं को मजबूत करने का काम किया जा रहा है।
हालांकि, चापाकलों की मरम्मत को लेकर विधायक और मुखिया की शिकायतों ने यह सवाल भी खड़ा किया कि सरकारी आंकड़ों में दर्ज काम का लाभ ग्रामीणों को किस हद तक मिल रहा है। मरम्मत कार्यों की सूची उपलब्ध कराने की डीडीसी की बात के बाद अब संबंधित विवरण सामने आने पर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।

793 तालाबों के जीर्णोद्धार की योजना

ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण और जलस्रोतों को बेहतर बनाने के लिए जिले में 793 तालाबों के जीर्णोद्धार से जुड़ी योजनाएं भी सामने आयी हैं।बैठक में दी गयी जानकारी के अनुसार, इनमें से 205 योजनाओं को स्वीकृति मिली है, जबकि 588 योजनाएं प्रक्रियाधीन हैं। तालाबों के जीर्णोद्धार से जल संचयन, सिंचाई और स्थानीय जलस्रोतों को सुरक्षित रखने में मदद मिलने की उम्मीद है। हालांकि, इन योजनाओं का वास्तविक लाभ उनके समयबद्ध क्रियान्वयन और रखरखाव पर निर्भर करेगा।

ग्रामीण हाट-बाजार और स्मार्ट लाइब्रेरी पर जोर

खनन प्रभावित क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों और सार्वजनिक सुविधाओं को बढ़ावा देने के लिए ग्रामीण हाट-बाजार विकसित करने की योजनाएं भी चल रही हैं। बैठक में बताया गया कि बलियापुर, निरसा, तोपचांची, राजगंज, मुराईडीह और फुलवारीटांड़ में ग्रामीण हाट-बाजार विकसित किये जा रहे हैं। इससे स्थानीय कारोबारियों, किसानों और ग्रामीणों को बेहतर बाजार सुविधाएं उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। गोविंदपुर के आमाघाटा में वन स्टॉप सेंटर के निर्माण का काम भी प्रगति पर है। इसके अलावा प्रधानखंता, बीबीएम कॉलेज और आरएस मोड़ कॉलेज में स्मार्ट लाइब्रेरी विकसित करने की योजना पर काम किया जा रहा है।

विधायकों ने सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दे उठाये

बैठक में विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों के विधायकों ने अपने-अपने क्षेत्र की समस्याओं और विकास संबंधी मांगों को रखा। टुंडी विधायक मथुरा प्रसाद महतो ने ब्राह्मणडीह-खरियो पथ की मरम्मत, बरवाअड्डा-टुंडी रोड पर पोखरिया के पास गार्ड वॉल निर्माण और ग्रामीण स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर करने की मांग की। धनबाद विधायक राज सिन्हा ने सेंट्रल लाइब्रेरी को स्मार्ट लाइब्रेरी के रूप में विकसित करने, दामोदरपुर में नगर वन बनाने और कपालघाट श्मशान में सुविधाएं बढ़ाने का सुझाव दिया।
निरसा विधायक अरूप चटर्जी ने आवास योजनाओं को बढ़ावा देने, प्रत्येक प्रखंड में प्रशिक्षण केंद्र खोलने, अंडरग्राउंड ड्रेनेज सिस्टम विकसित करने, स्थानीय संवेदकों को प्राथमिकता देने और मोबाइल हेल्थ केयर एंबुलेंस उपलब्ध कराने की मांग रखी। उन्होंने तोपचांची, मैथन और पंचेत में इको टूरिज्म पार्क विकसित करने का मुद्दा भी उठाया। सिंदरी विधायक चंद्रदेव महतो ने पुस्तकालयों में कंप्यूटर और किताबें उपलब्ध कराने के साथ सरकारी स्कूलों से जुड़ी समस्याओं को दूर करने की मांग की।

बैठक में कई अधिकारी और जनप्रतिनिधि रहे मौजूद

उपायुक्त आदित्य रंजन की अध्यक्षता में हुई बैठक में वन प्रमंडल पदाधिकारी विकास पालीवाल, सिटी एसपी ऋत्विक श्रीवास्तव, विभिन्न विभागों के अधिकारी, प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) और जिले के मुखिया मौजूद थे। बैठक में एक ओर डीएमएफटी के तहत हजारों नई योजनाओं के प्रस्ताव और शिक्षा-स्वास्थ्य के क्षेत्र में विकास की रूपरेखा सामने आयी, तो दूसरी ओर चापाकलों की मरम्मत, पेयजल संकट और ग्रामसभा की अनुशंसाओं से जुड़े सवाल भी प्रमुखता से उठे।