नीतीश के साथ 30 साल का भरोसा,सिपाही से बने करीबी सहयोगी हरेंद्र सिंह को नागरिक परिषद का महासचिव बनाया

बिहार सरकार ने 20 सूत्री समिति में तीन नए सदस्यों को शामिल किया है। वहीं डॉ. अजय कुमार सिंह उपाध्यक्ष और नीतीश कुमार के करीबी रहे हरेंद्र बहादुर सिंह को नागरिक परिषद का महासचिव बनाया गया है।

नीतीश के साथ 30 साल का भरोसा,सिपाही से बने करीबी सहयोगी हरेंद्र सिंह को नागरिक परिषद का महासचिव बनाया
नीतीश के भरोसेमंद हरेंद्र सिंह, सिपाही से सुरक्षा अधिकारी तक का सफर।

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HighLights:

  • बिहार सरकार ने 20 सूत्री समिति में तीन नए सदस्यों को शामिल किया
  • रालोमो के आलोक कुमार सिंह, हम के अनिल कुमार और लोजपा (रा) के सुरेन्द्र विवेक को सदस्य बनाया गया
  • तीनों नए सदस्यों को उपमंत्री का दर्जा और संबंधित सुविधाएं मिलेंगी
  • बिहार राज्य नागरिक परिषद में डॉ. अजय कुमार सिंह उपाध्यक्ष और हरेंद्र बहादुर सिंह महासचिव बने

पटना (Threesocieties.com Desk): बिहार सरकार ने राज्यस्तरीय कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति यानी 20 सूत्री समिति और बिहार राज्य नागरिक परिषद में नई जिम्मेदारियां तय कर दी हैं। मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग की ओर से सोमवार को जारी अधिसूचनाओं के बाद कई नेताओं और पदाधिकारियों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिली हैं।

सबसे खास नियुक्तियों में बिहार राज्य नागरिक परिषद के महासचिव के रूप में हरेंद्र बहादुर सिंह की नियुक्ति है। हरेंद्र सिंह लंबे समय तक पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान राज्यसभा सदस्य नीतीश कुमार के सुरक्षा अधिकारी रहे हैं। सिपाही के रूप में बिहार पुलिस में करियर शुरू करने वाले हरेंद्र सिंह का नीतीश कुमार के साथ करीब तीन दशक से अधिक समय तक जुड़ाव रहा है। वहीं, डॉ. अजय कुमार सिंह को बिहार राज्य नागरिक परिषद का उपाध्यक्ष बनाया गया है। डॉ. अजय कुमार सिंह सिवान की पूर्व सांसद कविता सिंह के पति हैं।

20 सूत्री समिति में सहयोगी दलों के तीन नेताओं को जगह

राज्य सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक 20 सूत्री समिति में तीन नए सदस्यों को शामिल किया गया है। इनमें रालोमो के प्रदेश अध्यक्ष और विधायक आलोक कुमार सिंह, पूर्व मंत्री एवं हम के प्रदेश अध्यक्ष अनिल कुमार तथा लोजपा (रा) के प्रदेश अध्यक्ष सुरेन्द्र कुमार उर्फ सुरेन्द्र विवेक शामिल हैं। इन तीनों नेताओं को राज्यस्तरीय कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति का सदस्य बनाया गया है। साथ ही उन्हें उपमंत्री का दर्जा और उससे संबंधित सुविधाएं उपलब्ध होंगी। सहयोगी दलों के प्रमुख नेताओं को 20 सूत्री समिति में जगह दिए जाने को सरकार के स्तर पर राजनीतिक और प्रशासनिक समन्वय के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

नागरिक परिषद में अजय सिंह और हरेंद्र सिंह को अहम जिम्मेदारी

बिहार राज्य नागरिक परिषद में भी नई नियुक्तियां की गई हैं। डॉ. अजय कुमार सिंह को उपाध्यक्ष, जबकि हरेन्द्र बहादुर सिंह को महासचिव नियुक्त किया गया है।हरेन्द्र बहादुर सिंह को यह जिम्मेदारी अरविंद सिंह उर्फ छोटू सिंह की जगह मिली है। छोटू सिंह को कुछ समय पहले परिषद के महासचिव पद से पदमुक्त किया गया था। इसके बाद उन्हें जदयू से भी छह साल के लिए निष्कासित किया गया था। ऐसे में नागरिक परिषद में हरेंद्र सिंह की नियुक्ति को खास तौर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सिपाही से शुरू हुआ सफर, नीतीश कुमार के साथ तीन दशक का साथ

हरेंद्र बहादुर सिंह की पहचान केवल एक प्रशासनिक नियुक्ति पाने वाले व्यक्ति के रूप में नहीं है। उनका करियर बिहार पुलिस में सिपाही के पद से शुरू हुआ था। सेवा के दौरान पदोन्नति पाकर उन्होंने सब इंस्पेक्टर की जिम्मेदारी संभाली। इसी दौरान उन्हें तत्कालीन नेता नीतीश कुमार की सुरक्षा में तैनाती मिली। बताया जाता है कि नीतीश कुमार के हरनौत विधानसभा क्षेत्र से विधायक रहने के समय से ही हरेंद्र सिंह उनके साथ जुड़े रहे। इसके बाद नीतीश कुमार के सांसद बनने, केंद्र सरकार में मंत्री रहने और फिर बिहार के मुख्यमंत्री बनने तक हरेंद्र सिंह का साथ बना रहा।

बॉडीगार्ड से करीबी सहयोगी तक बना रिश्ता

किसी वीआईपी की सुरक्षा में लंबे समय तक तैनात रहना अपने आप में बेहद जिम्मेदारी वाला काम होता है। हरेंद्र सिंह ने लंबे समय तक नीतीश कुमार की सुरक्षा का दायित्व संभाला। लगातार साथ रहने के कारण दोनों के बीच विश्वास का रिश्ता मजबूत होता गया। समय के साथ हरेंद्र सिंह की भूमिका केवल सुरक्षा अधिकारी तक सीमित नहीं रही और उन्हें नीतीश कुमार के करीबी सहयोगियों में भी गिना जाने लगा। नीतीश कुमार के राजनीतिक जीवन के अलग-अलग दौर में हरेंद्र सिंह उनके साथ बने रहे। यही लंबा जुड़ाव अब उनकी नई जिम्मेदारी के साथ एक बार फिर चर्चा में है।

भोजपुर के पंवट गांव से ताल्लुक रखते हैं हरेंद्र सिंह

हरेंद्र बहादुर सिंह मूल रूप से भोजपुर जिले के पंवट गांव के रहने वाले हैं। उनका परिवार भी सरकारी सेवा से जुड़ा रहा है। उनके पिता दुधेश्वर सिंह बिहार पुलिस से सेवानिवृत्त हुए हैं, जबकि उनके छोटे भाई नागेंद्र सिंह रेलवे में कार्यरत हैं। परिवार में सरकारी सेवा और अनुशासन का माहौल रहा है। हरेंद्र सिंह की पत्नी मीना सिंह गृहिणी हैं। उनके दोनों बेटे इंजीनियर हैं। उनकी एक बेटी और दामाद भी इंजीनियर हैं, जबकि दूसरी बेटी गृहिणी हैं।

नीतीश कुमार के साथ विधायक से मुख्यमंत्री तक का सफर

हरेंद्र सिंह का नीतीश कुमार के साथ जुड़ाव काफी पुराना बताया जाता है। हरनौत से विधायक रहने के दौर से शुरू हुआ यह साथ नीतीश कुमार के सांसद बनने और केंद्र में मंत्री बनने के दौरान भी जारी रहा। बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री बनने के बाद भी हरेंद्र सिंह उनकी सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े रहे। इस तरह लगभग तीन दशक से अधिक समय तक दोनों का पेशेवर और व्यक्तिगत विश्वास का रिश्ता बना रहा। पुलिस सेवा से सेवानिवृत्ति के बाद भी उनका नीतीश कुमार से जुड़ाव बना रहा। अब नागरिक परिषद के महासचिव पद की जिम्मेदारी मिलने के बाद उनका सार्वजनिक जीवन में एक नया अध्याय शुरू हुआ है।

कौन हैं डॉ. अजय कुमार सिंह?

बिहार राज्य नागरिक परिषद में उपाध्यक्ष बनाए गए डॉ. अजय कुमार सिंह सिवान से जुड़े हैं। वह पूर्व सांसद कविता सिंह के पति हैं। कविता सिंह वर्ष 2019 में सिवान लोकसभा सीट से सांसद चुनी गई थीं। डॉ. अजय कुमार सिंह मूल रूप से सिवान जिले के सिसवन थाना क्षेत्र के नंदमुड़ा गांव के रहने वाले हैं। नागरिक परिषद में उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी मिलने के बाद अजय कुमार सिंह भी बिहार के राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण भूमिका में नजर आएंगे।

एक ही अधिसूचना में कई अहम फैसले

राज्य सरकार की ओर से जारी अधिसूचनाओं में एक तरफ 20 सूत्री समिति में सहयोगी दलों के नेताओं को जगह दी गई है, वहीं दूसरी ओर नागरिक परिषद में नई नियुक्तियां की गई हैं। 20 सूत्री समिति में तीन नेताओं को शामिल किए जाने के साथ उन्हें उपमंत्री का दर्जा मिलना भी चर्चा का विषय है। वहीं नागरिक परिषद में अजय कुमार सिंह और हरेंद्र बहादुर सिंह की नियुक्ति से परिषद की जिम्मेदारियों में भी बदलाव हुआ है। खास बात यह है कि हरेंद्र सिंह की नई भूमिका उनके लंबे प्रशासनिक अनुभव और नीतीश कुमार के साथ रहे पुराने जुड़ाव के कारण विशेष महत्व रखती है।

सिपाही से महासचिव तक—हरेंद्र सिंह की कहानी

हरेंद्र सिंह का सफर बिहार पुलिस के एक सिपाही से शुरू होकर सब इंस्पेक्टर, फिर मुख्यमंत्री के सुरक्षा अधिकारी और अब बिहार राज्य नागरिक परिषद के महासचिव तक पहुंचा है। तीन दशक से अधिक समय तक नीतीश कुमार के साथ बने रहना उनके करियर की सबसे प्रमुख पहचान रही है। अब नागरिक परिषद में महासचिव की जिम्मेदारी मिलने के बाद वह एक नई सार्वजनिक भूमिका में नजर आएंगे।

इस नियुक्ति ने एक बार फिर यह सवाल भी चर्चा में ला दिया है कि लंबे समय तक प्रशासनिक और राजनीतिक नेतृत्व के करीब रहकर काम करने वाले लोगों को किस तरह नई जिम्मेदारियां मिलती हैं। हरेंद्र सिंह के मामले में यह सफर पुलिस सेवा से शुरू होकर सार्वजनिक जीवन की अहम जिम्मेदारी तक पहुंचा है।